
रायपुर, शराब घोटाला मामले से जुड़े कथित मैनपावर भुगतान केस में EOW/ACB ने कोर्ट में 500 पेज का पूरक चालान पेश किया है. ये चालान छत्तीसगढ स्टेट मार्केटिंग कार्पोरेशन लिमिटेड CSMCL के तत्कालीन एमडी अरुणपति त्रिपाठी और मैनपावर एजेंसी के संचालक बीआर लोहिया के खिलाफ है. जांच में बताया गया है कि सरकारी शराब दुकानों के कर्मचारियों के नाम पर पांच मैनपावर एजेंसियों को नियम विरुद्ध जाकर 182.98 करोड़ रुपये का अतिरिक्त (फर्जी) भुगतान किया गया. इस रकम का एक हिस्सा अधिकारियों और सिंडिकेट को कमीशन के रूप में दिया जाता था. इस मामले में मुख्य आरोपी अरुणपति त्रिपाठी फिलहाल रायपुर की सेंट्रल जेल में बंद हैं, जबकि बीआर लोहिया अभी भी फरार चल रहे हैं.
करोड़ों का फर्जीवाड़ा
जांच एजेंसियों के मुताबिक, प्लेसमेंट एजेंसियों के जरिए शराब दुकानों में काम करने वाले कर्मचारियों को मिलने वाला ओवरटाइम, बोनस और चार अतिरिक्त दिनों का पैसा उन्हें नहीं दिया गया. इसके बजाय फर्जी रिकॉर्ड तैयार कर एजेंसियों को करोड़ों रुपये का अवैध भुगतान कर दिया गया. अकेले अरुणपति त्रिपाठी के कार्यकाल में सेवा शुल्क और अन्य मदों के नाम पर एजेंसियों को 152.40 करोड़ रुपये का एक्स्ट्रा पेमेंट किया गया. इसमें से ‘ईगल हंटर’ और ‘अलर्ट कमांडोज’ नाम की दो बड़ी एजेंसियों को 48 करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम बांटी गई.
कैश कमीशन और हवाला नेटवर्क का खुलासा
जांच एजेंसियों के मुताबिक बीआर लोहिया के कहने पर फर्जी बिल तैयार किए जाते थे और इसके बदले अधिकारियों को कैश कमीशन दिया जाता था. अरुणपति त्रिपाठी ने इन मैनपावर एजेंसियों से 28 से 32 करोड़ रुपये का नकद कमीशन वसूला और इसे अनवर ढेबर तक पहुंचाया. इस अवैध कमाई में से त्रिपाठी के हिस्से के 3 करोड़ रुपये और पेंडिंग बिल पास कराने के एवज में ली गई 28.80 लाख रुपये की रकम को प्रवर्तन निदेशालय (ED) पहले ही जब्त कर चुका है. चालान में यह पुख्ता सबूत भी शामिल किए गए हैं कि किस तरह इस काली कमाई को अंगड़िया (हवाला) नेटवर्क के जरिए मुंबई और हैदराबाद भेजा जाता था.

12 आरोपियों के खिलाफ प्रथम चालान पेश हो चुका है
EOW/ACB रायपुर छत्तीसगढ़ के द्वारा अपराध क्रमांक 44/2024 की जांच में प्राप्त साक्ष्यों के आधार पर 14 अक्टूबर 2026 को अरुणपति त्रिपाठी और बीआर लोहिया के खिलाफ पूरक चालान पेश किया गया है. मामले में शासकीय शराब दुकानों के कर्मचारियों के नाम पर मैनपावर एजेंसियों को अतिरिक्त भुगतान कराने और कर्मचारियों को राशि दिए बिना उसका हिस्सा कमीशन के रूप में लेने के साक्ष्य प्राप्त हुए हैं. प्रवर्तन निदेशालय से प्राप्त प्रतिवेदन के सत्यापन के बाद 5 अक्टूबर 2024 को मामला दर्ज किया गया था. उक्त मामले में नवीन प्रताप सिंह तोमर, अनवर ढेबर, मैनपावर एजेंसियों के संचालकों और अन्य संबंधित व्यक्तियों सहित 12 आरोपियों के खिलाफ 18 मई 2026 को प्रथम चालान प्रस्तुत किया जा चुका है. आगे की जांच में में अरुणपति त्रिपाठी और बीआर लोहिया की संलिप्तता के साक्ष्य मिलने पर उनके खिलाफ यह पूरक चालान पेश किया गया है.
182.98 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भुगतान
वर्ष 2019 से 2023 के भुगतान अभिलेखों की जाँच में सुमीत फैसिलिटीज लिमिटेड, प्राइमवन वर्कफोर्स प्राइवेट लिमिटेड, ए-टू-जेड इन्फ्रासर्विसेस लिमिटेड, अलर्ट कमांडोज प्राइवेट लिमिटेड और ईगल हंटर सॉल्यूशन लिमिटेड को ओवरटाइम, बोनस, चार अतिरिक्त दिनों के कार्य और इन मदों पर सेवा शुल्क के रूप में कुल 1,82,98,48,675 रुपये का अतिरिक्त भुगतान होना पाया गया.







