स्वास्थ्य

अंगदान के माध्यम से गंभीर रोगियों को मिल सकती हैं नई जिंदगी

एम्स में अंगदान पर वॉकाथॉन और सीएनई का आयोजन

रायपुर, गंभीर रूप से बीमार रोगियों को अंगदान के माध्यम से नई जिंदगी देने के उद्देश्य से अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान के तत्वावधान में गुरूवार को वॉकाथॉन और नर्सिंग कॉलेज में सीएनई का आयोजन हुआ। इस अवसर पर समाज के सभी वर्गों का आह्वान किया गया कि वे स्वयं के अंगदान और शरीरदान का संकल्प पत्र भरकर जरूरतमंद रोगियों को नया जीवन प्रदान करने में अहम योगदान दें।

सीएनई की मुख्य अतिथि और तेलंगाना राज्य में अंगदान की मुहिम ‘जीवनदान’ से जुड़ी निजाम इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज की एडिशनल प्रोफेसर डॉ. स्वर्णलता ने अंगदान से जुड़े विभिन्न कानूनों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उनका कहना था कि भारत में रोगियों की बड़ी संख्या, अनियंत्रित ट्रेफिक और इसकी वजह से होने वाली दुर्घटनाओं में कई पीड़ित अपने अंगों को खो देते हैं। इनमें एक बड़ा प्रतिशत उन रोगियों का है जो दूसरे के अंगदान से एक नई शुरूआत कर सकते हैं। उन्होंने समाज में जागरूकता बढ़ाकर ब्रेन डेड रोगियों का अंगदान करने और प्राकृतिक रूप से मृत लोगों के कॉर्निया और अन्य कार्यशील अंगों का दान करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि इससे मृतक के परिजनों को भी संतुष्टि मिलेगी और अंग प्राप्त करने वाले परिवार को भी नई खुशियां दी जा सकेंगी।

नेत्र विभाग की डॉ. नीता मिश्रा ने नेत्रदान की महत्वता और इससे संबंधित तकनीकी जानकारी प्रदान की। डॉ. प्रीतम साहनी ने हार्ट ट्रांसप्लांट और नेफ्रोलॉजी के डॉ. विनय राठौर ने किडनी ट्रांसप्लांट के बारे में विस्तार से बताया। कार्यक्रम में अस्सिटेंट नर्सिंग ऑफिसर सुमेध लेमले, विशोक एन, एमडी घोज, कनगराज और ईवाफेलारिसा ने भी अंगदान से जुड़ी कई महत्वपूर्ण तकनीकी जानकारियां प्रदान की। कार्यक्रम में चिकित्सा अधीक्षक डॉ. करन पीपरे, उप-निदेशक (प्रशासन) नीरेश शर्मा और प्रो. आलोक अग्रवाल ने भी भाग लिया।

इससे पूर्व सभी चिकित्सकों और नर्सिंग कालेज के सदस्यों की ओर से वॉकाथॉन का आयोजन करके कैंपस में अंगदान को लेकर जागरूकता बढ़ाई गई। इसमें नर्सिंग कालेज की छात्राओं ने विभिन्न वर्गों से संपर्क कर उन्हें अंगदान करने के लिए प्रोत्साहित किया।

 तमिलनाडु के मदुरैई में बन रहे एम्स में ली जाएगी रायपुर एम्स के अनुभवों की मदद

·        दो दिवसीय एम्स दौरे के बाद जापान की टीम हुई रवाना, कई विभागों को परखा

तमिलनाडु के मदुरैई में बनाए जा रहे नए अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान को बनाने में एम्स रायपुर के अनुभवों का प्रयोग किया जाएगा। एम्स की स्थापना, इसकी कार्यशैली और विभिन्न विभागों को दो दिनों तक परखने के बाद जापान इंटरनेशनल को-ऑपरेशन एजेंसी (जीका) की टीम गुरूवार को लौट गई।

तमिलनाडु के निवासियों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से केंद्रीय परिवार एवं स्वास्थ्य कल्याण मंत्रालय की ओर से वहां नया एम्स स्थापित करने की प्रक्रिया चल रही है। इसका वित्तपोषण जीका भी कर रहा है। इससे पूर्व देश में छह एम्स स्थापित करने में जीका की भूमिका रही है। मदुरैई में स्थापित हो रहे नए एम्स के लिए विशेषज्ञता प्रदान करने के उद्देश्य से जीका की टीम रायपुर और जोधपुर में स्थापित एम्स के अनुभवों से सीख रही है। इस बारे में विस्तार से चर्चा के लिए जीका की 11 सदस्यीय टीम बुधवार को एम्स पहुंची और दो दिनों तक कैंपस का सघन दौरा कर यहां उपलब्ध सुविधाओं और कार्यशैली के बारे में जानकारियां ली।

एम्स रायपुर के निदेशक (प्रो.) नितिन एम. नागरकर ने टीम के साथ बैठक कर सदस्यों को एम्स की स्थापना से लेकर अब तक हुए विकास के बारे में विस्तार से जानकारी प्रदान की। उन्होंने विभिन्न विभागों में उपलब्ध सुविधाओं और एम्स में चल रहे अनुसंधान के बारे में भी जापान की टीम को बताया। इसके बाद टीम ने एम्स मेडिकल कालेज और अस्पताल के विभिन्न विभागों का दौरा कर यहां उपलब्ध सुविधाओं के बारे में जाना।

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