शिक्षा-अनुसंधान

दीक्षांत का मतलब विद्यार्थी ज्ञान से अपने जीवन के उद्देश्यों को प्राप्त करें

छत्तीसगढ़ के नवनिर्माण में विद्यार्थीगण अपनी भागीदारी निभाएं : बघेल
छत्तीसगढ़ ने साहित्य, रंगमंच व लोककला के क्षेत्र में देश को दी अनेक विभूतियां :वाजपेयी
देश एवं समाज के विकास में उच्च शिक्षा का महत्वपूर्ण स्थान: पटेल
पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय का 25वां दीक्षांत समारोह 

रायपुर, राज्यपाल सुश्री अनुसुईया उइके ने कहा कि सही अर्थ में दीक्षांत वह है जब विद्यार्थी अब तक प्राप्त ज्ञान के आधार पर अपने जीवन के उद्देश्यों को प्राप्त करें और अपने अर्जित ज्ञान को मूर्त रूप देते हुए जीवन के संघर्षमय मार्ग में अग्रसर हो सके। जिन विद्यार्थियों ने उपाधि प्राप्त कर प्रतिज्ञा ली है वे संस्कारों को अपनाते हुए राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान दें। यह बात राज्यपाल सुश्री उइके ने आज पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के 25वें दीक्षांत-समारोह को संबोधित करते हुए कही। उन्होंने सभी उपाधि और स्वर्ण पदक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को हार्दिक शुभकामनाएँ दी। इस अवसर पर राज्यपाल, मुख्यमंत्री सहित अन्य अतिथियों ने शोधार्थियों को उपाधि और प्रावीण्य सूची में स्थान प्राप्त विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक देकर सम्मानित किया। 
राज्यपाल ने कहा कि प्रदेश की उच्च-शिक्षण संस्थानों और विश्वविद्यालयों का यह महत्वपूर्ण दायित्व है कि वे वर्तमान युवा पीढ़ी एवं भावी पीढ़ी के लिए उच्च स्तरीय शैक्षणिक माहौल तैयार करें ताकि उनके और मानव-जाति के विकास की राह प्रशस्त हो सके। साथ ही ऐसी शैक्षणिक प्रणाली विकसित करनी चाहिए जो इन युवाओं को अपने देश की संस्कृति, अनुशासन, संयम और अध्यात्म से प्रत्यक्ष जोड़ सके। उन्होंने कहा कि युवा-वर्ग से मेरी अपेक्षा है कि वह न सिर्फ आत्मनिर्भर बनते हुए पारिवारिक व सामाजिक दायित्वों को सहर्ष पालन करें बल्कि अपने नैतिक मूल्यों को भी अच्छी तरह समझें। ये मूल्य ही आगे राष्ट्र-मूल्य बनकर हमें देश और समाज के प्रति अपने कर्तव्यों का पालन कराना सिखाते हैं। सुश्री उइके ने कहा कि देश और समाज के सम्पूर्ण विकास के लिए वैज्ञानिक उन्नति तो आवश्यक है ही परंतु हमें अपनी जमीन को नहीं छोड़ना है, जहाँ से हम आगे बढ़े हैं। हमें इन मूल्यों का सदैव ध्यान में रखना चाहिए। 
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने उपाधि और पदक प्राप्त करने वाले शोधार्थी-विद्यार्थियों को शुभकामनाएं दी और कहा कि जो विद्यार्थी शोध करने के इच्छुक हैं, वे ऐसे विषयों का चयन करें, जिनका वर्तमान परिवेश में अधिक आवश्यकता है। विश्वविद्यालय से उपाधि पाने वाले युवा अपने रोजगार तथा कैरियर के साथ सामाजिक जिम्मेदारियों के निर्वाह में भी अपनी भूमिका निभाएं।

मुख्य वक्ता वरिष्ठ साहित्यकार श्री अशोक वाजपेयी ने कहा कि सपने वही बड़े होते हैं, जो दूसरों के लिए देखे जाते हैं और प्रार्थना भी वही बड़ी होती है जो दूसरों के लिए की जाती है। उन्होंने कहा कि दुनिया को बदलने की क्षमता युवाओं में है, अतः युवाओं को सपने अवश्य देखना चाहिए। श्री वाजपेयी ने वरिष्ठ साहित्यकार गजानंद माधव मुक्तिबोध को याद करते हुए कहा कि सफलता की शुरूआत ही विफलता से होती है, इसलिए विफलता में भी सार्थकता है।
उच्च शिक्षा मंत्री उमेश पटेल ने कहा कि देश एवं समाज के विकास में उच्च शिक्षा का महत्वपूर्ण स्थान है। गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा के माध्यम से सामाजिक, राजनैतिक एवं आर्थिक परिवर्तन संभव है। इस अवसर पर महापौर एजाज ढेबर, कुलपति केशरीलाल वर्मा डा अशोक प्र्धान सहित विद्यार्थी और उनके परिजन तथा गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

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2 Comments

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