
रायपुर, छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच लंबे समय महानदी जल विवाद चला आ रहा है. इसके समाधान के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में बैठक हुई, जिसमें छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने अपने-अपने राज्यों का पक्ष रखा. केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल, केंद्रीय जल आयोग के अध्यक्ष, दोनों राज्यों के मुख्य सचिव भी मौजूद रहे. जुलाई में भी दोनों मुख्यमंत्रियों की जल शक्ति मंत्री की अध्यक्षता में बैठक हो चुकी है और दोनों राज्यों ने सौहार्दपूर्ण समाधान के लिए तकनीकी बातचीत जारी रखने पर सहमति जताई थी.
बैठक में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने समाधान का स्पष्ट रोडमैप रखते हुए कहा कि महानदी दोनों राज्यों को बांटने वाली नहीं, बल्कि जोड़ने वाली नदी है. उन्होंने कहा कि समाधान ऐसा होना चाहिए, जिसमें किसी की हार न हो. छत्तीसगढ़ का आग्रह न्यायपूर्ण, निष्पक्ष, वैज्ञानिक, पारदर्शी और टिकाऊ समाधान का है. जिसमें दोनों राज्यों के किसानों, आम लोगों और आने वाली पीढ़ियों के हित सुरक्षित रहें.
हीराकुंड के संचालन के लिए छत्तीसगढ़ करेगा सहयोग
विष्णु देव साय ने कहा कि महानदी का उद्गम छत्तीसगढ़ में है और उसका आधे से अधिक जलग्रहण क्षेत्र राज्य में आता है. इसलिए छत्तीसगढ़ के किसानों, सिंचाई और आदिवासी अंचलों की वास्तविक जरूरतों को समाधान में उचित स्थान मिलना चाहिए. साथ ही उन्होंने ओडिशा के हितों के प्रति छत्तीसगढ़ की प्रतिबद्धता स्पष्ट करते हुए कहा कि हीराकुंड ओडिशा की जीवनरेखा है और छत्तीसगढ़ उसके हितों का सम्मान करते हुए उसके सुचारु संचालन में सहयोग करेगा.
छत्तीसगढ़ ने नक्सलवाद को मिटाया
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बस्तर में नक्सलवाद के खिलाफ अभियान का उल्लेख करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के संकल्प और प्रतिबद्धता का प्रभाव स्वयं देखा है. उन्होंने कहा कि 31 मार्च 2026 की समय-सीमा के साथ नक्सलवाद के खिलाफ अभियान को आगे बढ़ाया गया. बस्तर में अब बंदूक के बजाय विकास की चर्चा हो रही है. उन्होंने विश्वास जताया कि जिस संकल्प से बस्तर में दशकों पुरानी चुनौती के समाधान की दिशा में बदलाव आया, उसी संकल्प से महानदी विवाद का भी स्थायी समाधान निकलेगा. केंद्र ने भी 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद के उन्मूलन का लक्ष्य पूरा होने की जानकारी दी है.
विष्णु देव साय ने ओडिशा के मुख्यमंत्री को बताया छोटा भाई
ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी को अपना ‘छोटा भाई’ बताते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि दोनों राज्य सामाजिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक रूप से गहराई से जुड़े हैं. उन्होंने कहा कि दोनों मुख्यमंत्री वनांचल की मिट्टी से निकले हैं और जानते हैं कि किसान के खेत तक पानी पहुंचने का क्या महत्व है..साय ने कहा कि महाप्रभु जगन्नाथ की आस्था शिवरीनारायण से पुरी तक एक सांस्कृतिक धारा में बहती है. इसलिए महानदी को विवाद का आधार नहीं, बल्कि दोनों राज्यों के बीच सहयोग, विकास का माध्यम बनाया जाना चाहिए.
CWC के वैज्ञानिक आकलन पर भरोसा
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ को जल शक्ति मंत्रालय की मध्यस्थता और केंद्रीय जल आयोग के वैज्ञानिक एवं पारदर्शी तकनीकी आकलन पर पूरा भरोसा है. उन्होंने कहा कि दोनों राज्यों के परामर्श से जो समाधान सामने आएगा, छत्तीसगढ़ उसे सकारात्मक भावना से स्वीकार करने और आगे बढ़ाने में पूरा सहयोग करेगा. जुलाई की बैठक में भी केंद्र ने संवाद, तकनीकी सहयोग के माध्यम से न्यायसंगत एवं टिकाऊ समाधान पर जोर दिया था. केंद्रीय जल आयोग की अध्यक्षता में गठित विस्तारित तकनीकी समिति ने भी लंबित तकनीकी मुद्दों पर काम शुरू किया है.
पहले भी महानदी के मुद्दे पर हो चुकी है बैठक
उल्लेखनीय है कि महानदी जल बंटवारे का विवाद 2018 से महानदी जल विवाद न्यायाधिकरण के समक्ष लंबित है. हाल के महीनों में दोनों राज्यों के बीच राजनीतिक और तकनीकी स्तर पर बातचीत तेज हुई है. 20 सितंबर को भुवनेश्वर में मुख्यमंत्री साय और मुख्यमंत्री माझी की बैठक में भी महानदी के मुद्दे पर चर्चा हुई थी. दोनों पक्षों ने संवाद से समाधान की उम्मीद जताई थी.







