नईदिल्ली, संसद का सत्र अब तक बेहद हंगामेदार रहा है। पेपर लीक के खिलाफ हुए प्रदर्शन के दौरान लाठीचार्ज और प्रोटेस्ट के बाद गिरफ्तारियों पर विपक्ष ने संसद में जमकर हंगामा किया। सार्वजनिक परीक्षा संशोधन विधेयक पेश होने और फिर उस पर चर्चा के दौरान भी काफी नारेबाजी होती रही। हालांकि, बाद में यह बिल ध्वनिमत से लोकसभा में पास हो गया। इतना ही नहीं वंदे मातरम् बिल भी संसद के दोनों सदनों में पास हो गया।
राज्यसभा से पास हुआ एंटी पेपर लीक बिल
राज्यसभा ने गुरुवार को एंटी पेपर लीक बिल को पारित कर दिया। बिल के पास होने के बाद सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने सदन की कार्यवाही शुक्रवार, 31 जुलाई, सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित करने की घोषणा की। इसके साथ ही लोकसभा के बाद यह महत्वपूर्ण विधेयक राज्यसभा से भी मंजूरी प्राप्त कर चुका है।
छात्रों का गुस्सा और उनकी चिंताएं पूरी तरह जायज
राघव चड्ढाराघव चड्ढा ने NEET अभ्यर्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि छात्रों का गुस्सा और उनकी चिंताएं पूरी तरह जायज थीं। उन्होंने कहा कि छात्रों की आवाज सुनने के बाद सरकार ने अभिभावक की भूमिका निभाते हुए परीक्षा प्रणाली में बदलाव किए और पहली बार पेपर लीक रोकने के लिए व्यापक कानूनी ढांचा तैयार किया। चड्ढा ने दावा किया कि मामले की जांच को लंबित नहीं रखा गया और महज 75 दिनों के भीतर फास्ट ट्रैक कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी गई। उन्होंने यह भी कहा कि अगली बार से NEET परीक्षा पारंपरिक OMR शीट के बजाय कंप्यूटर आधारित प्रणाली से कराई जाएगी। उनके अनुसार, नए कानून का उद्देश्य ऐसा कड़ा संदेश देना है कि भविष्य में कोई भी अपराधी पेपर लीक जैसे अपराध के बारे में सोचने से पहले भी डर महसूस करे।
पूरी शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था में सुधार चाहते हैं छात्र
कपिल सिब्बलकपिल सिब्बल ने परीक्षा प्रणाली पर चल रही बहस को अधूरा बताते हुए कहा कि केवल पेपर लीक पर कानून बनाने से समस्या का समाधान नहीं होगा। उन्होंने कहा कि छात्रों से बातचीत में यह साफ सामने आया कि उनकी सबसे बड़ी चिंता सिर्फ पेपर लीक नहीं, बल्कि पूरे शिक्षा और भर्ती तंत्र का भविष्य है। सिब्बल ने कहा कि छात्र परीक्षा व्यवस्था, शिक्षकों की कमी, रोजगार और अपने भविष्य को लेकर व्यापक सुधार चाहते हैं। उनके मुताबिक, युवा सरकार से पूरे सिस्टम में बदलाव की मांग कर रहे हैं, जबकि सरकार केवल पेपर लीक तक सीमित कानून लेकर आई है।
राज्यसभा में पेपर लीक पर टकराव, कांग्रेस पर बरसे सुधांशु त्रिवेदी
बीजेपी सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि छात्रों की मांग पर शिक्षा मंत्री ने इस्तीफा दिया और उनकी सरकार ने पेपर लीक रोकने के लिए कानून को पहले से अधिक सख्त बनाया है। उन्होंने कहा कि नए कानून में दोषियों के लिए 7 से 10 साल तक की कड़ी सजा का प्रावधान किया गया है। साथ ही, उन्होंने कांग्रेस सरकारों के दौरान हुई पेपर लीक की घटनाओं का जिक्र करते हुए विपक्ष पर निशाना साधा और कहा कि मौजूदा सरकार परीक्षा व्यवस्था को पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए लगातार कदम उठा रही है।
संजय सिंह ने NEET, पेपर लीक और छात्र आंदोलन पर सरकार को घेरा
आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने NEET पेपर लीक और छात्र आत्महत्याओं का मुद्दा उठाते हुए केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने पेपर लीक के कारण जान गंवाने वाले छात्रों को श्रद्धांजलि देते हुए आरोप लगाया कि परीक्षा कराने की जिम्मेदारी सरकार की है, लेकिन वह निष्पक्ष और सुरक्षित परीक्षा कराने में विफल रही। संजय सिंह ने कहा कि दोबारा आयोजित परीक्षा में लाखों छात्र शामिल नहीं हुए और सरकार युवाओं की समस्याओं का समाधान करने के बजाय उनकी आवाज दबाने का काम कर रही है। उन्होंने सरकार पर शिक्षा व्यवस्था, पेपर लीक, छात्र आंदोलनों और परीक्षा से जुड़े मामलों में गंभीर आरोप लगाते हुए कहा, ‘अनपढ़ रहेगा इंडिया, तभी अंधभक्त बनेगा इंडिया।’
मेडिकल प्रवेश परीक्षा राज्यों को सौंपने की मांग
समाजवादी पार्टी के सांसद प्रोफेसर रामगोपाल यादव ने मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाओं पर चिंता जताते हुए केंद्र सरकार से परीक्षा आयोजित कराने की जिम्मेदारी राज्यों को सौंपने की मांग की। उन्होंने कहा कि पहले राज्यों के स्तर पर परीक्षाएं होने से ऐसी बड़ी गड़बड़ियां कम होती थीं, जबकि मौजूदा व्यवस्था में पेपर लीक रोकना मुश्किल है। रामगोपाल ने एनटीए में स्टाफ की कमी और संविदा कर्मचारियों की अधिक संख्या पर भी सवाल उठाए। उन्होंने सुझाव दिया कि केंद्र 15 प्रतिशत अखिल भारतीय सीटें अपने पास रखे और बाकी प्रवेश परीक्षाओं का संचालन राज्यों को करने दिया जाए।






