स्वास्थ्य

तीली, पैन, पैंसिल से कान खुजलाने से सुनने की क्षमता पर पड़ सकता है प्रभाव

  एम्स के चिकित्सकों ने स्कूली बच्चों के कानों का किया परीक्षण     छात्रों और अभिभावकों को बनाया जागरूक, छह मार्च तक होंगे कार्यक्रम

रायपुर, विश्व श्रवण दिवस पर अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान के ईएनटी विभाग का एक दल मंगलवार को कोटा स्थित नवीन शासकीय प्राथमिक शाला पहुंचा। यहां चिकित्सकों ने छात्रों के कानों की जांच की और उन्हें विश्व श्रवण दिवस पर स्वयं के कान को स्वस्थ रखने के बारे में जागरूक बनाया। इस अवसर पर छात्रों और अभिभावकों का आह्वान किया गया कि वे कानों में कोई भी असुरक्षित चीज का प्रयोग न करें नहीं तो यह जीवनभर के लिए सुनने की क्षमता को प्रभावित कर सकता है।

एम्स रायपुर के निदेशक और ईएनटी के विभागाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) नितिन एम. नागरकर के निर्देशन में पहुंची चिकित्सकों की टीम ने लगभग 45 बच्चों के कानों का चेकअप कर उनके सुनने की क्षमता को परखा। क्लास में पीछे बैठने वाले छात्रों से भी सुनने की समस्या के बारे में जानकारी ली गई। इस दौरान शिक्षकों की भी काउंसलिंग कर उन्हें कम सुनने वाले छात्रों को दी जाने वाली अतिरिक्त मदद के बारे में समझाया गया। छह बच्चों के कानों में इंफेक्शन मिलने पर उन्हें इलाज के लिए एम्स आने की सलाह दी गई।

प्रो. नागरकर का कहना है कि कई बच्चों में जन्म से ही सुनने की क्षमता कम होती है। यदि इसे समय रहते पहचान लिया जाए तो इसका उपचार संभव है। इसके अलावा कई बच्चे या अभिभावक कान में असुरक्षित चीजों जैसे माचिस की तीली, पैन, पैंसिल आदि का भी प्रयोग करके सुनने की क्षमता को प्रभावित कर लेते हैं। इस प्रकार के जागरूकता कैंपों के माध्यम से छात्रों और अभिभावकों को इस बारे में समझाया जा रहा है। प्रो. नागरकर ने नाक, कान या गले से संबंधित कोई भी बीमारी को गंभीरता से लेकर तुरंत चिकित्सक से परामर्श लेने का सुझाव दिया।

कार्यक्रम में पीजीआई चंडीगढ़ की वरिष्ठ ऑडियोलॉजिस्ट और स्पीच लैंग्वेज पैथोलॉजिस्ट डॉ. अनु एन. नागरकर ने बच्चों को कान स्वच्छ रखने और बेहतर संवाद के बारे में बताया। ईएनटी विभाग की स्पीच थैरेपिस्ट मोनालीसा, स्कूल ऑफ पब्लिक हैल्थ की कृतिका वैष्णव, प्रियंका, स्नेहलता, सुमित्रा और श्रीकांत ने भाग लिया। ईएनटी विभाग के यह जागरूकता कार्यक्रम अब एम्स के बाल रोग विभाग और स्त्री रोग विभाग में भी आयोजित किए जाएंगे। कार्यक्रमों का समापन छह मार्च को होगा।

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