
अर्जुन तिवारी
रायपुर, दीपावली से ठीक पहले छत्तीसगढ़ की उचित मूल्य दुकानों से शक्कर गायब हो गई है। छत्तीसगढ़ सहकारी शक्कर उत्पादक कारखाने से आपूर्ति नहीं होने के कारण नागरिक आपूर्ति निगम ने अक्टूबर महीने के लिए शक्कर का आवंटन ही जारी नहीं किया है। इसके चलते दुकानों में इस महीने शक्कर का वितरण पूरी तरह ठप रहा है। राशनकार्डधारियों को दुकानों पर चावल और नमक तो मिल रहा है, लेकिन शक्कर नहीं मिलने से उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ रहा है।
इस समय शक्कर के बढ़ते हुए कीमत से सरकार का भी पसीना छूटने लगा है। राशन दुकान में चावल तो बिना पैसे से पर व्यक्ति 10 किलो के हिसाब से वितरित किया जा रहा है परंतु शक्कर अधिकांश दुकान से गायब ही हो गया है । ज्ञातब्य है सरकारी राशन दुकान से एक राशन कार्ड में एक किलो शक्कर बीस रुपया प्रति किलो के हिसाब से वितरित किया जा रहा है, परंतु खुले बाजार में जब से शक्कर के किलो साठ से सत्तर रुपया प्रति किलो के हिसाब से बिकने लगा है। तब से सरकार को भी शक्कर बीस रुपया प्रति कार्ड वितरित किए जाने से पसीना छूटने लगा है परिणाम स्वरूप या गरीबों को चाय पीना ही बंद करना पड़ रहा है या साठ से सत्तर रुपया में बाजार से खरीदने मजबूर होना पड़ रहा है । दिवाली के समय सरकारी दुकान से प्रति कार्ड 20 रुपया किलो में शक्कर देना बंद करना सरकार की नाकामी ही उजागर होता है। गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले कार्डधारियों में सरकार पर शक्कर बंद करने से काफी नाराजगी देखा जा रहा है। वे प्रति दिन शक्कर के लिए राशन दुकान की चक्कर लगा रहे है पर राशन दुकान में शक्कर नहीं होने की जानकारी दी जा रही है ।
बहरहाल नागरिक आपूर्ति निगम के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार, कारखाने से सितंबर महीने में भी शक्कर की आपूर्ति नहीं हो पाई थी। इसी वजह से अक्टूबर में राशन दुकानों के लिए आवंटन जारी नहीं किया जा सका। त्योहार के ठीक पहले जरूरी खाद्य सामग्री की आपूर्ति में आई इस बाधा से हितग्राही काफी परेशान हैं। हैरानी की बात यह है कि सहकारी शक्कर कारखानों से आपूर्ति क्यों प्रभावित हुई, इसकी वजह खाद्य विभाग और नागरिक आपूर्ति निगम के अधिकारी भी स्पष्ट नहीं कर पा रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि कारखाने से शक्कर मिलते ही दुकानों में भंडारण करा दिया जाएगा।
अक्टूबर का कोटा अटका,नवंबर में दो महीने की शक्कर मिलने की उम्मीद
खाद्य विभाग ने सितंबर में खाद्यान्न नहीं ले पाने वाले हितग्राहियों के लिए 15 अक्टूबर तक वितरण का आदेश दिया था। इस दौरान कई हितग्राहियों को सितंबर के बचे राशन के साथ शक्कर भी मिली, लेकिन अक्टूबर के कोटे की शक्कर किसी को नहीं मिल रही है। कुछ राशन दुकान संचालकों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि उन्हें पहले ही सूचना दे दी गई थी कि अक्टूबर में शक्कर का भंडारण नहीं होगा। विभागीय सूत्रों के अनुसार, अगर अक्टूबर में वितरण नहीं हुआ तो नवंबर में दो महीने की शक्कर एक साथ दी जा सकती है, हालांकि इस पर अभी तक कोई आधिकारिक निर्देश जारी नहीं हुआ है।
शक्कर नहीं सरकार का इकबाल खत्म हो चुका-कांग्रेस
पीडीएस राशन दुकानों में शक्कर की अनुपलब्धता को लेकर सवाल उठाते हुए प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि राशन दुकानों से शक्कर ही गायब नहीं हुए इस सरकार का इकबाल खत्म हो चुका, जनता का राशन भ्रष्टाचार की भेट चढ़ गया है, अधिकारी बेलगाम हो गए हैं, छत्तीसगढ़ की जनता त्रस्त है। जिस प्रदेश में गन्ने की भरपूर खेती हो रही है, सहकारी शक्कर कारखाने पर्याप्त उत्पादन कर रहे हैं, कभी मिठास की कमी नहीं होती थी, आज उस छत्तीसगढ़ की गरीब जनता को दिवाली के ठीक पहले राशन दुकानों से शक्कर के लिए तरसना पड़ रहा है। भाजपा सरकार के कुप्रबंधन और प्रशासनिक अकर्मण्यता के कारण पीडीएस का पूरा सिस्टम चरमरा गया है। आदिवासी क्षेत्रों में चान गुड़ और राशन की आपूर्ति पूरी तरह ठप है। कांग्रेस पार्टी मांग करती है कि सरकार तत्काल हर राशन कार्डधारी को शक्कर और चान गुड़ की आपूर्ति सुनिश्चित करे, अन्यथा कांग्रेस सड़क से लेकर सदन तक इस गरीब-विरोधी सरकार के खिलाफ उग्र आंदोलन करेगी।







