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सीजी न्यूज 24 रायपुर, राजस्व विभाग द्वारा भूईयाॅ साफ्टवेयर में डेटा सुधार की अंतिम तिथि अचानक आसन्न 3 नवंबर तय‌ कर दिये जाने से गिरदावरी प्रविष्टि में हुये गलतियों को सुधरवाने तहसीलदारों का चक्कर काट रहे किसानों में हड़कंप मच गया है । शासन द्वारा किसान पंजीयन की अंतिम तिथि 10 नवंबर निर्धारित करने के बाद भी जारी इस आदेश से डेटा सुधरवाने भटक रहे किसानों का पंजीयन न हो पाने का ख़तरा है । किसान संघर्ष समिति के संयोजक भूपेन्द्र शर्मा ने गिरदावरी प्रतिवेदन में प्रविष्टि के बाद भी भूईयाॅ साफ्टवेयर के‌ डाटा में किसी तकनीकी गड़बड़ी अथवा पटवारियों के चूक की वजह से हुये गलतियों के लिये इसे किसानों को दोषी ठहराने का कृत्य निरूपित करते हुये ऐसे किसी भी किसान के पंजीयन होते तक डाटा सुधार चालू रखने की मांग शासन से की है ।       ज्ञातव्य हो कि शासन ने इस वर्ष उपार्जन केन्द्रों के माध्यम से समर्थन मूल्य पर धान‌ खरीदी करने के लिये प्रत्येक पटवारी को खेतों में जा बोये गये फसल का प्रत्यक्ष अवलोकन कर गिरदावरी प्रतिवेदन तैयार करने व इसके पश्चात इसका प्रारंभिक प्रकाशन कर दावा – आपत्ति मंगा उसका निपटारा कर बीते 14 अक्टूबर तक भूईयाॅ साफ्टवेयर में डाटा प्रविष्टि अंतिम रूप से कर दिये जाने का आदेश दिया था । बीते कल 31अक्टूबर को प्रदेश के राजस्व व आपदा प्रबंधन विभाग ने सभी जिलाधीशों के नाम एक आदेश जारी कर बताया है कि इस साल धान / मक्का उपार्जन के लिये किसान पंजीयन हेतु भूईयाॅ साफ्टवेयर को पंजीयन साफ्टवेयर से लिंक किया गया है । खाद्य विभाग द्वारा  भूईयाॅ साफ्टवेयर से 14 अक्टूबर तक की गई फसल प्रविष्टि के डेटा को ही स्वीकार किये जाने की जानकारी देते हुये आगे बतलाया गया है कि देखा जा रहा है कि अंतिम प्रकाशन के बाद भी प्रविष्ट डेटा में  तहसीलदार के अनुमोदन पश्चात संशोधन किया गया है और इसकी जानकारी संबंधित सहकारी समितियों को नहीं दी जा रही है जिसके चलते  किसानों द्वारा पजीयत कराते गये रकबे व भूईयाॅ साफ्टवेयर में प्रविष्ट रकबे में अंतर परिलक्षित हो रहा है । परिपत्र में इसे देखते हुये  निर्देश दिया गया है कि किसानों‌ द्वारा किसी डेटा में सुधार हेतु आपत्ति/आवेदन दिये जाने पर तहसीलदार स्वयऺ स्थल निरीक्षण कर फ़सल के डेटा में अनिवार्य रूप से आसन्न 3 नवंबर तक संशोधन कर लें व‌ संबंधित सहकारी समिति सहित संबंधित किसान को इसकी जानकारी दें । इधर किसान संघर्ष समिति के संयोजक भूपेन्द्र शर्मा का कहना है कि शासन ने बीते साल पंजीयत किसानों को पुनः पंजीयन हेतु सोसायटियों का चक्कर न काटने की सलाह देते हुये पटवारियों के अंतिम गिरदावरी प्रतिवेदन के आधार पर भूईयाॅ साफ्टवेयर में डाटा प्रविष्टि का आश्वासन दिया था पर किसानों को जानकारी मिल रही है कि अंतिम गिरदावरी प्रतिवेदन में प्रविष्टि होने के बाद भी भूईयाॅ साफ्टवेयर में खसरा नंबर व रकबो की गड़बड़ी दिख रही है जिसके चलते पंजीयन नहीं हो पा रहा है और इसी के चलते किसान संबंधित तहसीलदार व सोसायटी के चक्कर काट रहे हैं पर सुधार के बदले  तहसीलदारों व सोसायटियों द्वारा किसानों को एक – दूसरे का चक्कर कटवाया जा रहा है । उन्होंने अंतिम पटवारी प्रतिवेदन के आधार पर किसानों को चक्कर कटवाये बिना भूईयाॅ साफ्टवेयर में राजस्व विभाग द्वारा डाटा सुधरवाने की व्यवस्था का आग्रह करते हुये जानकारी दी है कि इसके सहित पंजीयन में आ रहे अन्य दिक्कतों को ले कर शासन – प्रशासन के जिम्मेदारों को कल ज्ञापन सौंपा जावेगा ।

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  1. किसान संघर्ष समिति के संयोजक भूपेंद्र शर्मा राजस्व मंत्री द्वारा जारी भुईयां में पंजीयन हेतु किसानों के लिए जो फरमान जारी किया है वह किसानों के हित में प्रतीत नहीं होता राजस्व विभाग द्वारा बिना युद्धस्तर तैयारी के 3 नवंबर अंतिम तिथि दिया जाना को मैं तुगलकी आदेश मानता हूं श्री भूपेंद्र शर्मा जी की पहल स्वागत योग्य आशा है राज्य सरकार जो अपने आप को किसानों की सरकार मानती है तो निश्चित रूप से मांग पत्र पर गंभीरता से चिंतन का निर्णय निर्णय अवश्य लेगी ऐसा मेरा मानना है

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