
0 एफआईआर में पहले भी विवाद की घटनाओं का उल्लेख
महासमुंद, छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के बागबाहरा वनपरिक्षेत्र अंतर्गत तमोरा जंगल में वन विभाग की टीम और अतिक्रमणकारियों के बीच गंभीर विवाद और हिंसक घटनाएं पहले भी होती रही है। वन विभाग के लिए तमोरा जंगल संवेदनशील इलाका रहा है। इसके बावजूद वन विभाग की टीम पूरी गंभीरता नाहीं बरती और कार्यवाही करने चली गई। जबकि साथ प्रशासन और पुलिस को भी साथ लेना था।
बता दें एफआईआर में तमोरा क्षेत्र में वन विभाग और कथित अतिक्रमणकारियों के बीच पूर्व में हुए विवादों का भी उल्लेख किया गया है। वन अधिकारी के अनुसार, 13 मई 2026 को कक्ष क्रमांक 95-96 में वृक्षारोपण के लिए क्षेत्र तैयार करने के दौरान भी अतिक्रमणकारियों द्वारा वन अमले के साथ कथित अभद्रता, गाली-गलौज और मारपीट की धमकी दी गई थी। इस संबंध में खल्लारी थाने में अपराध क्रमांक 55/2026, दिनांक 14 मई 2026 को रिपोर्ट दर्ज कराए जाने का उल्लेख शिकायत में है।
इसी तरह 27 मई 2025 को अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान पुलिस और वन अमले के साथ गाली-गलौज एवं झूमाझटकी की घटना का भी शिकायत में उल्लेख है। वहीं 26 दिसंबर 2025 को जिला प्रशासन, वन विभाग, पुलिस और ग्रामीणों की मौजूदगी में कथित अतिक्रमणकारियों को आरक्षित वन क्षेत्र से कब्जा हटाने की समझाइश दिए जाने की बात भी एफआईआर में कही गई है।
52 लोगों के खिलाफ पहले वन अपराध दर्ज होने का दावा
शिकायत में यह भी बताया गया है कि 25 मार्च 2026 को कथित तौर पर जंगल की कटाई-सफाई कर खेत बनाने, ठूंठ जलाने तथा वन सीमा चिन्ह और फेंसिंग पोल तोड़ने के मामले में वन अपराध दर्ज किया गया था। इसके बाद 20 अप्रैल 2026 को 52 लोगों को सीजेएम महासमुंद न्यायालय के समक्ष पेश किए जाने का उल्लेख शिकायत में किया गया है। वन विभाग की ओर से आरोप लगाया गया है कि इसके बाद भी वृक्षारोपण कार्य को नुकसान पहुंचाने की घटनाएं जारी रहीं।







