राज्य प्रशासन

आधी- अधूरी, भ्रामक और त्रुटिपूर्ण जानकारी देने से बचेंं-अशोक अग्रवाल

जनसूचना अधिकारी समयावधि में दें जानकारी – मोहन राव पवार

आॅनलाईन से आवेदनों में आई कमी, विद्यार्थियों को मिल सकती है उत्तरपुस्त्किा

सूचना का अधिकार अधिनियम पर कार्यशाला

रायपुर , छत्तीसगढ़ राज्य सूचना आयोग द्वारा आज भारतीय रेडक्राॅस सोसायटी के सभाकक्ष में रायपुर जिले के प्रथम अपीलीय अधिकारियों, जनसूचना अधिकारियों तथा सहायक जनसूचना अधिकारियों का एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला आयेाजित हुआ। कार्यशाला को राज्य सूचना आयुक्त सर्व अशोक अग्रवाल, मोहन राव पवार के साथ कलेक्टर डाॅ एस. भारतीदासन ने भी संबोधित किया।

अशोक अग्रवाल ने कहा कि शासन के कामकाज में पारदर्शिता लाने में सूचना के अधिकार अधिनियम की बडी भूमिका है। सभी शासकीय अधिकारियों कर्मचारियों के लिए आवश्यक है कि वे इस अधिनियम के प्रावधानों की जानकारी रखें। आयोग द्वारा पहले संभाग स्तर पर कार्यशालाएं आयोजित की जाती थी। अब ऐसी कार्यशालायें जिला स्तर पर भी आयोजित की जा रहीं है। आवेदन प्राप्त होते ही जन सूचना अधिकारी को कार्यवाही प्रारम्भ कर देनी चाहिए, जिससे 30 दिनों के भीतर उसका जवाब दिया जा सके। आवेदक को आधी- अधूरी, भ्रामक और त्रुटिपूर्ण जानकारी देने से बचना चाहिए। अगर चाही गई जानकारी विस्तृत है तो पेज के अनुसार गणना कर वास्तविक मांग पत्र तैयार किया जाना चाहिए।

उन्होंने बताया कि एक आवेदन में एक ही विषयवस्तु होना चाहिए लेकिन अगर एक से अधिक प्रश्न एक ही विषयवस्तु से संबंधित है तो उसका उत्तर दिया जाना चाहिए। अपीलीय अधिकारी को चाहिए की वे उभय पक्षों को सुने लेकिन आवेदक की अनुपस्थिति पर आवेदन को खारिज नहीं किया जा सकता। उन्नहोंने कहा अपीलीय अधिकारी के लिए यह भी जरूरी है की वे निर्णेयों को क्रियान्वित भी करायें तथा निर्णयों में अधिकारियों का नाम और पदनाम भी लिखा जाना चाहिए। उन्नहोंने कहा कि अगर जानकारी विभाग के वेबसाईट में या आॅनलाईन उपलब्ध है तो इसकी जानकारी भी दी जा सकती है। इससे मनरंेगा तथा प्रधानमंत्री आवास जैसी योजनाओं के संबंध में मिलने वाले आवेदनों में कमी आई है। विद्यार्थियों को अब उनकी उत्तर पुस्तिका की काॅपिया मिलना भी प्रारम्भ हो गया है।

श्री पवार ने कहा कि शासकीय कार्याे में पारदर्शिता लाने में तथा आमजनों को जानने के अधिकार के लिए सूचना का अधिकार अधिनियम लाया गया है। यह अधिनियम लम्बे संधर्ष के बाद बना है और जनता को जानने का अधिकार है। उन्होंने कहा कार्यालय में संघारित जानकारी ही दी जानी चाहिए। प्रश्नवाचक जानकारी का उत्तर देना या अभिमत देना बाध्यकारी नही है और ना ही जानकारी देने के नया फारमेट बनाया जाना चाहिए। उन्होेंने कहा संस्था के नाम पर जानकारी नही दी जा सकती लेकिन संस्था के पदाधिकारी के नाम पर जानकारी दी जानी चाहिए। कलेक्टर डाॅ एस. भारतीदासन ने कहा कि अधिकारी अपने स्तर पर आवेदनों को रोके नहीं और उसका शीघ्र निराकरण करें। उन्हांेन कहा इस नियम के प्रावधानों और उसमें हुए संशोधनों की जानकारी सभी अधिकारी कर्मचारी को होना चाहिए।

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