कृषि

प्रदेश के एक लाख किसान नहीं बेच पाए धान

1953936 किसानो ने धान बेचने किया था पंजीयन 18.45 लाख किसान ही धान बेच पाए

रायपुर, धान खरीदी में अव्यवस्था के चलते प्रदेश में करीब 1.09 लाख किसान धान बेच नहीं पाए जबकि धान खरीदी के लिए 5 दिन की अवधि बढ़ाई गई थी। टोकन देने में अनियमितता के चलते भी किसान समय पर धान नहीं बेच पाए हालाकि गत वर्ष की तुलना में करीब ढाई लाख ज्यादा किसानों से धान खरीदी की गई। करीब 18.45 लाख किसानो से खरीदी की गई। पिछले साल 15.71 लाख किसान धान बेच पाए थे।

राज्य शासन ने समर्थन मूल्य पर 1 दिसंबर से धान खरीदी शुरू की थी निर्धारित तिथि 15 फरवरी के बाद 5 दिन की अवधि बढ़ाई गई इसके बाद भी 1.09 लाख किसान धान नहीं बेच सके, करीब 195 3936 किसानों ने धान बेचने के लिए पंजीयन कराया था राज्य शासन ने भी इस साल धान के बफर उत्पादन को देखते हुए 85 लाख मी.टन धान खरीदने का अनुमान रखा था लेकिन टोकन वितरण में अनियमितता की गई पांच के बदले चार टोकन दिए गए एवं चौथे टोकन की अवधि 31 जनवरी को ही समाप्त कर दी गई हालांकि विरोध और हंगामे के चलते कहीं-कहीं पर टोकन जारी किए गए लेकिन उन समितियों में धान रखने के लिए बारदाने भी नहीं थे, हालाकि दावा किया गया है कि  प्रदेश की समितियों में किसानों को चौथा टोकन भी जारी किया गया है और चौथे टोकन पर 3.5 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी की गई है।

अंतिम समय में होहल्ला के बाद बारदाने की व्यवस्था की गई तो समिति प्रबंधकों ने धान के फड ही बंद कर दिए। इसी जद्दोजहद के बीच किसान धान बेच नहीं पाए हालांकि राज्य गठन के बाद अब तक सर्वाधिक 18.45 लाख किसानो से 83 लाख मी. टन धान की खरीदी की गई है इसके बाद भी बड़ी संख्या में किसान धान बेचने से वंचित रह गए।
दरअसल किसानो से खरीदी भी एक साथ प्रति एकड 15 क्विंंटल धान नही की गई सात एवम आठ क्विटल किस्ततो में धान खरीदी के कारण भी किसानो को धान बेचने में दिक्कत हुई। यही वजह है कि अभी भी किसानो के कोठार एवम घरों में धान भरेे पडे हैैै।

प्राप्त आंंकडो के अनुसार रायपुर जिले में ही 4119 किसान धान नही बेच पाए , पंजी करने वाले 116684 में से 112565 किसानो ने धान बेचा । इसी तरह महासमुंद जिले से भी 5753 किसान धान नही बेच सके,134395 में से 128642 किसान ही धान बेच सके।

राज्य सरकार द्वारा प्रदेश के किसानों से 2500 रूपए प्रति क्विंटल के हिसाब से एक दिसम्बर 2019 से 15 फरवरी 2020 तक धान खरीदने का निर्णय लिया गया था। प्रदेश में इस वर्ष ज्यादा किसानों द्वारा पंजीयन कराने के फलस्वरूप धान बेचने की अवधि को 5 दिन और बढ़ाकर 20 फरवरी किया गया। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल स्वयं खरीदी केन्द्रों में पहुंचकर किसानों से चर्चा की और धान खरीदी केन्द्रों की व्यवस्था का जायजा लिया। उन्होंने धान खरीदी में किसानों को कोई परेशानी नहीं होने की भी बात कही थी। मुख्यमंत्री ने धान उपार्जन केन्द्रों में किसानों को मूलभूत जरूरतों जैसे पीने का साफ पानी, स्वच्छता परिसर और किसानों के बैठने के लिए व्यवस्था करने के भी निर्देश दिए थे।

राज्य में अवैध धान की आवक को रोकने के लिए धान खरीदी की अवधि में 4502 प्रकरण दर्ज किए गए। जिसमें लगभग 100.04 करोड़ रूपए मूल्य का 54,819 टन धान मण्डी अधिनियम के अंतर्गत जब्त किया गया। अवैध धान के परिवहन में लिप्त 491 वाहनों पर कार्यवाही की गई।

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