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रायपुर, मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा है कि राज्य सरकार आदिवासियों के हकों और हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। राज्य सरकार आदिवासी समाज को उनके संवैधानिक और कानूनी अधिकार देने के लिए हर संभव कदम उठा रही है। आदिवासी समाज से जुड़ी समस्याओं के निदान के लिए राज्य सरकार ने मंत्रिमण्डलीय उप समिति एवं मुख्य सचिव की अध्यक्षता में संबंधित विभागों के सचिवों की उच्च स्तरीय कमेटी गठित की गई है। सचिवों की उच्च स्तरीय कमेटी आदिवासी समाज के प्रतिनिधियों एवं प्रमुखों से सामाजिक, शैक्षणिक एवं आर्थिक विकास के साथ-साथ आदिवासी समाज के संवैधानिक हितों के संरक्षण के लिए विचार-विमर्श कर अपनी रिपोर्ट मंत्रिमण्डलीय उप समिति को प्रस्तुत करेगी। मंत्रिमंडलीय उप समिति यह रिपोर्ट केबिनेट में प्रस्तुत करेगी। 


मुख्यमंत्री आज शाम यहां अपने निवास कार्यालय में राजनांदगांव, धमतरी, बालोद, गरियाबंद और महासमुंद जिले से आए आदिवासी समाज के प्रतिनिधि मंडल से चर्चा कर रहे थे। ज्ञातव्य है कि मुख्यमंत्री विभिन्न जिलों के आदिवासी समाज के प्रतिनिधियों को मुख्यमंत्री निवास में आमंत्रित कर उनसे सीधे संवाद करके राज्य सरकार की योजनाओं की मैदानी स्थिति की जानकारी, अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंच रहा है या नहीं, योजनाओं के क्रियान्वयन में यदि कोई समस्या आ रही है, तो इसकी जानकारी ले रहे हैं। साथ ही वे आदिवासी समाज के लोगों से यह भी पूछ रहे हैं कि समाज के हित में और कौन-कौन से कार्य करने की आवश्यकता है। इसी कड़ी में आज पांच जिलों से आए आदिवासी समाज के लोगों से मुख्यमंत्री विचार-विमर्श किया। इसके पहले बस्तर संभाग के 7 जिले से आदिवासी समाज और अन्य पिछड़ा वर्ग समाज के लोग मुख्यमंत्री निवास आ चुके हैं। 


मुख्यमंत्री ने प्रतिनिधि मंडल को सम्बोधित करते हुए कहा कि सामाजिक संगठन अपने समाज के अधिक से अधिक लोगों को राज्य शासन की योजनाओं का लाभ लेने के लिए प्रेरित करें। सामाजिक संगठन अपनी बैठकों में वन अधिकार मान्यता पत्रों के वितरण के विषय को चर्चा के प्रमुख बिन्दु के रूप में शामिल करें और समाज के लोगों से यह जानकारी लें कि उन्हें वन अधिकार पट्टे मिले हैं या नहीं यदि पट्टे नहीं मिले हैं तो इसके लिए संबंधित एसडीएम कार्यालय में आवेदन जमा कराए जाएं। श्री बघेल ने कहा कि आदिवासी अंचलों में बारहमासी नदी-नाले तो हैं लेकिन इन क्षेत्रों के 85 विकासखण्डों में सिंचाई का प्रतिशत कम है। राज्य सरकार द्वारा नदी-नालों में वाटर रि-चार्जिंग के लिए नरवा योजना का संचालन वन विभाग के माध्यम से किया जा रहा है। इस योजना का अधिक से अधिक लाभ लेने की पहल भी समाज द्वारा की जानी चाहिए।

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