राज्य प्रशासन

विभागों में होगी सशक्त और प्रभावी आंतरिक शिकायत निवारण प्रणाली

 मुख्य सचिव ने सभी विभागों को लिखा पत्र

नागरिक सेवाओं की आपूर्ति में जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित हो

अधिकारी आम नागरिकों की शिकायतों को गंभीरता से लें

अधीनस्थ कार्यालयों की करें आकस्मिक जांच

        रायपुर, आम जनता की शिकायतों के समय पर निवारण के लिए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की मंशा के अनुरूप प्रदेश के सभी विभागों और अधीनस्थ कार्यालयों में सशक्त और प्रभावी आंतरिक शिकायत निवारण प्रणाली सुनिश्चित की जाएगी। अधिकारियों को आम नागरिकों की शिकायतों को गंभीरता से लेने और अधिनस्थ कार्यालयों की आकस्मिक जांच करने के निर्देश दिए हैं।
    मुख्य सचिव आर.पी. मंडल ने सभी विभागों को इस संबंध में परिपत्र जारी कर विस्तृत दिशा-निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि सभी कार्यालयों में नागरिक केन्द्रित प्रशासन की बेहतर संस्कृति व्यवहार में विकसित होनी चाहिए। इसके लिए शासन के प्रत्येक संगठन में एक सशक्त और प्रभावी आंतरिक शिकायत निवारण प्रणाली की आवश्यकता है। जो नागरिक सेवाओं की आपूर्ति में विलंब, लापरवाही और गैर-जवाबदेही से उठने वाली शिकायतों का त्वरित निराकरण कर सके। शिकायत निवारण प्रणाली को सरल, तत्काल, उत्तरदेय और प्रभावी भी होना चाहिए। इस प्रणाली में ग्रामों में रहने वाली जनता तक सेवा प्रदान करने में उठने वाली शिकायतों को गंभीरता से लिया जाए। सिर्फ कम्प्यूटरीकृत प्रणाली के भरोसे ही इस विषय को न छोड़ा जाए।
    लोक शिकायत निवारण प्रणाली में प्रत्येक कार्यालय के दैनंदिनी काम-काज पर आम नागरिकों से प्राप्त फीडबैक आधारभूत मानक की तरह हैं। मुख्य सचिव ने लिखा है कि लोगों को बार-बार कार्यालयों में जाना न पड़े उनके समय की बर्बादी न हो। कार्यालय प्रमुख और अन्य अधिकारी, किसी आवश्यक कार्य का बहाना करके जनता के लिए उपलब्ध न होना, अधिकारी कार्यालय समय का अनुपालन नहीं करना और कार्य के घंटों में कार्यालय में उपलब्ध नहीं होना, मोबाईल फोन रिसिव्ह नहीं करना, लोक कर्त्तव्यों का निष्पादन करते समय सरकारी कर्मचारी रूखा व्यवहार करते हैं और लोक सेवक के रूप में कार्य करने के स्थान पर वे प्रायः अधिकारों का प्रदर्शन जैसी शिकायतें नहीं होनी चाहिए।
    शासन के संगठनों में कार्य सम्पादन में विलंब, काम की गुणवत्ता में कमी एवं गैर-जवाबदेही को बदलना होगा। इसके लिए चुस्त मानीटरिंग की व्यवस्था, सभी कार्यालयों के काम-काज में होनी चाहिए। ये मानीटरिंग डाटा-बेस नहीं, अपितु वास्तविक धरातल पर होनी चाहिए। लोकसेवा गारंटी की सेवाएं हो अथवा अन्य सेवा सुपूर्दगी की सेवाएं हों, नागरिकों तक इनकी पहुंच सहज और सुगम्य ढंग से पहुंचने मंे अगर शिकायतें हैं, तो प्रभावी मानीटरिंग में शिथिलता को परिलक्षित करती हैं। इसके लिए सभी वरिष्ठ अधिकारी, सचिव, विभागाध्यक्ष, संभागायुक्त, कलेक्टर मानिटरिंग व्यवस्था उपयुक्त प्रभावी और परिणाममूलक ढंग से करें। आम नागरिकों की शिकायतों को गंभीरता से लें, इसके लिए अधिनस्थ कार्यालयों की आकस्मिक जांच करें।

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