
बिलासपुर ,छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने बिलाईगढ़ नगर पंचायत के अध्यक्ष दामोदर प्रसाद दुबे को पद से हटाने और आगामी कार्यकाल के लिए अयोग्य घोषित करने के राज्य शासन के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी है। न्यायमूर्ति अमितेंद्र किशोर प्रसाद की एकलपीठ ने राज्य शासन के 4 जुलाई 2026 के आदेश को बरकरार रखा। अदालत ने स्पष्ट किया कि छत्तीसगढ़ नगर पालिका अधिनियम की धारा 41-ए के तहत की गई कार्रवाई को केवल इस आधार पर अवैध नहीं माना जा सकता कि आरोपों से जुड़ी कुछ घटनाएं अध्यक्ष चुने जाने से पहले की हैं।
57 आवासीय प्लॉट काटने का आरोप
मामले के अनुसार, जांच में करीब 2.45 हेक्टेयर कृषि भूमि को बिना वैध कॉलोनाइजर लाइसेंस और भूमि उपयोग परिवर्तन के 57 आवासीय भूखंडों में बांटने का मामला सामने आया था। शासन की ओर से अदालत में बताया गया कि इस मामले में नगर पंचायत के हितों और जनहित को ध्यान में रखते हुए कार्रवाई की गई।शासन ने यह भी दलील दी कि अध्यक्ष बनने के बाद दामोदर प्रसाद दुबे ने संबंधित कार्रवाई के लिए नगर पंचायत के मुख्य नगरपालिका अधिकारी (सीएमओ) के प्रस्ताव पर अध्यक्ष के रूप में हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया था।
अध्यक्ष ने कार्रवाई को दी थी चुनौती
राज्य शासन ने 4 जुलाई 2026 को आदेश जारी कर दुबे को अध्यक्ष पद से हटा दिया था और आगामी कार्यकाल के लिए अयोग्य घोषित किया था। इसके खिलाफ हाई कोर्ट में दायर याचिका में उन्होंने कहा कि संबंधित जमीनों की खरीद-बिक्री वर्ष 2013 से 2024 के बीच हुई थी, जबकि वह फरवरी 2025 में नगर पंचायत अध्यक्ष निर्वाचित हुए थे। याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि अध्यक्ष चुने जाने से पहले की घटनाओं के आधार पर उनके खिलाफ यह कार्रवाई करना उचित नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव से संबंधित विवादों के निपटारे के लिए नगर पालिका अधिनियम की धारा 20 के तहत चुनाव याचिका दायर करने का प्रावधान है।इसके अलावा, याचिकाकर्ता ने जांच रिपोर्ट और शिकायत की प्रतियां उपलब्ध नहीं कराने का आरोप लगाते हुए प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के उल्लंघन की दलील दी।
धारा 20 और 41-ए के उद्देश्य अलग-अलग
मामले की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने चुनाव को अमान्य घोषित करने और निर्वाचित पदाधिकारी को पद से हटाने की कार्रवाई के बीच अंतर पर विचार किया। अदालत के समक्ष शासन की ओर से कहा गया कि धारा 41-ए के तहत की गई कार्रवाई का उद्देश्य नगर पंचायत के हितों और जनहित की रक्षा करना है।अदालत ने इस तथ्य पर भी गौर किया कि याचिकाकर्ता को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था, जवाब प्रस्तुत करने का अवसर मिला था और व्यक्तिगत सुनवाई भी की गई थी।इन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए हाई कोर्ट ने राज्य शासन की कार्रवाई में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया और दामोदर प्रसाद दुबे की याचिका खारिज कर दी। इसके साथ ही उन्हें पद से हटाने और आगामी कार्यकाल के लिए अयोग्य घोषित करने का आदेश बरकरार रहा।
3.27 करोड़ रुपये के जुर्माने पर अपील की छूट
हालांकि, हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ता को राहत का एक सीमित रास्ता खुला रखा है। मुख्य नगरपालिका अधिकारी द्वारा 24 अप्रैल 2026 को लगाए गए 3 करोड़ 27 लाख 4 हजार 740 रुपये के जुर्माने को चुनौती देने के लिए उन्हें कलेक्टर के समक्ष वैधानिक अपील दायर करने की स्वतंत्रता दी गई है।







