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रांची. झारखंड में ट्राइब्स एडवाइजरी काउंसिल (TAC) को लेकर राज्य की हेमंत सोरेन सरकार और राजभवन आमने-सामने है. ऐसा TAC की नई नियामवाली की अधिसूचना के बाद देखने को मिल रहा है. एक तरफ नई नियामवाली में राज्यपाल के अधिकार को खत्म करते हुए मुख्यमंत्री को जनजातीय परामर्शदात्री परिषद.(TAC ) का सदस्य मनोनीत करने का अधिकार मिल गया है, वहीं राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू के अधिकार पर अतिक्रमण के बाद राज्य की मुख्य विपक्षी दल बीजेपी सरकार पर हमलावर हो गई है. झारखंड में TAC का मुद्दा गर्म है. TAC के मुद्दे पर हालात कुछ ऐसे है कि राज्य की हेमंत सोरेन सरकार और राजभवन आमने-सामने है. पहले TAC के गठन को लेकर सरकार के द्वारा राजभवन भेजी गई फाइल दो बार लौटाने के बाद विवाद बढ़ा था, इस बार राज्य सरकार ने TAC की नई नियामवाली की अधिसूचना जारी कर इस विवाद को और बढ़ा दिया है. इस नई नियमावली में राज्यपाल के अधिकार को खत्म करते हुये मुख्यमंत्री के निर्णय को ही अंतिम माना गया है. हालांकि संवैधानिक रूप से राज्यपाल इसके बावजूद भी हस्तक्षेप करते हुई परामर्श दे सकती है. सत्ताधरी दल के विधायक बंधु तिर्की इस विवाद को बीजेपी की राजनीति का हिस्सा बतातें हुये सवाल खड़े कर रहे है. उनके अनुसार बीजेपी राज्यपाल को सामने कर मामले को बेचिदा बना रही है. TAC की नई नियामवाली की घोषणा के बाद से बीजेपी लगातार हमलवार नजर आ रही है . बीजेपी का प्रतिनिधि मंडल राज्यपाल से मिलकर अपनी आपत्ति दर्ज करा चुका है . 20 सदस्यों वाली इस TAC में 7 सदस्यों की उपस्थिति वाली बैठक को मान्य बताया गया है. यानी TAC की बैठक में 4 सदस्यों की सहमति पर भी उस प्रस्ताव पर मुहर लग सकती है. इस बिंदु पर बीजेपी के अरुण उरांव खास आपत्ति है . उनका साफ कहना है कि 20 सदस्यों वाली कमिटी में किसी प्रस्ताव पर अंतिम मुहर 4 लोगों की सहमति से न्याय उचित नहीं लगता . इतना ही नहीं राज्यपाल के अधिकार को खत्म करने के निर्णय को भी बीजेपी सही नहीं मानती . राज्य में TAC का गठन नहीं होने से इसका सीधा नुकसान राज्य की जनता को और खास कर ट्राईबल समाज को हो रहा है. जानकारी के अनुसार TAC की नई नियामवाली की फाइल भी राजभवन ने सरकार से तलब की है. ये विवाद कब और कहां जा कर खत्म होगा ये कह पाना मुश्किल है, पर ये बात जरूर है कि TAC का मसला जितनी जल्दी सुलझा जाए राज्य के लिये उतना ही अच्छा होगा.

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