व्यापार-उद्योग

कोरोना; कारखानों-प्रतिष्ठानों के प्रबंधन के लिए जारी दिशा-निर्देश

रायपुर, दुनिया भर और देश में कोरोना वायरस (कोविड-19) से संक्रमण के रोकथाम एवं नियंत्रण के लिए प्रदेश के कारखानों, प्रतिष्ठानों के प्रबंधन के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किया गया है। इस आशय के निर्देश श्रमायुक्त सह मुख्य कारखाना निरीक्षक श्री सोनमणि बोरा ने राज्य के सभी उप श्रमायुक्तों, छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के सचिव, श्रम कल्याण मंडल के कल्याण आयुक्त, औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा के सभी उप संचालकों, हाईजिन लैब के उप संचालकों, सहायक संचालकों, सहायक श्रमायुक्तों तथा श्रम पदाधिकारियों को जारी किए है। उन्होंने सभी कारखानों-प्रतिष्ठानों एवं श्रमिक संघों से कहा है कि जारी निर्देश का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराया जाए।  
पत्र में कहा गया है कि कार्यक्षेत्र परिसर में सघन रूप से हाथ धोने के लिए प्रेरित किया जाये। इसके लिए सभी कार्यक्षेत्र परिसर में हाथ धोने के लिए स्थान सुनिश्चित किया जाये और श्रमिकों, ग्राहकों और आगंतुकों के लिए साबुन तथा सेनेटाईजर की पर्याप्त व्यवस्था की जाए। निर्देश में यह भी कहा गया है कि:- 
 यदि कोई श्रमिक बीमार हैं तो उन्हें घर पर रहने के लिए प्रोत्साहित किया जावे तथा राज्य हेल्पलाईन नम्बर 0771-2235091ए 97133-73165 और टोल फ्री नम्बर 104 की जानकारी दी जाए। कोविड-19 के लक्षण देने जाने पर सार्वजनिक परिवहन सुविधा उपयोग नहीं करने हेतु निर्देशित करे।
 श्रमिकों को श्वसन संबंधी रीति एवं सावधानियों के लिए प्रोत्साहित करें, जिसमें खांसी और छींक के दौरान मुंह को ढकना शामिल है।
 जहां तक संभव हो घर से अथवा सुविधाजनक कार्यस्थल पर कार्य करने हेतु और कार्य करने हेतु सुविधाजनक समय-सारिणी लागू करने पर विचार किया जावे।
 जहां तक संभव हो, कार्यस्थल पर अन्य श्रमिकों के फोन, कार्यालय के डेस्क या अन्य उपकरण का उपयोग कम से कम करने हेतु श्रमिकों को प्रोत्साहित करें।
 जहां तक संभव हो कार्य स्थल पर या बैठक के लिए श्रमिकों या कर्मचारियों के समूह को इकठ्ठा करने से बचें।
 संभावित संक्रमित व्यक्तियों की शीघ्र पहचान हेतु आवश्यक कदम उठाए और श्रमिकों, ग्राहकों, आगंतुकों तथा अन्य लोगों को संक्रमित व्यक्तियों से पृथक करना महत्वपूर्ण है।
 नियोक्ता को अपने श्रमिकों/कर्मचारियों को कोविड-19 के के संबंध में सम्पूर्ण जानकारी देनी चाहिए तथा इसके बचाव हेतु कर्मचारियों को सावधानियां रखने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए।
 नियोक्ता के कर्मचारियों के बीमार होने या कोविड-19 के लक्षणों का अनुभव करने पर रिपोर्ट करने के लिए आतंरिक व्यवस्था एवं नीति तय करना चाहिए।
 संभावित संक्रमित व्यक्तियों के पहचान के लिए और आवश्यक मेडिकल सुविधा हेतु आंतरिक व्यवस्था नीति अपनाना चाहिए। जिन श्रमिकों/कर्मचारियों को कोविड-19 के लक्षण हैं, उन्हें अन्य श्रमिकों, ग्राहकों और आगंतुकों से पृथक किया जावे। अधिकांश कार्यक्षेत्रों में विशिष्ट आइसोलेशन रूम नहीं हैं, अतः इस हेतु आवश्यक समीक्षा की जाए और ऐसी कोई स्थिति उत्पन्न होने पर सुविधाजनक स्थान निर्धारित किया जावे।
 यदि किसी विदेशी प्रतिनिधिमंडल/अधिकारी/कर्मचारी ने हाल ही में परिसर का दौरा किया है या अधिकारी/कर्मचारियों ने कुछ विदेशी स्थानों का दौरा किया है या भविष्य में कोई यात्रा संभावित है तो नियोक्ता जिला प्रशासन के साथ ही निकटतम सरकारी अस्पताल को सूचित करेगा।
 आवश्यकता होने पर नियोक्ता अपने अधिकारी/कर्मचारियों को फेस मास्क प्रदान करे।
 वर्तमान स्थिति को देखते हुए अन्य कारणों से चिकित्सा लाभ/चिकित्सकीय अवकाश लेने वाले व्यक्तियों को चिकित्सा प्रमाण पत्र हेतु अनावश्यक दबाव न बनाया जाये क्योंकि वर्तमान में लगभग सभी चिकित्सालय, चिकित्सक एवं स्टाफ कोविड-19 कि बचाव हेतु व्यस्त है।
 नियोक्ता यह देखे कि यदि उनके किसी अधिकारी/कर्मचारी के परिवार के सदस्य बीमार है तो उनके देखभाल के लिए उन्हें सहुलियत या सुविधा प्रदान करें।
 जहां तक संभव हो, आमने-सामने की बैठकों की जगह टेली कम्यूनिकेशन अथवा अन्य उपायो को अमल किया जाये।
 किसी भी पाली में अधिक कर्मचारियों की उपस्थिति के दबाव को यथा संभव कम किया जाए एवं अतिरिक्त पाली के संबंध में भी विचार किया जाए।
 नियमित हाउसकीपिंग व्यवस्था को बनाए रखें, जिसमें नियमित सफाई, उपकरण और काम के वातावरण के अन्य तत्वों को कीटाणुरहित करना शामिल है। रसायनों का चयन ऐसे किया जावे जिससे की संभावित वायरल पैथोजेन्स को नाश करने में मदद हो। कीटाणुशोधन उत्पादों के उपयोग के लिए निर्माता के निर्देशों का पालन सुनिश्चित करें। नियमित रूप से हैण्ड रेलिंग आदि को कीटाणुरहित किया जावे।
 कैंटीन/भोजन कक्ष में उचित स्वच्छता बना रखें। कैंटीन में बुफे काउंटरों पर रखा जाने वाल भोजन शिशु घर/पालना घर/क्रेच हो तो उसका सतत निगरानी किया जावे और उसे कीटाणुरहित किया जाय।

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