0 तेन्दूपत्ता संग्रहण से पहले शाखा-कर्तन कार्य के लिए कार्यशाला आयोजित करने के निर्देश
रायपुर, शाखा-कर्तन कार्य के लिए निर्धारित राशि के अनुसार 70 रुपये प्रति मानक बोरा भुगतान किया जाएगा, जिसका भुगतान समिति के पोषक अधिकारी और प्रबंधक द्वारा संयुक्त रूप से कार्य पूरा होने के तुरंत बाद किया जाएगा। इसी तरह तेन्दूपत्ता खरीदी का भुगतान साप्ताहिक खरीदी के तीसरे दिन तक अनिवार्य रूप से किया जाए, ताकि संग्राहकों को समय पर लाभ मिल सके। राज्य में अप्रैल में बस्तर से तेंदूपत्ता की तोडाई शुरु होती है जो सरगुजा में समाप्त होती है।
बता दें इस सीजन में प्रदेश में 16 लाख 72 हाजार मानक बोरा तेन्दूपत्ता संग्रहण का लाक्ष्य रखा गया है। पत्ता तोडाई दर 5500 रुपये प्रति मानक बोरा है। राज्य में तेंदूपत्ता तेन्दूपत्ता व्यवसाय करीब 1200 करोड का होता है तथा करीब 13 लाख वनवासी- आदिवासी ग्रामीण परिवार इस व्यवसाय से जुडे है। छत्तीसगढ़ में तेन्दूपत्ता को हरा सोना कहा जाता है। यह कार्य ऐसे समय में होता है जब ग्रामीण और संग्राहकों के पास अन्य रोजगार कम होते हैं, इसलिए यह उनके लिए आय का महत्वपूर्ण साधन बनता है।
छ्त्तीसगढ राज्य लघु वनोपज संघ की कार्यकारी संचालक श्रीमती संजीता गुप्ता ने बताया कि इस बार मौसम अनुकूल रहने के आसार है। इसलिए तेंदूपत्ता उत्पादन बढने की उम्मीद है। साथ ही बस्तर समेत प्रदेश नक्सलमुक्त होने जा रहा है, इससे तेंदूपत्ता संग्रहण भी ज्यादा होगा। बस्तर के कई हिस्सों में तेंदूपत्ते का विभागीय संग्रहण किया जायेगा। इसे देखते हुए उन्होंंने तेन्दूपत्ता संग्रहण से पहले शाखा-कर्तन कार्य के लिए कार्यशाला आयोजित करने के निर्देश दिए है ताकि पत्तों की गुणवत्ता बनी रहे।

संघ के अफसरों के अनुसार तेंदूपत्ता की गुणवत्ता और उत्पादन बढ़ाने के लिए मार्च-अप्रैल से पहले फरवरी-मार्च में वैज्ञानिक तरीके से शाखा-कर्तन किया जाता है। इस प्रक्रिया में झाड़ियों की कटाई-छंटाई की जाती है, जिससे नई कोमल पत्तियां निकलती हैं, जो बीड़ी उद्योग के लिए उच्च गुणवत्ता वाली होती हैं।
बताया गया है कि छ्त्तीसगढ राज्य लघु वनोपज संघ के निर्देशानुसार विभिन्न वनमंडलों के अंतर्गत जिला लघु वनोपज सहकारी यूनियनों द्वारा तेन्दूपत्ता संग्रहण कार्य से पहले शाखा-कर्तन (बूटा कटाई) के लिए कार्यशाला आयोजित की जा रही है। इसमें प्राथमिक वनोपज सहकारी समितियों के इकाइयों के फड़मुंशी, प्रबंधक, पोषक अधिकारी, फड़ अभिरक्षक सहित वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी शामिल हो रहे है। फड़मुंशी और फड़ अभिरक्षकों को उनके कर्तव्यों और जिम्मेदारियों की जानकारी भी दी जा रही है। साथ ही उन्हें तेंदूपत्ता संग्रहण के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।





