कानून-व्यवस्था

1000 करोड़ का घोटाला, सीबीआई ही करेगी कार्रवाई

हाईकोर्ट ने शासन की पुनर्विचार याचिका खारिज की

बिलासपुर, हाईकोर्ट ने समाज कल्याण विभाग के छत्तीसगढ़ राज्य निशक्तजन स्त्रोत संस्थान रायपुर में हुए 1000 करोड़ के घोटाले की सीबीआई जांच करने का आदेश दिया है। सीबीआई को जांच का आदेश दिए जाने के  खिलाफ शासन की ओर से पुनर्विचार याचिका दाखिल की गई थी, जिसे भी खारिज कर दिया गया।

याचिका में कहा गया था कि राज्य शासन किसी भी भ्र्ष्टाचार को बढ़ावा नही देगा। शासन ने मामले को जांच व् कार्रवाई के लिए सीबीआई के बजाय स्टेट पुलिस को दिए जाने की मांग की । कोर्ट ने सुनवाई उपरान्त मामले को निर्णय के लिए सुरक्षित रखा था। कोर्ट ने पूर्व में अधिकारियो की दो याचिकाएं खारिज किये जाने के आधार पर शासन की भी पुनर्विचार याचिका को ख़ारिज कर दिया है।

उल्लेखनीय है कि कोर्ट के आदेश के बाद सीबीआई ने अज्ञात आरोपियो के खिलाफ जुर्म दर्ज कर मामले को जांच में ले लिया है। इसके साथ ही सीबीआई ने राज्य शासन से दस्तावेजों की मांग की है। हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद अब मामले की सीबीआई ही जांच करेगी।

मरवाही सदन में कर्मचारी के ख़ुदकुशी मामले में

जोगी की याचिका पर निर्णय सुरक्षित

बिलासपुर, हाईकोर्ट ने मरवाही सदन में कर्मचारी द्वारा खुदकुशी करने के मामले में अजीत जोगी व् अमित जोगी को आरोपी बनाए जाने के खिलाफ पेश याचिका को सुनवाई पूरी कर निर्णय के लिए सुरक्षित रखा है।उल्लेखनीय है कि 14 जनवरी को मरवाही सदन के कर्मचारी सन्तोष उर्फ मनवा ने बगले में ही फाँसी लगाकर खुदकुशी कर ली। इस मामले में मृतक के परिजनों ने मृतक को चोरी का आरोप लगा कर प्रताड़ित किये जाने से उसके ख़ुदकुशी करने का आरोप लगाया। दूसरे दिन परिजनों व कुछ अन्य लोगों ने शव को सड़क पर रख कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर बिलासपुर रतनपुर मार्ग पर स्थित सेंदरी में चक्का जाम किया था। उसी रात सिविल लाइन पुलिस ने अमित जोगी व् अजीत जोगी के खिलाफ धारा 306 के तहत अपराध पंजीबद्ध किया था। पुलिस की इस कार्रवाई के खिलाफ पिता पुत्र ने हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की है। पिछली सुनवाई में कोर्ट ने केस डायरी तलब की थी। मंगलवार को मामले में अंतिम बहस हुई। शासन व् याचिकाकर्ता की ओर से तर्क पूरा किये जाने पर कोर्ट ने मामले को निर्णय के लिए सुरक्षित किया है

कोल बेस्ड पावर प्लांट के कर्मचारियो की

स्वास्थ जांच रिपोर्ट पेश करने का आदेश


बिलासपुर, सीजे पी आर रामचंद्र मेमन व् जस्टिस पी पी साहू की डीबी ने कोल आधारित पावर प्लांट में कार्यरत कर्मचारियो को स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध नही कराये जाने को लेकर पेश जनहित याचिका में सरकार को दो सप्ताह के अंदर कर्मचारियो के स्वास्थ की कब कब जांच कराई गई ? इस सम्बन्ध में शपथ पत्र के साथ रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है।प्रदेश के कोरबा, जांजगीर चांपा व रायगढ़ सहित अन्य जिलों में कोयला आधारित पावर प्लांट चल रहे हैं। यहां कोयला डस्ट व चिमनी से निकलने वाले प्रदूषण से वहां काम करने वाले कर्मचारी बीमार हो रहे हैं। इनके उपचार की कोई व्यवस्था नही है। नियम के अनुसार सभी पावर प्लांट में अस्पताल की व्यवस्था होनी चाहिये। विशेषज्ञ चिकित्सक से समय समय पर काम करने वालों की स्वास्थ्य जांच होनी चाहिये। हाई कोर्ट ने औधोगिक प्रदूषण को लेकर पेश सभी याचिकाओ को क्लब कर सुनवाई प्रारंभ की है। पिछली सुनवाई में कोर्ट ने स्वास्थ्य जांच के सम्बन्ध में निर्देश जारी कर सरकार को रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया था। मंगलवार को सुनवाई के दौरान शासन की ओर से रिपोर्ट पेश करने एक दिन का समय मांगा गया। इस पर न्यायमित्र प्रतीक शर्मा ने कहा सरकार कोर्ट के निर्देश का सही तरीके से पालन नही कर रही। एमबीबीएस डॉक्टर से जांच कराकर रिपोर्ट दे रही है। किडनी, लिवर, हार्ट की जांच के लिए विशेषज्ञ डॉक्टर होना चाहिये। 12 वर्ष में एक बार ही जांच की गई है। इस पर कोर्ट ने कर्मचारियो की सही स्थिति व् इनकी कब कब जांच कराई गई है ? इस संबंध में शपथ पत्र के साथ दो सप्ताह में रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया है।

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2 Comments

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