हिंदुस्तान की क्रिकेट टीम ने लगातार दूसरी बार टी ट्वेंटी टूर्नामेंट का विश्वकप अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में जीत लिया। 2024 में रोहित शर्मा और 2026 में सूर्य कुमार यादव की कप्तानी में जीत हासिल हुई।जीत हो और जश्न न हो ये हो नहीं सकता। दर्शक तो देशभर में जश्न मनाते है। राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा यत्र तत्र और सर्वत्र फहरने लगता है। शहरों, नगरों और गांव के प्रमुख चौराहे पर नाच, गाना , धूम धडाका के साथ साथ चारों और आतिशबाजी देखते बनती है।
खिलाड़ियों के जीत के जश्न का अंदाज अलग ही होता है। याद करिए 2024 का टी ट्वेंटी टूर्नामेंट का फाइनल जब दक्षिण अफ्रीका की टीम हिंदुस्तान की टीम के बनाए हुए लक्ष्य 169 रन का पीछा कर रही थी। 17 ओवर के शुरू होने से पहले तक हिंदुस्तान के अधिकांश दर्शक मान चुके थे कि मैच हाथ से निकल रहा है क्लासेन 192 के स्ट्राइक रेट से रन बना रहे थे। 27 बॉल में 52 रन बना चुके थे।हार्दिक के ओवर में क्लासेन विकेट के पीछे पंत के हाथों कैच आउट हुए।हार्दिक द्वारा फेंकी गई बॉल पर मिलर का अदभुद कैच सूर्य कुमार यादव ने पकड़ा और यही से मैच में हिंदुस्तान की वापसी हुई। सात रन के बहुत ही संकीर्ण सात रन के अंतर से जीत हासिल हुई थी। 2007 के बाद सत्रह साल का इंतजार मायने रखता था।
ब्रिजटाउन के स्टेडियम में भावनाओं का समुद्र उमड़ा था। खिलडियों के आंखों से आंसू बहे थे।रोहित और विराट को सीढ़ियों पर गले लग कर रोते देखा था, हमने।हार्दिक के आंसू रुक ही नहीं रहे थे। विजयी टीम का मुंबई एयरपोर्ट में पानी के फुहार से विमान का रनवे में स्वागत हुआ था। मुंबई तो मानो पलक पांवड़े बिछा कर रखी थी। लाखों की भीड़ में विजय जुलूस का नजारा 1983,2007 और 201 की याद दिला रहा था। ऐसा जन सैलाब देखने को नहीं मिला था।
इस बार की जीत में भले ही जीत मिली लेकिन न्यूज़ीलैंड की टीम चौदहवें ओवर में ही हार चुकी थी। अकेले कप्तान सेंटनर कितना दम लगाते?255 रन का पीछा न्यूजीलैंड की टीम कर ही नहीं पाई। मेरे हिसाब से हिंदुस्तान ने इंग्लैंड के खिलाफ सेमी फाइनल में ही असली फाइनल खेल लिया था।
न्यूज़ीलैंड की टीम पूरे बीस ओवर भी नहीं खेल पाई। भारत 95 रन से मैच जीता। इस बार कोई भी खिलाड़ी रोते नहीं दिखा। संजू सैम्सन भावुक दिखे तो उनकी भावुकता निजी थी। असफलता के भंवर से निकल कर मेन ऑफ द टूर्नामेंट बने।2024 और 2026 के हार्दिक पांड्या में फर्क दिखा। 2024 में हार्दिक चोट और पारिवारिक समस्या से जूझ रहे थे।इस बार वे मन और मस्तिष्क से खुश दिखे। उनकी नई जीवन संगिनी साथ दिखी। अपने बेहतर प्रदर्शन का श्रेय भी हार्दिक ने नीली ड्रेस वाली को दिया। इस बार की जीत में खिलडियों का परिवार बेक स्ट्रेंथ के रूप में दिखा।ये अच्छी परंपरा है।
जीत का श्रेय किसे मिले इस पर अलग अलग राय है लेकिन गौतम गंभीर किए बात मायने रखती है कि उन्होंने वर्तमान टीम के जीत के लिए अतीत के दो दिग्गजों राहुल द्राविड़ और वी वी एस लक्ष्मण को दिया। सही मायने में इन दोनों ने अंडर 19 की टीम को टारगेट कर भविष्य को पुख्ता किया है।
स्तंभकार-संजय दुबे






