कृषि

भोरमदेव कोदो ब्रांड पैकेजिंग लांच

औषधीय गुणों से भरा है कोदो चावल
कोदो-कुटकी प्रसंस्करण मशीन लगने से बैगा आदिवासियों केआर्थिक स्थिति में होगी सुधार
–मो. अकबर

रायपुर, लघु धान्य फसल (कोदो-कुटकी) में कार्बोहाईड्रेट, प्रोटीन, खनिज तत्व, विटामिंस से भरपूर होने के कारण इसे ‘‘न्यूट्रीसिरियल्स‘‘ के नाम से जाना जाता है।बस्तर समेत कबीरधाम जिले में कोदो-कुटकी की खेती लगभग 8955 हेक्टर क्षेत्र में की जाती है। जिले में इसका उत्पादन लगभग 7682 मीट्रिक टन होता है। यह फसल विशेषकर वनांचल क्षेत्रों में बैगा आदिवासी समुदाय के किसानों द्वारा प्राकृतिक रूप से रसायनिक खाद का उपयोग किए बिना किया जाता है।

वन मंत्री मोहम्मद अकबर ने भोरमदेव कोदो ब्रांड के पैकेजिंग का लॉच किया है। कबीरधाम जिले में उत्पादित आर्गेनिग कोदो गुणवत्तापूर्ण की प्रोसेंसिंग के साथ भोरमदेव कोदो ब्रांड के नाम से मार्केंट में लॉच किया गया है। भोरमदेव कोदो नाम की यह आर्गेंनिग चावल जल्द ही जिले तथा जिले से बाहर प्रदेश के प्रमुख शहरों रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर,राजनांदगांव सहित अन्य जिलों में संचालित बिग बाजार और अन्य मार्केंट में उपलब्ध होगा। वर्तमान में भोरमदेव कोदो जिला पंचायत के समीप संचालित स्वसहायता समूह की दुकान में सस्ते दर पर उपलब्ध है।

जिला प्रशासन द्वारा भोरमदेव कोदो ब्रांड को बेहतर प्लानिंग के साथ मार्केट में उतारने की कार्ययोजना तैयार की जा रही है। राज्य सरकार द्वारा वनांचल क्षेत्रों में रहने वाले बैगा आदिवासियों और ग्रामीणों की अर्थव्यवस्था मजूबत बनाने के लिए चार अलग-अलग वनांचल क्षेत्र बोडला के बैरख एवं तरेगांव जंगल और पंडरिया के पोलमी एवं कुकदूर में कोदो-कुटकी प्रसंस्करण मशीन लगाई जा रही है। तरेगांव जंगल, बैरख और पोलमी में कोदो कुटकी का प्रोसेसिंग मशीन शुरू हो गई है। इसका संचालन छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन की बिहान अंतर्गत महिला समूह द्वारा किया जा रहा है।  चौथा प्रसंस्करण केन्द्र कुकदूर में खोलने का काम भी चल रहा है। पहाड़ी क्षेत्रों में उत्पन्न होने वाले कोदो-कुटकी को महिला समूह द्वारा किसानों से खरीदा जायेगा तथा गुणवत्तापूर्ण चावल तैयार कर सभी खर्चों सहित 70 से 80 रूपए के दर पर बाजार में बेचा जाएगा। वर्तमान में तीनों कोदो प्रसंकरण के पास पर्याप्त मात्रा में कोदो चावल उपलब्ध है। लघु धान्य कोदो-कुटकी जैविक रूप से उगाए जाने के कारण स्थानीय स्तर के साथ ही राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर इसकी काफी मांग है। मधुमेह, कॉर्डियोवेस्कुलर, ऑस्टियोंपोरोशिस एवं ओबेसिटी जैसी बीमारियों से लड़ने की शक्ति कोदो-कुटकी आनाज में उपलब्ध है, इसलिए इसकी मांग दिनो-दिन बढ़ती जा रही है। कोदो-कुटकी में प्रोटीन, वसा, फाईबर, मिनरल, कैल्शियम, और आयरन प्रचुर मात्रा में पाए जाते है। 

Related Articles

One Comment

  1. 433566 542039This design is steller! You obviously know how to keep a reader amused. Between your wit and your videos, I was almost moved to start my own blog (effectively, almostHaHa!) Fantastic job. I truly enjoyed what you had to say, and more than that, how you presented it. Too cool! 4912

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Back to top button