कृषि

कोरोना; किसानों को बर्बादी से बचाने विशेष योजना लाएं सरकार

राहत पैकेज की घोषणा करे सरकार -पराते रायपुर, छत्तीसगढ़ किसान सभा ने लॉक डाउन के चलते प्रदेश की खेती-किसानी को हुए नुकसान की भरपाई करने के लिए एक विशेष योजना लाने की मांग राज्य और केंद्र सरकार से की है, ताकि कृषि आधारित प्रदेश की अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए खेती-किसानी और उसमें लगे किसानों व खेत मजदूरों की आजीविका की सुरक्षा की जा सके।
आज यहां जारी एक बयान में किसान सभा के राज्य अध्यक्ष संजय पराते और महासचिव ऋषि गुप्ता ने कहा है कि जनवरी-फरवरी के महीने में असमय बरसात और ओलावृष्टि ने पहले ही रबी मौसम की फसलों को बर्बाद कर दिया था और रही-सही कसर कोरोना वायरस के प्रकोप के कारण किए गए अनियोजित लॉक डाउन ने पूरा कर दिया है। कटाई, परिवहन व विपणन पर अंकुश के कारण हजारों करोड़ रुपयों की खड़ी फसलें और सब्जियां बर्बाद हो रही हैं, जिसका उत्पादन किसानों ने कर्ज लेकर किया है।
किसान सभा नेताओं ने कहा है कि कोरोना के खौफ, पुलिसिया सख्ती व सुरक्षा किटों के अभाव के कारण मजदूर घरों से नहीं निकल पा रहे हैं। एक ओर खेतों में सब्जियां हो खराब हो रही है या उत्पादक किसान इसे औने-पौने दामों में बेचने के लिए बाध्य हो रहे हैं, वहीं दूसरी ओर उपभोक्ताओं के लिए इसके दाम आसमान छू रहे हैं। सब्जियों और जीवनोपयोगी आवश्यक वस्तुओं पर मूल्य नियंत्रण के सरकारी दावों को बिचौलियों ने ध्वस्त कर दिया है।
किसान सभा नेताओं ने मांग की है कि रबी सीजन के लिए किसानों द्वारा लिए गए कर्ज को माफ किया जाए तथा उन्हें अगले सीजन के लिए मुफ्त में गुणवत्तापूर्ण बीज व खाद के साथ ही कर्ज भी उपलब्ध करवाया जाए।  उन्होंने सुझाव दिया है कि खेत मजदूरों के लिए काम व आय सुनिश्चित करने के लिए कटाई व परिवहन के कार्य को मनरेगा में शामिल किया जाए तथा गांव में काम न दे पाने की स्थिति में उन्हें बेरोजगारी भत्ता दिया जाए तथा दिहाड़ी मजदूरों की आजीविका सुनिश्चित करने के लिए रोजगार गारंटी अधिनियम का विस्तार शहरी क्षेत्रों में भी किया जा सकता है।
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा प्रधानमंत्री मोदी को लिखे पत्र पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए दोनों किसान सभा नेताओं ने कहा है कि हमारे प्रदेश की जीडीपी 3.25 लाख करोड़ रुपयों से ऊपर है और कैग हर साल 5000 करोड़ रुपयों के हेर-फेर की रिपोर्ट देता है। ऐसे में इस प्रदेश के सामाजिक-आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए केंद्र सरकार की मदद का इंतज़ार किये बिना हमारे संसाधनों के बल पर राहत पैकेज की घोषणा राज्य सरकार को तुरंत करनी चाहिए।

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