रायपुर, छत्तीसगढ़ राज्य के पूर्ववर्ती दोनों सरकारों ने दिवंगत शासकीय सेवकों के आश्रितों को अनुकंपा नियुक्ति न देकर बार-बार नियम कानून में संशोधन कर आश्रित परिजनों को सड़क पर ला दिया। वहीं दूसरी ओर राजनीतिक अनुकंपा नियुक्ति निरंतर जारी है। कर्मचारी नेता विजय कुमार झा ने कहा है कि देश में या प्रदेश में कोई राजनीतिक नेता का निधन होता है तो तत्काल उसके परिवार को अनुकंपा नियुक्ति तुरंत विधानसभा लोकसभा राज्यसभा का टिकट देकर उपकृत किया जाता है। वही लिपिक, शिक्षक, भृत्य जैसे छोटे पदों पर दिवंगत शासकीय सेवकों के परिजनों को अनुकंपा न देकर उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है।
श्री झा ने कहा है कि अभी वर्तमान में महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री श्री अजीत पवार के विमान दुर्घटना के तीन दिन के अंदर उनकी पत्नी को अनुकंपा नियुक्ति मिल गई और वह उप मुख्यमंत्री बन गई। उनका तेरेही कार्यक्रम भी संपन्न नहीं हुआ था। श्री नरेंद्र मोदी जी का एक देश एक कानून एक संविधान एक चुनाव क्या दिवंगत के लिए लागू नहीं होता है। लिपिक, चतुर्थ श्रेणी के पदों पर अनुकंपा नियुक्ति मिलती थी उसे 10% का सीमा बंधन कर दिया गया है। क्या प्रधानमंत्री जन प्रतिनिधियों के दिवंगत होने पर पूरे देश में 5% लोगों को ही अनुकंपा नियुक्ति देने के निर्णय लेने की साहस कर सकते हैं, कि विभाग से कलेक्टर, कलेक्टर से अन्य जिलों में अनुकंपा नियुक्ति के लोग भटक को तरस रहे हैं तत्काल अनुकंपा नियुक्ति नियम में संशोधन किया जाए तथा पदों पर 10% सीमा बंधन को समाप्त किया जाए। महिला आरक्षण बिल से ज्यादा जरूरी दिवंगतों के घरों में अंंधेरा दूर कर दीप जलाने की आवश्यकता है। श्री झा ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से मांग की है कि धर्म स्वतंत्र, महिला आरक्षण बिल में जो साहस प्रगट किया गया है वही साहस दिवंगत शासकीय सेवकों के अनुकंपा नियुक्ति के प्रकरण में मुख्यमंत्री करें.





