स्वास्थ्य

कोरोना के लिए अब एम्स में पृथक व्यवस्था

 आयुष भवन-चिकित्सालय खंड 2 में तीन दिन के अंदर सारी व्यवस्थाएं  सैंपल लेने से लेकर 12 बिस्तर का स्थायी आइसोलेशन वार्ड होगा तैयार  सारी जांच और बिलिंग भी इसी स्थान पर करवा सकेंगे रोगी

रायपुर, अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में कोरोना वायरस के रोगियों के लिए पृथक व्यवस्था की जा रही है। तीन दिन के अंदर आयुष भवन में 12 बैड का पृथक स्थायी आइसोलेशन वार्ड बनाया जा रहा है। इसके अतिरिक्त प्राथमिक स्तर पर इलाज के छह बैड रहेंगे। यहीं पर मरीजों के लिए जांच से लेकर बिलिंग तक सारी व्यवस्थाएं होंगी।

निदेशक प्रो. (डॉ.) नितिन एम. नागरकर ने सोमवार को सेंट्रल डोम से लेकर अस्थायी आइसोलेशन वार्ड तक का दौरा किया। इस मौके पर उन्होंने सभी गेट से आने वाले कोरोना वायरस के संदिग्ध मरीजों को आयुष भवन तक भेजने के लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं करने को कहा। यहां एक हैल्प डेस्क बनाई जाएगी जिस पर 24 घंटे कर्मचारी तैनात रहेंगे। यहां पर कोरोना वायरस के लक्षण वाले मरीजों को दूसरे तल पर चिकित्सकीय परीक्षण के लिए भेजा जाएगा।

चिकित्सकों द्वारा कोरोना वायरस के लक्षण पाए जाने पर रोगी को आइसोलेशन वार्ड में भर्ती कर लिया जाएगा। चिकित्सा अधीक्षक प्रो. करन पीपरे ने बताया कि यहां पर 12 बैड उपलब्ध रहेंगे जो कोरोना वायरस के मरीजों के लिए होंगे। उप-निदेशक (प्रशासन) नीरेश शर्मा ने बताया कि यहीं पर मरीजों की सारी जांच और बिलिंग कर दी जाएगी जिससे मरीजों और उनके परिजनों को कहीं ओर जाने की आवश्यकता नहीं पड़े।

सृष्टि इक्का के अभिभावकों ने त्वरित प्रयासों के लिए कहा धन्यवाद

जगदलपुर से आई 19 वर्षीय सृष्टि इक्का के न्यायाधीश परिजनों को लग रहा था कि उन्हें कोरोना वायरस हो गया है। एम्स के आइसोलेशन वार्ड में 15 और 16 मार्च की मध्यरात्रि को भर्ती करने के बाद उनकी जांच की गई और सैंपल लिया गया जो नेगेटिव था। सृष्टि के परिजनों ने सैंपल लेने से लेकर भर्ती करने तक में चिकित्सकों और कर्मचारियों द्वारा किए गए सहयोग के लिए एम्स प्रबंधन की सराहना की और प्रो. नागरकर को व्यक्तिगत रूप से धन्यवाद दिया। प्रो. अजॉय कुमार बेहरा के अनुसार सृष्टि पूरी तरह से स्वस्थ है। उसे ब्लड प्रेशर है। कोरोना वायरस के कोई लक्षण नहीं मिले हैं। उसे डिस्चार्ज किया जा रहा है। परिजनों के अनुरोध पर उसे 16 मार्च की रात्रि में भी चिकित्सकों की निगरानी में रखने के लिए कहा गया है।

लैब में जांच के लिए सैंपल भेजें, मरीजों को नहीं

प्रो. नागरकर ने छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारियों से वार्ता कर उनसे अनुरोध किया कि प्रदेश के विभिन्न अस्पतालों से जांच के लिए सैंपल एम्स भेजे जा सकते हैं मगर कोरोना वायरस के सभी संदिग्ध मरीजों को सिर्फ एम्स भेजना ठीक नहीं है। उन्होंने सृष्टि इक्का के मामले को रखते हुए कहा कि उनको निकटतम अस्पताल में भर्ती करके सैंपल जांच के लिए एम्स भेजा जा सकता था मगर संबंधित चिकित्सकों ने अपने यहां कोरोना वायरस की चिकित्सा उपलब्ध न होने का कारण बताते हुए उन्हें एम्स भेज दिया। जिससे उनके परिजनों को परेशानी का सामना करना पड़ा। वरिष्ठ अधिकारियों ने इस संबंध में सभी चिकित्सालयों को निर्देशित करने का आश्वासन दिया है।

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