कृषि

बेमौसम बारिश से छत्तीसगढ में आम की फसल चौपट

मौसम में बदलाव से अब आम के बौर में कीट प्रकोप का खतरा बढ़ा

रायपुर, बेमौसम बारिश के साथ मौसम में बदलाव के चलते समूचे प्रदेश में आम की फसल चौपट हो गई है बचे- खुचे आम के फूलों में अब कीट प्रकोप का खतरा बढ गया है  वैसे अन्य रवि फसलों की भी यही हालत है \इमली के अलावा अन्य फसले भी  प्रभावित होंगी ।

अभी फरवरी के प्रथम सप्ताह में प्रदेश में करीब 50 मिलीमीटर बारिश हुई, इसके अलावा ठंड भी बढ़ गई। इसके बाद अभी तापमान बढ़ा लेकिन फिर बदली बारिश की स्थिति निर्मित हुई इसके चलते आम फसल बुरी तरह प्रभावित हुई है। बारिश से आम के पेड़ में लगे बौर झड़ गए और जो बचे थे उस पर कीड़े लग गए , मौसम बदलाव से पेड में बौर की जगह पत्ते आ गए अभी बारिश के बाद तापमान में उतार-चढ़ाव कारण बौर में कीट प्रकोप का खतरा बढ़ गया है, मेंगो हापर [फुदका कीट] एवं भभूतिया रोग का प्रकोप शुरू हो गया है। इसके चलते आम फसल का उत्पादन बुरी तरह प्रभावित होने से इनकार नहीं किया जा सकता । यह स्थिति इमली महुआ आदि फसलो की भी है। वैसे मौसम में बदलाव से साग- सब्जियों की खेती भी प्रभावित हो रही है किसानों को साग-सब्जियों में कीट प्रकोप से जूझना पड़ रहा है।

पौधों का फिजियोलाजी डिस्टर्ब

इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक जी एल शर्मा का कहना है कि आम के बौर पर मौसम का अत्यधिक प्रभाव पड़ता है, खासकर बारिश एवं ठंड के अलावा तापमान में उतार-चढ़ाव आम के बौर को नुकसान पहुंचाता है इससे पौधों का फिजियोलॉजी डिस्टर्ब हो जाता है फूल झड़ जाते हैं अथवा बौर में कीडे लग जाते हैं।बौर की जगह पेडों में पत्ते आ जाते है। छत्तीसगढ़ में आम के बौर आने के समय फरवरी के प्रथम सप्ताह में बारिश हो गई, इसके बाद तापमान बढ़ा लेकिन ठंडी भी तेज हो गई इससे आम के बचे बौर अथवा नए बौर में कीटों का प्रकोप बढ़ गया । यही स्थिति ना केवल छत्तीसगढ़ बल्कि दक्षिण भारत से उत्तर भारत तक की है सभी जगह आम फसल को नुकसान होने की आशंका बढ़ गई है।


साग-सब्जियों मेें भभूतिया व तनाछेदक कीट प्रकोप

कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को मौसम आधारित फसलों की सुरक्षा के लिए सलाह दी हैं। देर से बोई गई गेहूॅं फसल 40-50 दिन का हो गया हो तो वहां यूरिया की दूसरी मात्रा छिड़काव करना उपयुक्त होगा। सरसों फसल में एफिड (मैनी) होने पर इमिडाक्लापिड 80 मि.ली. 200 लीटर पानी में घोल कर प्रति एकड़ छिड़काव किया जा सकता है। कृषि वैज्ञानिकों ने आलू में पछेती अंगमारी रोग आने पर मेटालेक्जिल (1.5 ग्राम) या सायमांक्सीनील (2 ग्राम) दवा का प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें। पिछले दिनों बादल छाए रहने के कारण साग-सब्जियों में एफीड, भटा में तना छेदक लगने की संभावना हैं। इसलिए किसानों के लिए एकीकृत कीट प्रबंधन का प्रयोग जैसे फीरोमोन प्रपंच, प्रकाश प्रपंच या खेतों में पक्षियों के बैठने के लिए खूटी (बर्ड पर्च) लगाना लाभकारी होगा।     

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