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शिविर के समापन में कृष्णामृतानन्द बोले-स्वामी विवेकानन्द के आदर्शों को जीवन में उतारें

0सबसे उत्तम तीर्थ अपना मन है जो कर्म, ज्ञान और भक्ति का संगम है सफल जीवन का आधार है – डॉ. रत्ना नशीने  

नारायणपुर, इंदिरा गांधी कृषि  विश्वविधलाय रायपुर के अंतर्गत संचालित कृषि महाविधलाया एवम अनुसंधान केन्द्र नारायणपुर  की राष्ट्रीय सेवा योजना ईकाई द्वारा  ग्राम पालकी में आयोजित सात दिवसीय विशेष शिविर का  समापन हुआ । समापन में स्वामी कृष्णामृतानन्द प्राचार्य स्वामी विवेकानंद विद्यापीठ रामकृष्णा मिशन नारायणपुर, विशेष अथिति डॉ. देबेनदु दास वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख कृषि विज्ञान केन्द्र नारायणपुर और सुश्री निशा उईके रही है । कार्यक्रम  की अध्यक्षता अधिष्ठता एवं कार्यक्रम अधिकारी डॉ.  रत्ना नशीने ने की । अथितियों  ने कार्यक्रम का प्रारंभ दीप प्रज्वलन,मलायार्पण एवम स्वयंसेवाको ने लक्ष्य गीत से किया ।   

मुख्य अतिथि स्वामी कृष्णामृतानन्द ने राष्ट्रीय स्वयं सेवकों एवं प्राथमिक स्कूल के विद्यार्थियो को सम्बोधित करते हुए कहा कि स्वामी विवेकानन्द के आदर्शों को जीवन में उतारने से हम अपने जीवन को सफल बना सकते है । उनके आदर्शों को लेकर ही राष्ट्रीय सेवा योजना की स्थापना किए है जो युवा शक्ति को संगठित कर राष्ट्र निर्माण में सहयोग दे सके।

कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. दिब्येंदु दास ने इस अवसर पर राष्ट्रीय सेवा योजना से जुड़े अपने विद्यार्थीजीवन के बातों को बताते हुए उन्हें जीवन में सफल होने की महत्वपूर्ण जानकारियां दी एवं स्वामी विवेकानन्द को अपना आदर्श बताते हुए उनके विचारों को अपने जीवन में लाने को कहा ।

अधिष्ठता एवं कार्यक्रम अधिकारी डॉ. रत्ना नशीने  ने स्वयंसेवाको से कहा कि यह  मत सोचो कि मुझे  क्या मिला है, यह सोचो की मैने क्या पाया है। इन सात दिवस में आपको जो अनुभव हुए है ये  आपके  जीवन में बहुतकाम आएंगे । डॉ. रत्ना नशीने ने कहा कि स्वामी विवेकानंद के आदर्शों को आत्मसात  करो और आप स्वयं ही अपने व्यक्तिव में परिवर्तन पाओगे । हमे नई परिस्थितियों में नई सोच के साथ काम करना चाहिए परिस्थितियों से डर कर भागना नहीं है। जो परिस्थितियां आती है वो अपने साथ विकल्प भी लाती है उसमे से हमे सही विकल्प लेना है ।  नजरिया एक छोटी सी चीज है परंतु इससे बहुत फर्क पड़ता है और सबसे उत्तम तीर्थ अपना मन है जो कर्म, ज्ञान और भक्ति का संगम है सफल जीवन का आधार है।

विशेष अतिथि प्राथमिक स्कूल की शिक्षिका सुश्री निशा उइके ने हर्ष व्यक्त करते हुए कहा कि जल संरक्षण एवं पॉलीथिन उन्मूलन के लिए छात्र छात्राओं को जागरुक किया गया। राष्ट्रीय सेवा योजना के  स्वयं सेवको ने स्कूल के  छात्र एवम छात्राओ को पौधों ,मधुमाखी का हमारे जीवन मे  महत्व और स्कूल में फल-फूल के पौधों का रोपण किया जो प्रशंसनीय है। सह प्राध्यापक डॉ. जीवन लाल नाग द्वारा बच्चो के समक्ष सेवा भावना को अपने सरल शब्दों में रखते हुए कहा की स्वयंसेवक देश के वे सजग एवं स्फूर्त पहरेदार हैं जो किसी भी आपदा के समय तैयार रहते हैं और अपना योगदान देते हुए जनहित के साथ जुड़े रहते हैं।

 किशोर मण्डल अथिति शिक्षक ने शिविर का प्रतिवेदन पढ़ते हुए जानकारी दी की शिविर का आयोजन 3 मार्च से 10 मार्च तक किया गया और शिविर में संचालित गतिविधियों की जानकारी दी जिसमे योग, मेडिटेशन, प्रभात फेरी , परियोजना कार्य में स्वच्छता अभियान ,मृदा  व पर्यावरण  संरक्षण, जैविक खाद निर्माण , पौध रोपण , नाली निर्माण , पशू टीकाकरण एवम टैगिंग , स्लोगन लिखायी , पोषण जागरुकता अभियान एवम कसवा चिप्स ,टमाटर ,खट्टा भाजी, मुली का आचार बनाने का प्रोयोगिक कार्य किया गया । बौद्धिक परिचर्चा में नारी के अधिकार, पोषण आहार, साइबर क्राइम , फल सब्जियों का परिरक्षण ,  जैविक खाद एवम मृदा स्वास्थ्य आदि विभिन्न विषयों पर स्वयंसेवको एवम ग्रामीणों को  जानकारी दी गई। स्वयंसेवको  की ओर से कु प्रीति ने शिविर में हुए अनुभवों को साझा किया ।

 प्राथमिक स्कूल पालकी में राष्ट्रीय स्वयं सेवको के द्वारा चित्रकला पेंटिंग प्रतियोगिता करायी गई जिसमे प्रतिभागियों को मुख्य अतिथि स्वामी कृष्णामृतानन्द पुरुस्कार वितरित किए । समापन  समारोह मुख्यअतिथि के कर कमलों से  स्वयंसेवकों को उनके उत्कृष्ठ प्रदर्शन पर सर्वश्रेष्ठ शिविरार्थी का पुरस्कार पुरुष एवं महिला, सर्वश्रेष्ठ अनुशासनपुरस्कार एवं अन्य पुरस्कार से पुरस्कृत किया गया। शिक्षको को प्रशस्तिपत्र दिया गया।  इस अवसर पर प्राथमिक स्कुल के छात्र – छात्राओं को पाठन सामग्री वितरित की गई  अंत में सांस्कृतिक कार्यक्रम की प्रस्तुति स्वयंसेवाको क द्वारा दी गई नुक्कड़ नाटक के माध्यम से प्लास्टिक से नुकसान, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ पर कविता, कर्मा नृत्य , देशभक्ति गीत, की प्रस्तुति दी गई। 

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