WATER; महानदी जल विवाद निर्णायक मोड़ पर, ट्रिब्यूनल ने छत्तीसगढ़-ओडिशा को दिया 11 जुलाई तक का अल्टीमेटम

रायपुर, महानदी के जल बंटवारे को लेकर छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच वर्षों से चल रहा विवाद अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। महानदी जल विवाद ट्रिब्यूनल ने दोनों राज्यों को 11 जुलाई तक आपसी सहमति से समाधान करने का अंतिम अवसर दिया है। ट्रिब्यूनल की अध्यक्ष न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) बेला त्रिवेदी ने स्पष्ट किया कि यदि तय समय तक सहमति नहीं बनती है तो ट्रिब्यूनल मामले की नियमित सुनवाई शुरू करेगा।

24 बैठकों के बाद भी नहीं बनी सहमति

केंद्र सरकार द्वारा गठित ट्रिब्यूनल के समक्ष दोनों राज्यों की तकनीकी समितियों के बीच अब तक 24 दौर की बैठकें हो चुकी हैं, लेकिन जल बंटवारे पर सहमति नहीं बन सकी है। अप्रैल में ट्रिब्यूनल की टीम ने महानदी बेसिन का संयुक्त दौरा कर जल उपलब्धता का भी आकलन किया था। इसके बावजूद दोनों पक्ष अपने-अपने रुख पर कायम हैं।

बिजली उत्पादन और पानी की मांग पर मतभेद

सूत्रों के अनुसार, ओडिशा सरकार गर्मियों में 300 मेगावाट बिजली उत्पादन के लिए अतिरिक्त पानी की मांग कर रही है। वहीं, छत्तीसगढ़ सरकार का कहना है कि गर्मी के मौसम में महानदी बेसिन में पर्याप्त जल उपलब्ध नहीं रहता। राज्य ने विकल्प के तौर पर ओडिशा को 300 मेगावाट बिजली उपलब्ध कराने का प्रस्ताव दिया है। साथ ही सुझाव दिया है कि ओडिशा अगले 10 वर्षों में महानदी डेल्टा क्षेत्र में सिंचाई परियोजनाओं का विस्तार करे, जिससे भविष्य में जल संकट की स्थिति कम हो सके।

डेल्टा क्षेत्र के बेहतर प्रबंधन पर भी नहीं बनी सहमति

विभागीय अधिकारियों का कहना है कि महानदी डेल्टा का काफी पानी बिना उपयोग के समुद्र में चला जाता है, जबकि उसके बेहतर प्रबंधन की आवश्यकता है। इस मुद्दे पर भी दोनों राज्यों के बीच सहमति नहीं बन सकी है। करीब 900 किलोमीटर लंबी महानदी का 357 किलोमीटर हिस्सा छत्तीसगढ़ और 494 किलोमीटर हिस्सा ओडिशा में बहता है। शिवनाथ, हसदेव, मांड, तेल, जोंक, इब और ओंग जैसी प्रमुख सहायक नदियों वाला यह बेसिन दोनों राज्यों की सिंचाई, पेयजल और औद्योगिक जरूरतों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

11 जुलाई की सुनवाई पर टिकी निगाहें

राज्य के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण मांझी के बीच भी इस मुद्दे पर चर्चा हो चुकी है। ओडिशा सरकार ने इस मामले के लिए सर्वदलीय समिति भी बनाई है। अब सभी की निगाहें 11 जुलाई को होने वाली ट्रिब्यूनल की सुनवाई पर टिकी हैं, जहां यह तय होगा कि विवाद आपसी सहमति से सुलझेगा या कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

  • Narayan Bhoi

    Narayan Bhoi is a veteran journalist with over 40 years of experience in print media. He has worked as a sub-editor in national print media and has also worked with the majority of news publishers in the state of Chhattisgarh. He is known for his unbiased reporting and integrity.

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