
इस बार के एशियाड खेलो के दो स्पर्धा क्रिकेट और हॉकी में महिलाओं की टीम ने पुरुषों की टीम पर ज्यादा दबाव बना दिया था।इसका कारण था कि हरमनप्रीत कौर और सलीमा टेटे के नेतृत्व में क्रिकेट और हॉकी का गोल्ड मेडल पुरुषों से पहले जीत लिया था। महिलाओं की हॉकी टीम का महत्व इसलिए भी अधिक था कि बीते चौवालीस साल में एशियाई हॉकी का गोल्ड मेडल हाथ ही नहीं लगा था। सलीमा टेटे के नेतृत्व में महिला हॉकी टीम ने बेल्जियम में खेले गए विश्व कप स्पर्धा में बराबरी का खेल दिखा कर पांचवें स्थान पर रही थी। इस बार एशियाई खेल में महिला हॉकी टीम ने शुरुवाती दौर में प्रतिद्वंद्वी टीम के खिलाफ गोल की झड़ी लगा दी।असली मुकाबला सेमी फाइनल और फाइनल में था। दोनों ही मैच में महिला हॉकी टीम ने सबसे बढ़िया तरीके से टीम कॉम्बिनेशन के साथ खेला।डिफेंस और अफेंस में कहीभी कमजोर नहीं रहे। फाइनल में चीन जो ओलंपिक खेलो की सिल्वर मेडलिस्ट थी उसके खिलाफ अगर जीत मिली तो पहला श्रेय लालरेमसियामी को जाता है जिन्होंने रिवर्स स्टिक से जो गोल मारा वह सालों तक याद किया जाएगा। गोली की रफ्तार से ऊंचाई लिए इस गोल में बॉल गोल पोस्ट के भीतर चारों ओर घूम गई थी।दूसरा श्रेय गोलकीपर सविता पूनिया को जाता है जिन्होंने पेनल्टी स्ट्रोक रोक कर जीत का मार्ग प्रशस्त किया। अगर चीन के खिलाड़ी इस स्ट्रोक में सफल हो जाते तो निश्चित रूप से उनका हौसला बढ़ता और परिणाम बदल भी सकता था।
सलीमा टेटे, के हिस्से में जीत आई है उनके पहले 1982 के दिल्ली एशियाई खेल में एलिसा नेल्सन कप्तान रही थी।1980 और 2020 में भारतीय महिला हॉकी टीम का प्रदर्शन अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन रहा जब समूचे विश्व में चौथे स्थान पर रही थी।
एशियाई खेल में जीत के साथ ही 2028 के लॉस एंजिल्स में होने वाले ओलंपिक खेलो के लिए हिंदुस्तान की महिला हॉकी टीम सीधे प्रवेश कर ली है। दो साल का समय बेहतर से बेहतरीन बनने के लिए पर्याप्त है। टीम के कोच स्जोर्ड मारिन चाहे तो जूनियर महिला खिलाड़ियों पर दांव लगा सकते है।
महिला हॉकी टीम की जीत पर केंद्र सहित हर राज्य की जिम्मेदारी बनती है कि इन खिलाड़ियों का हौसला बढ़ाने के लिए नगद राशि देने में कौताही नहीं बरतना चाहिए। इन खिलाड़ियों का सार्वजनिक सम्मान हर राज्य में होना चाहिए। जिस प्रकार उड़ीसा के पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने अपने राज्य को हॉकी का संरक्षण कर्ता बनकर हॉकी को जिंदा कर दिया वैसे ही हर राज्य के मुख्यमंत्री का दिल बड़ा करना चाहिए।
स्तंभकार -संजय दुबे







