SC; यूजीसी के नए नियम पर सुप्रीम कोर्ट की रोक, क्या बीजेपी की चुनौती कम होगी?

नई दिल्ली, विवाद की वजह बने यूजीसी के नए नियम को सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल रोक दिया है, लेकिन क्या इस रोक से बीजेपी की चुनौती कम होगी? सुप्रीम कोर्ट के फैसले का बीजेपी नेता स्वागत कर रहे हैं और कांग्रेस नेता भी। लेकिन यूजीसी के नए नियम का विरोध करने वाले संगठन और स्टूडेंट्स सिर्फ रोक से संतुष्ट नहीं हैं और अपनी लड़ाई जारी रखने की बात कर रहे हैं। यूजीसी के नए नियम बीजेपी के लिए गले की फांस बनता दिख रहा है जिसे बीजेपी न उगल सकती है ना निगल सकती है।
लड़ाई जारी रखने की बात
सुप्रीम कोर्ट के स्टे का स्वागत करते हुए करणी सेना से लेकर परशुराम सेना तक और अलग अलग ब्राह्मण समाज के संगठन कह रहे हैं कि ये सिर्फ आधी जीत है। साथ ही ये भी कि जब तक पूरे नियम वापस नहीं ले लिए जाते लड़ाई जारी रहेगी। इसका साफ संदेश है कि बीजेपी की चुनौती सुप्रीम कोर्ट के स्टे से कम नहीं हो रही है। बल्कि जहां एक तरफ जनरल कटैगरी के लोग बीजेपी को लेकर नाराजगी दिखा हैं और सड़कों से लेकर सोशल मीडिया तक अपना गुस्सा जता रहे हैं वहीं इस स्टे के बाद एससी-एसटी और ओबीसी समुदाय के संगठन विरोध की तैयारी कर रहे हैं ताकि सरकार अपना स्टैंड ना बदले।
सरकार का क्या होगा स्टैंड
सरकार को जब सुप्रीम कोर्ट में जवाब देना होगा तो सरकार क्या कहेगी? अगर सरकार यूजीसी के नए नियमों को सही बताती है तो जनरल कटैगरी विरोध का स्वर बुलंद किए ही हुए है, जो और तेज हो सकता है। अगर सरकार नियमों को वापस लेने की बात कहती है तो फिर एससी, एसटी, ओबीसी की तरफ से विरोध झेलना पड़ सकता है।
आरएलपी के सांसद हनुमान बेनिवाल ने कहा कि सरकार अपना स्टैंड बदलती है तो ये संदेश जाएगा कि ये सरकार ने ही करवाया था। अगर अपने स्टैंड पर टिकी रहेगी तो सरकार की मजबूती का संदेश जाएगा। साथ ही बेनिवाल ने कहा कि जाति के आधार पर कैंपस में वैमनस्यता नहीं बढ़नी चाहिए। उन्होंने कहा कि एससी, एसटी, ओबीसी या फिर किसी भी जाति के स्टूडेंट का अगर उत्पीड़न होता है या अपमानित किया जाता है तो आरोपी के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए
सुप्रीम कोर्ट स्टे पर क्रेडिट का खेल
एक तरफ जहां बीजेपी नेता सुप्रीम कोर्ट के स्टे का क्रेडिट अपने नेताओं को दे रहे हैं वहीं सोशल मीडिया में लगातार विरोध कर रहे लोग सवाल उठा रहे हैं और कह रहे हैं कि स्टे का क्रेडिट बीजेपी को या उसके नेताओं को बिल्कुल नहीं जाता। बीजेपी सांसद गिरिराज सिंह ने सुप्रीम कोर्ट के स्टे पर सोशल मीडिया पर लिखा कि पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह का हार्दिक आभार। साथ ही लिखा कि इससे स्टूडेंट्स, टीचर्स और शैक्षणिक संस्थाओं को राहत मिली है। लेकिन सोशल मीडिया पर ही लोग उन्हें घेरने भी लगे हैं और सवाल पूछ रहे हैं कि नियम किसने बनाए थे।
विपक्ष तो घेरेगा ही
यूजीसी के नियम सरकार और बीजेपी के गले की फांस बनते दिख रहे हैं। जहां विपक्ष के लोग इन नियमों को असंवैधानिक बता रहे हैं या फिर और चर्चा की जरूरत बता रहे हैं, वही विपक्ष सरकार पर वार करने के लिए तैयार है। अगर सरकार नियमों को पूरा वापस लेती है तो भी विपक्ष को एक और मुद्दा मिलना तय है। टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने सही किया। साथ ही ये भी जोड़ दिया कि वक्फ कानून के लिए भी बहुत से प्रावधान पर कोर्ट ने रोक लगाई, एसआईआर पर भी कई चीजें बदली, संविधान सबको मानना पड़ेगा। तुगलकी राज नहीं चलेगा।




