राजनीति

गंगानगर के भू-विस्थापित 25 फरवरी को एसईसीएल पर करेंगे प्रदर्शन, मांगेंगे मुआवजा

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी

रायपुर-कोरबा, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने भू-विस्थापित पीड़ितों की समस्याओं को हल न करने के कोयला प्रबंधन के तानाशाहीपूर्ण रवैये के खिलाफ 25 फरवरी को एसईसीएल के गेवरा मुख्यालय का घेराव कर प्रदर्शन करने की घोषणा की है। इस घेराव की अगुआई माकपा की कोरबा नगर निगम में नवनिर्वाचित पार्षद सुरती कुलदीप और राजकुमारी कंवर करेगी।
आज यहां जारी एक बयान में माकपा के कोरबा जिला सचिव प्रशांत झा ने बताया कि घाटमुड़ा के विस्थापित ग्राम गंगानगर में एक वर्ष पूर्व बिना किसी सूचना के एसईसीएल प्रबंधन द्वारा तोड़-फोड़ की गई थी। इससे लोगों की संपत्ति — मकान, शौचालय व बाड़ी आदि — को काफी नुकसान पहुंचा था। इसके खिलाफ माकपा और छत्तीसगढ़ किसान सभा ने एक बड़ा अभियान-संघर्ष छेड़ा था, जिसके बाद एसईसीएल प्रबंधन ने आंदोलनकारी नेताओं से वार्ता कर क्षतिपूर्ति के रूप में मुआवजा प्रदान करने का वादा किया था।लेकिन एक साल बीत जाने के बाद अभी तक किसी प्रकार का मुआवजा नहीं दिया गया है। उल्टे, ग्रामीणों को अपनी जमीन से हटने के लिए डराया-धमकाया जा रहा है और ग्रामीणों को सूचना दिये बगैर जमीन की नाप-जोख की जा रही है, जिससे यह संदेश जा रहा है कि गांव की इस जमीन को कोयला प्रबंधन कभी भी अपने कब्जे में ले सकता है। इस अंदेशे के चलते ग्रामीणों में काफी आक्रोश है और कभी भी अप्रिय घटना घट सकती है।

ट्रम्प की भारत यात्रा का विरोध किया किसान सभा ने असली मकसद सवा लाख करोड़ के कृषि बाजार पर कब्जा जमाना
छत्तीसगढ़ किसान सभा ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की भारत यात्रा का विरोध करते हुए अमेरिकी कार्यालयों के ससमने विरोध प्रदर्शनों की घोषणा की है। उसने आरोप लगाया है कि ट्रम्प के इस दौरे का असली मकसद कृषि, डेयरी और पोल्ट्री से जुड़े सवा लाख करोड़ रुपयों के व्यापार पर कब्जा जमाना है, जिसके कारण इस क्षेत्र से जुड़े 15 करोड़ किसान परिवारों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो जाएगा। 
आज यहां जारी एक बयान में छग किसान सभा के अध्यक्ष संजय पराते और महासचिव ऋषि गुप्ता ने अमेरिका के साथ भारत के होने वाले समझौते को आरसेप समझौते से भी ज्यादा खतरनाक करार दिया है और मांग की है कि कृषि, डेयरी और पोल्ट्री उत्पादों से जुड़े किदानों के व्यापक हित में इन समझौतों पर भारत सरकार हस्ताक्षर न करें।
किसान सभा नेताओं ने कहा है कि कृषि क्षेत्र में व्यापार समझौते के कारण कृषि उत्पादों पर व्यापार शुल्क 10% से भी कम कर दिया जाएगा और भारतीय बाजार आयातित फलों सेब, ब्लू बेरी, चेरी, अखरोट, बादाम, सोयाबीन, गेहूं, मक्का, धान आदि फसलों से पट जाएगी। इसी प्रकार, डेयरी उत्पादों पर आयात शुल्क मौजूदा 64% से घटाकर 10% से भी कम कर दिया जाना प्रस्तावित है। इससे दूध व दुग्ध उत्पादों, मुर्गे की टांग और तुर्की मुर्गियों की घरेलू बाजार में कीमतें गिर जाएंगी।
उन्होंने कहा कि इन प्रतिगामी व्यापार समझौतों का लघु व सीमांत किसानों और खेतमज़दूरों की आजीविका पर विनाशकारी असर पड़ेगा, क्योंकि वे सब्सिडी प्राप्त विदेशी वस्तुओं के साथ प्रतिस्पर्धा नहीं कर सकते और देश मे वर्तमान में छाई आर्थिक मंदी से वे पहले ही परेशान हैं।

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