रायपुर, छत्तीसगढ़ कांग्रेस में संगठनात्मक नियुक्तियों को लेकर एक बार फिर विवाद की स्थिति बन गई है। रायपुर शहर कांग्रेस द्वारा वार्ड अध्यक्षों की सूची जारी करने के कुछ ही घंटों के भीतर प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) ने इसे निरस्त कर दिया। पीसीसी ने स्पष्ट रूप से कहा कि सूची जारी करने से पहले आवश्यक अनुमोदन नहीं लिया गया, जिसके चलते इसे अवैधानिक माना गया है। इस घटनाक्रम के बाद पार्टी के भीतर असंतोष और समन्वय की कमी उजागर होती नजर आ रही है।
66 वार्डों के अध्यक्षों की सूची जारी
दरअसल, पीसीसी चीफ दीपक बैज ने सभी जिला अध्यक्षों को 15 अप्रैल तक बूथ स्तर से लेकर जिला कांग्रेस कमेटी की नई कार्यकारिणी गठित करने के निर्देश दिए थे। इसी समयसीमा के दबाव के बीच रायपुर शहर कांग्रेस ने 66 वार्डों के अध्यक्षों की सूची जारी कर दी। हालांकि, यह कदम पार्टी के तय प्रोटोकॉल के अनुरूप नहीं था, क्योंकि सूची जारी करने से पहले प्रदेश नेतृत्व से मंजूरी लेना आवश्यक होता है।
प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने इस मामले में सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट कर दिया कि बिना अनुमोदन जारी की गई किसी भी सूची को मान्यता नहीं दी जाएगी। पीसीसी का कहना है कि संगठनात्मक प्रक्रिया में अनुशासन और समन्वय अनिवार्य है, और किसी भी स्तर पर नियमों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इस फैसले ने संकेत दिया है कि प्रदेश नेतृत्व संगठन में केंद्रीकृत नियंत्रण बनाए रखना चाहता है।
संगठन के भीतर असंतोष की झलक
इस घटनाक्रम से यह भी सामने आया है कि संगठन के भीतर पहले से ही कार्यकारिणी गठन को लेकर असंतोष मौजूद था। हाल ही में हुई समीक्षा बैठकों में कई जिलों में अब तक वार्ड अध्यक्ष और कार्यकारिणी घोषित नहीं किए जाने पर नाराजगी जताई गई थी। ऐसे में रायपुर शहर कांग्रेस द्वारा जल्दबाजी में सूची जारी करना इसी दबाव का परिणाम माना जा रहा है।
टकराव नहीं, संवाद से निकलेगा रास्ता
विवाद के बीच रायपुर शहर जिला कांग्रेस अध्यक्ष श्रीकुमार मेनन ने स्थिति को संभालने की कोशिश की है। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज और अन्य वरिष्ठ पदाधिकारियों से चर्चा की जाएगी। मेनन ने साफ किया कि संगठन के भीतर किसी प्रकार का टकराव नहीं है और सभी मतभेद आपसी बातचीत से सुलझा लिए जाएंगे|







