नई दिल्ली, मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच दुनियाभर में इसका असर नजर आने लगा है। भारत में एलपीजी सिलेंडर के संकट की खबरें सामने आई हैं। इसी बीच केंद्र सरकार ने अहम फैसला लिया है। देशभर में ESMA (आवश्यक सेवा रखरखाव अधिनियम) लागू किया गया है। सरकार ने घरेलू खाना पकाने की गैस (एलपीजी) की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक वस्तु अधिनियम (Essential Services Maintenance Act) लागू किया है। इसमें रिफाइनरी और पेट्रोकेमिकल यूनिट्स को एलपीजी का उत्पादन अधिकतम करने और प्रमुख हाइड्रोकार्बन स्रोतों को एलपीजी पूल में भेजने का निर्देश दिया है।
ESMA क्या है ?
ESMA (आवश्यक सेवा रखरखाव अधिनियम) भारतीय संसद की ओर से 1968 में पारित एक एक्ट है। इसका उद्देश्य कुछ ऐसी सेवाओं की आपूर्ति सुनिश्चित करना है, जिनमें बाधा आने से लोगों के दैनिक जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। यह अधिनियम में हड़ताली कर्मचारियों को कुछ आवश्यक सेवाओं में काम करने से इनकार करने पर रोकता है। कर्मचारी बंद या कर्फ्यू को काम पर न आने का बहाना नहीं बना सकते। इसका मुख्य उद्देश्य स्वास्थ्य, परिवहन और बिजली जैसी जरूरी सेवाओं में हड़ताल को रोकना है। इससे आम जनता का जीवन प्रभावित न हो। इसे अधिकतम 6 महीने के लिए लागू किया जा सकता है।

इस श्रेणी में कौन सी सेवाएं आती हैं?
- सार्वजनिक संरक्षण, स्वच्छता, जल आपूर्ति, अस्पताल या राष्ट्रीय रक्षा से संबंधित सेवाएं आवश्यक हैं।
- पेट्रोलियम, कोयला, बिजली, इस्पात या उर्वरक के उत्पादन, वितरण या आपूर्ति में शामिल कोई भी प्रतिष्ठान भी आवश्यक सेवाओं की श्रेणी में आता है।
- इसके अलावा, बैंकिंग से संबंधित कोई भी सेवा ESMA के दायरे में आ सकती है।
- यह अधिनियम संचार और परिवहन सेवाओं और खाद्यान्न की खरीद और वितरण से संबंधित किसी भी सरकारी पहल पर भी लागू होता है।
- राज्य सरकारें, अकेले या अन्य राज्य सरकारों के सहयोग से, तय क्षेत्रों में अपने-अपने अधिनियमों को लागू कर सकती हैं।
- ESMA को अधिकतम 6 महीने के लिए लागू किया जा सकता है।
सरकार ने अचानक नहीं लिया ESMA का फैसला
सरकार ने देशभर में ESMA लगाने का फैसला अचानक नहीं लिया है। जिस तरह से ईरान पर इजराइल और अमेरिका ने हमला किया और दोनों पक्षों के बीच सैन्य संघर्ष को 10 दिन से ज्यादा हो चुके हैं। इसका असर दुनियाभर के देशों में दिख रहा है। वैश्विक अस्थिरता के समय में दुनिया में बढ़ती प्राकृतिक गैस की कीमतों के बीच केंद्र सरकार लगातार बड़े फैसले ले रहे हैं। इसमें एलपीजी सिलेंडर बुकिंग की अवधि को 21 दिन से बढ़ाकर 25 दिन कर दिया। इसकी वजह जमाखोरी को रोकना है। इसी के बाद देशभर में ESMA का फैसला लिया गया।
एलपीजी संकट के बीच एक्शन में सरकार
अमेरिका, इजरायल- ईरान युद्ध के कारण उत्पन्न अनिश्चितताओं के बीच बाजार में घबराहट में खरीदारी के संकेत मिलने के बाद केंद्र जरूरी कदम उठा रही है। सरकारी अधिकारियों ने बताया कि देश में एलपीजी की पर्याप्त आपूर्ति उपलब्ध है और स्टॉक को प्रभावी ढंग से प्रबंधित करने के उपाय के रूप में एलपीजी सिलेंडरों की बुकिंग का समय बढ़ा दिया गया है।
अधिकारियों ने क्या बताया
अधिकारी ने बताया कि यह कदम इसलिए उठाया गया है क्योंकि मध्यपूर्व में बढते युद्धा के कारण आपूर्ति बाधित होने की आशंका से बुकिंग बढ़ने से मांग में 15 से 20 फीसदी की वृद्धि हुई थी। औसतन परिवार एक वर्ष में 14.2 किलोग्राम के 7-8 एलपीजी सिलेंडर का उपयोग करते हैं और सामान्यतः उन्हें 6 सप्ताह से कम समय में सिलेंडर रिफिल कराने की आवश्यकता नहीं होती है।
पेट्रोल-डीजल को लेकर ये बोले अधिकारी
वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की दरें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर होने के बावजूद फिलहाल पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि नहीं की जाएगी। इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी तेल विपणन कंपनियां फिलहाल मौजूदा लागत दबाव को वहन करेंगी। सरकार वैश्विक तेल बाजारों पर कड़ी नजर रख रही है, लेकिन फिलहाल खुदरा ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी की कोई योजना नहीं है।
कितने दिन है कच्चे तेल के भंडारण की क्षमता
इसके अतिरिक्त, केंद्र ने सोमवार को संसद को सूचित किया गया कि भारत के पास वर्तमान में कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों के भंडारण की कुल 74 दिनों की क्षमता है, जो भू-राजनीतिक संघर्ष जैसी प्रतिकूल परिस्थितियों में आपूर्ति में होने वाली रुकावटों से निपटने में सहायक हो सकती है।





