ग्रामिण विकास

कृषि और किसानों की दशा सुधारने न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाने की जरूरत – सिंहदेव

नाबार्ड के राज्य ऋण संगोष्ठी में शामिल हुए पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री सिंहदेव

रायपुर, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, स्वास्थ्य तथा वाणिज्यिक कर मंत्री टी.एस. सिंहदेव आज शाम एक निजी होटल में नाबार्ड द्वारा आयोजित छत्तीसगढ़ राज्य ऋण संगोष्ठी-2020-21 में शामिल हुए। उन्होंने संगोष्ठी में उच्च कृषि प्रौद्योगिकी पर आधारित राज्य फोकस पेपर-2020-21 का विमोचन किया। नाबार्ड द्वारा वित्तीय वर्ष 2020-21 में छत्तीसगढ़ के लिए 34 हजार 421 करोड़ रूपए ऋण संभाव्यता का आंकलन किया गया है। यह चालू वित्तीय वर्ष 2019-20 की तुलना में तीन हजार 977 करोड़ रूपए अधिक है।

      संगोष्ठी को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री टी.एस. सिंहदेव ने कहा कि खेती और किसानों की दशा सुधारने के लिए फसलों का समर्थन मूल्य बढ़ाए जाने की जरूरत है। कृषि, सिंचाई, आजीविका एवं हस्तशिल्प क्षेत्रों के विकास के लिए नाबार्ड और अन्य बैंकों द्वारा सतत वित्तीय सहयोग आवश्यक है। इन उद्यमों और इनके जरिए रोजगार हासिल करने वालों को नाबार्ड से लगातार मदद मिल रही है। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में नाबार्ड से प्रदेश में स्थापित होने वाले फूड पार्कों, प्रसंस्करण केन्द्रों, धान व गन्ने से निर्मित एथेनॉल संयंत्रों के लिए भी आर्थिक सहयोग मिल सकेगा।

श्री सिंहदेव ने कहा कि सरकार, नाबार्ड व अन्य बैंकों द्वारा लघु और सीमांत किसानों, छोटे उद्यमियों, स्वसहायता समूहों एवं स्वरोजगार करने वालों को अलग-अलग स्तर पर वित्तीय सहयोग से उनके व्यवसाय को मजबूती मिलेगी। स्टार्ट-अप, कच्चा माल और उत्पादन के लिए आर्थिक मदद के साथ ही बाजार व बिक्री के लिए भी उन्हें समुचित सहायता उपलब्ध कराया जाना चाहिए। सरकार की नरवा, गरवा, घुरवा और बारी योजना ग्रामीण अर्थव्यवस्था के सशक्तिकरण व रोजगार की योजना है। इस योजना को विस्तारित करने में नाबार्ड भी सहभागी बन सकता है।

संगोष्ठी को संबोधित करते हुए नाबार्ड के मुख्य महाप्रबंधक एम. सोरेन ने कहा कि नाबार्ड ने आगामी वित्तीय वर्ष 2020-21 के लिए कृषि क्षेत्र के लिए कुल ऋण संभाव्यता 19 हजार 579 करोड़ रूपए आंकलित की है। इसमें फसल उत्पादन, रखरखाव और विपणन के लिए 13 हजार 227 करोड़ रूपए की राशि शामिल है। सूक्ष्म, लघु व मध्यम उद्यम (एम.एस.एम.ई.) के लिए 10 हजार 811 करोड़ रूपए की ऋण संभाव्यता का आंकलन किया गया है। प्राथमिकता वाले अन्य क्षेत्रों निर्यात, शिक्षा, आवास एवं नवीकरणीय ऊर्जा इत्यादि के लिए चार हजार 030 करोड़ रूपए के ऋण की जरूरत का अनुमान है। उन्होंने बताया कि नाबार्ड द्वारा ‘ई-शक्ति’ कार्यक्रम के अंतर्गत 42 हजार 842 स्वसहायता समूहों के खाते को डिजिटाइज्ड किया गया है। इससे उनके खातों को तत्काल अपडेट करने के साथ ही बेहतर रखरखाव हो सकेगा।

संगोष्ठी में कृषि विभाग के सचिव एवं सहकारी संस्थाओं के पंजीयक धनंजय देवांगन, भारतीय रिजर्व बैंक की क्षेत्रीय निदेशक सुश्री ए. शिवागामी, राज्य स्तरीय बैंकिंग समिति के संयोजक आलोक कुमार सिन्हा और नाबार्ड के छत्तीसगढ़ क्षेत्रीय कार्यालय के महाप्रबंधक एस.एस. तायड़े सहित एपेक्स बैंक, छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण बैंक, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, कामधेनु विश्वविद्यालय व नाबार्ड के अनेक वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे।

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