स्वास्थ्य

एम्स में गरीब मरीजों के जीवन की निधि बनी ‘अर्पण’

·       कंपनियों, एम्स के चिकित्सकों और कर्मचारियों एवं समाजसेवियों ने दी अब तक तीन करोड़ की रकम

·       बिहार के शेख करीमुल्ला सहित कई मरीजों को मिला लाभ

·       गरीबों को एक लाख रूपये तक की सहायता देता है एम्स

रायपुर बिहार स्थित सिवान के शेख करीमुल्ला 65 वर्ष के हैं। उन्हें यूरिनरी ब्लाडर में कैंसर था। इलाज के लिए अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान आए परंतु स्वयं के इलाज के लिए पैसा नहीं था। यह किसी सरकारी स्वास्थ्य योजना के लाभार्थी भी नहीं थे ऐसे में स्वस्थ्य जीवन का सपना अधूरा लगने लगा था। ऐसी परिस्थिति में एम्स प्रबंधन आगे आया और स्वयं की ‘अर्पण’ निधि से करीमुल्ला के इलाज के लिए तीस हजार रुपये उपलब्ध कराए गए। करीमुल्ला अब स्वस्थ जीवन की तरफ बढ़ रहे हैं मगर इसके लिए वे एम्स के बहुत आभारी हैं।

यह सिर्फ शेख करीमुल्ला की कहानी नहीं है। एम्स में इलाज के लिए प्रतिदिन आने वाले तीन हजार रोगियों में कई ऐसे भी होते हैं जो स्वयं के इलाज का खर्च तक नहीं उठा सकते। करीमुल्ला को डॉ. दीपक कुमार बिस्वाल और डॉ. अमित ने चिकित्सकीय समाज सेवा अधिकारी सौरभ धस्माना की मदद से  एम्स द्वारा आर्थिक सहायता प्रदान की गई।

एम्स के सामने प्रतिदिन ऐसा यक्ष प्रश्न रहता है कि ऐसे मरीजों का क्या किया जाए। सीमित संसाधनों की वजह से सभी मरीजों को मुफ्त में इंप्लांट और दवाइयां नहीं दी जा सकती। वहीं गंभीर रूप से बीमार मरीजों को एम्स से ठीक किए बिना भी नहीं भेजा सकता है मगर बिना संसाधनों के इनका इलाज कैसे किया जाए।

ऐसे मरीजों की सहायता करने के लिए जो किसी सरकारी योजना के दायरे में नहीं आते हैं और बेहद गरीब हैं, एम्स में ‘अर्पण’ निधि बनाई गई है। यह गैर सरकारी निधि है जिसके लिए पृथक बैंक एकाउंट खोला गया है जिसमें पीएसयू कंपनियां अपने सीएसआर फंड से दान दे सकती हैं। इसके अलावा एम्स के चिकित्सक और कर्मचारी भी अपने वेतन का एक हिस्सा इसमें दान देने के लिए आगे आए हैं। समाजसेवी भी इसमें पीछे नहीं है। सभी के सहयोग से अब तक इसमें तीन करोड़ रुपये जमा हो चुके हैं।

इस निधि की मदद से मरीजों को एक लाख रूपये तक की सहायता प्रदान की जा रही है। इस योजना का फायदा अब तक कई मरीज उठा चुके हैं। चिकित्सक और चिकित्सा समाज सेवा अधिकारी मिलकर ऐसे रोगियों की पहचान करते हैं जिन्हें इस निधि की अत्याधिक आवश्यकता है। उनकी अनुशंसा पर चिकित्सा अधीक्षक 40 हजार रूपये तक की सहायता दे सकते हैं। यदि मरीज की स्थिति गंभीर है तो एम्स प्रबंधन की अनुशंसा पर उसे अधिकतम एक लाख रूपये की सहायता एक वर्ष में दी जा सकती है।

निदेशक प्रो. (डॉ.) नितिन एम. नागरकर ने कहा है कि यह निधि कई मरीजों के जीवन को बचाने के लिए लाइफ लाइन का कार्य कर रही है। एम्स का प्रयास है कि उम्मीदों के साथ देशभर से आने वाले मरीजों को स्वस्थ करके भेजा जाए। इसके लिए संसाधनों की कोई कमी नहीं आने दी जाएगी।

उप-निदेशक नीरेश शर्मा का कहना है कि कई पीएसयू और बैंकों ने अपने सीएसआर फंड से ‘अर्पण’ के लिए योगदान दिया है। अभी भी कई कंपनियां इसमें रूचि प्रदर्शित कर रही हैं। उन्होंने सभी समाजसेवियों का आह्वान किया है कि वे इस निधि में स्वयं का योगदान दे गरीबों की जिंदगी बचा सकते हैं।

चिकित्सा अधीक्षक डॉ. करन पीपरे ने कहा है कि समाज के सक्षम वर्ग को ऐसे मरीजों की सहायता के लिए आगे आना चाहिए। एम्स अपनी चिकित्सा सेवा प्रदान करेगा जबकि इस निधि की मदद से उन्हें इलाज में मदद मिलेगी।

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