कृषि

PADDY; प्रदेश के 50 फीसदी उपार्जन केन्द्रों में धान जाम, बालौद-महासमुंद जिले के फडों में धान रखने जगह नहीं

13 दिनों में 12 लाख किसानों से कैसे होगी धान खरीदी

रायपुर, प्रदेश में समर्थन मूल्य पर करीब 15 लाख किसानों से अब तक 88 लाख मी. टन धान की खरीदी हो चुकी है जो गत वर्ष की तुलना में करीब 22 लाख मी. टन कम है। जबकि अभी धान बेचने के लिए करीब 12 लाख किसान इंतजार कर रहे हैं। इधर उपार्जन केद्रों में धान जाम पड़ा है। धान रखने के लिए जगह नहीं है इससे किसानों के साथ-साथ फड प्रभारी भी चिंतित हैं।

प्रदेश में 33 जिलों के करीब 2740 उपार्जन केदो में धान खरीदी चल रही है। 27 लाख से अधिक किसानों ने पंजीयन कराया है। अब धान खरीदी के लिए मात्र 13 दिन शेष है। ऐसे में करीब 12 लाख किसानों का धान खरीद पाना संभव नहीं है क्योंकि राज्य सरकार ने समितियों में धान खरीदी की लिमिट तय कर दी है। इससे वहां ज्यादा धान खरीदी नहीं कर पाएंगे। इसलिए सभी किसान धान बेच पाएंगे? यह कहना मुश्किल है।

बिलासपुर संभाग में धान का उठाव तेज

जानकारी के अनुसार प्रदेश के 2740 उपार्जन केदो में से करीब 1352 उपार्जन केदो में लिमिट से ज्यादा धान जाम पडा है ऐसा धान का परिवहन नहीं किये जाने से हुआ है। इन केंद्रों मे धान का उठाव नहीं हो पाया है यह करीब 50 होता है । दिलचस्प बात यह है कि बस्तर और बिलासपुर संभाग में धान का उठाव काफी तेजी से हो रहा है। कांकेर जिले को छोड़ दें तो बाकि बस्तर में धान का उठाव तेजी से चल रहा है। दूसरी ओर बिलासपुर संभाग में भी धान का उठाव तेजी से जारी है और किसान धडल्ले से धान बेच रहे हैं।

रायपुर और दुर्ग संभाग में धान का उठाव बेहद धीमी

प्रदेश में सर्वाधिक धान उत्पादन वाले रायपुर और दुर्ग संभाग में धान का उठाव बेहद धीमी गति चल र ही है। बालोद में 143 में से 106 से ज्यादा उपार्जन केद्रों में ध्यान खरीदी बंद है क्योंकि वहां धान जाम पड़ा है। इसी तरह महासमुंद जिले में भी 182 में से 101 से ज्यादा उपार्जन केद्रों में धान खरीदी नहीं की जा रही है क्योंकि वहां लिमिट से ज्यादा धान जाम हो गया है। इस मामले में बस्तर,सरगुजा एवं बिलासपुर संंभाग के किसान खुश है। कम से कम वे अपना धान बेच पाएंगेंं।

फड प्रभारियों की चिंता

महासमुंद जिले के बागबाहरा पिथौरा बसना विकासखंड अंतर्गत आने वाले अधिकतर समितियों में छिटपुट खरीदी चल रही है लेकिन धान का उठाव नहीं होने के कारण फड प्रभारियों की चिंता बढ़ गई है। रोजाना बहस की स्थिति निर्मित हो रही है। फड प्रभारियों के अनुसार डीओ काटने में बहुत दिक्कत आ रही है और डीओ नहीं काटने की वजह से जगह की कमी और कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। अगर इसी बीच बारिश हो जाती है तो मंडियों में धान को ढकने के लिए भरपूर त्रिपाल की भी व्यवस्था नहीं है। प्रभारियों द्वारा उच्च अधिकारियों को इसकी जानकारी लगातार दी जा रही है फिर भी धान उठाव की समस्या बनी हुई है। यहां के कलेक्टर और जनप्रतिनिधि कोई ध्यान नहीं दे रहे है। पिचाले साल भी यहां के सभी किसान धान नहीं बेच पाए थे। महासमुंद जिला धान तस्करी के नाम से बदनाम है। इसका खामियाजा यहां के किसानों को भुगतना पड रहा है।

उपार्जन केन्द्र टेकारी में 70 प्रतिशत धान जाम

मंदिर हसौद सहकारी बैंक शाखा के अधीन आने वाले ‌सोसायटी एवं धान उपार्जन केन्द्र टेकारी में अब तक खरीदे गये धान मे से 70 प्रतिशत का परिवहन न हो पाने की वजह से जाम पड़ा है । जाम धान की कुल मात्रा लगभग 60 हजार कट्टा है । जाम धान ‌की वजह से खरीदी में किल्लत हो ‌रही है जबकि अभी अवकाश के ‌दिनो को छोड़ 13 दिन ‌खरीदी हेतु शेष है और तकरीबन 40 हजार कट्टा धान की खरीदी बाकी है । 3 ग्राम टेकारी , कुंडा व‌ खम्हरिया के लिये गठित इस सोसायटी का मुख्यालय ग्राम व खरीदी केंद्र टेकारी है । इस वर्ष इस केंद्र में अब तक लगभग 75 हजार कट्टा धान की खरीदी हो चुका है व महज 14 हजार कट्टा के आसपास ही परिवहन हो पाया है । जाम धान ‌की वजह से अब खरीदी हेतु जगह नहीं बचा है और जो थोड़ी सी जगह है वह धान रखने लायक नहीं है व असामयिक बरसात होने पर नुकसानी की आंशका है ।

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