पाकिस्तानियों पर 50 हजार ब्रिटिश लड़कियों के शोषण का आरोप; ग्रूमिंग गैंग के लिए ऋषि सुनक को बनानी पड़ी टास्क फोर्स?

लंदन, एजेंसी , 16 साल की लूसी लोव अपने ही घर में मां और बहन के साथ मृत पाई गई। घर में लगी आग में तीनों झुलस गए। लूसी इस दौरान दूसरी बार प्रेग्नेंट थी। इन्वेस्टिगेशन में पता चला कि इस नाबालिग को प्रेग्नेंट करने वाला अजहर अली महमूद है और उसी ने लूसी के घर पर आग लगाई थी।

लूसी केस के बाद वेस्ट मरसिया पुलिस ने जब ऑपरेशन चैलिस चलाया तो उन्हें पता चला कि वो एक सोची-समझी साजिश का शिकार हुई थी। ऐसी हजारों लड़कियों को साजिश के तहत प्रेम के जाल में फंसाकर शारीरिक और मानसिक शोषण किया गया है। ऐसा करने वाले लोगों के लिए ब्रिटेन में एक चर्चित फ्रेज इस्तेमाल किया जाता है- ग्रूमिंग गैंग।

अब ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने इन पर कार्रवाई करने के लिए ग्रूमिंग गैंग टास्क फोर्स बनाने की घोषणा की है। इससे पहले गृहमंत्री सुएला ब्रेवरमैन भी ग्रूमिंग गैंग पर गंभीर इल्जाम लगा चुकी हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह की गैंग्स में शामिल सभी पुरुष ब्रिटिश पाकिस्तानी हैं। ये जानबूझकर छोटी लड़कियों को अपने प्रेम के जाल में फंसाते हैं और फिर डरा-धमका कर उनका शोषण करते हैं।

ब्रिटेन में ग्रूमिंग गैंग्स का मतलब उन लोगों के ग्रुप से है जो बच्चों का शारीरिक, मानसिक और यौन शोषण करते हैं। इनमें ज्यादातर कम उम्र की लड़कियां होती हैं। ये अपनी बातों में फंसाते हैं, उन्हें विश्वास दिलाते हैं कि वे उनके दोस्त हैं। जब बच्चे उन पर विश्वास करने लगते हैं तो उन पर दबाव बनाकर, डरा-धमका कर काबू में रखते हैं और उनका फायदा उठाते हैं।

ब्रिटेन के एक NGO चिल्ड्रंस सोसाइटी ने ‘ओल्ड इनफ टु नो बेटर’ नाम से एक रिपोर्ट जारी की। इसमें बताया गया कि 16-17 साल की करीब 50,000 लड़कियां ग्रूमिंग गैंग्स के शोषण का शिकार हुईं। इनमें से केवल 5,000 लड़कियों ने ही पुलिस में इसकी शिकायत की।

2017 में ब्रिटेन के थिंक टैंक क्विलियम फाउंडेशन ने भी इस मामले में एक रिपोर्ट जारी की थी। इसमें दावा किया गया था कि ग्रूमिंग गैंग के 84% अपराधी एशियाई मूल के होते हैं, इनमें से भी ज्यादातर पाकिस्तानी मूल के ब्रिटिश नागरिक।

कैसे काम करते हैं ग्रूमिंग गैंग्स?

ब्रिटेन के एक राज्य वेस्ट यॉर्कशायर में इन गैंग्स पर केस हुआ और 20 आरोपियों को सजा हुई। इस केस में सामने आया कि ग्रूमिंग गैंग्स छोटी और कमजोर लड़कियों को अपना निशाना बनाते हैं। उन्हें गिफ्ट्स देकर बहलाते हैं और स्पेशल महसूस कराकर उनसे रिश्ता कायम करते हैं। वे विश्वास दिलाते हैं कि उनसे प्यार करते हैं, उनकी चिंता करते हैं। जब लड़कियां इन पर विश्वास करने लगतीं हैं तो ये धीरे-धीरे उन्हें शोषण के जाल में फंसाते हैं।

इन लड़कियों को पार्टियों में ले जाया जाता है, शराब और ड्रग्स दिए जाते हैं। फिर इनसे उम्र में बड़े लड़कों और आदमियों के साथ संबंध बनाने के लिए मजबूर किया जाता। उन्हें शराब, गांजे और बाकी ड्रग्स की लत लगाई जाती है, ताकि वे नशे में रहें और गैंग मैंबर्स की हर बात मानती रहें। ये लड़कियां समझ ही नहीं पातीं कि उनका यौन शोषण हो रहा है। इनमें से कई लड़कियां मानव तस्करी का भी शिकार हुईं।

BBC के मुताबिक, ग्रूमिंग गैंग्स के जाल में फंसी लड़कियां नाबालिग थीं, कई की उम्र तो महज 11 साल ही थी। गैंग मेंबर्स उन्हें काबू में रखने के लिए मार-पीट करते। उन्होंने एक लड़की के घर पर बम फेंकने तक की धमकी दी। लड़कियों ने कोर्ट में बताया कि इन्हें कार, पार्क, स्नूकर क्लब्स और कबाब हाउसेस ले जाया गया। यहां इन्हें जबरदस्ती किसी के साथ और कई बार एक से ज्यादा लोगों के साथ संबंध बनाने के लिए मजबूर किया गया।

इनमें से कई लड़कियां प्रेग्नेंट हुईं और उन्हें अबॉर्शन कराना पड़ा। कई लड़कियों ने अपने बच्चों को जन्म दिया, लेकिन वो इनके पिता का नाम तक नहीं जानती थीं। ये ग्रूमिंग गैंग्स पूरे ब्रिटेन में काम करते थे, लेकिन रोशडेल, रॉदरहैम और टेलफॉर्ड राज्यों में इन्होंने सबसे ज्यादा लड़कियों को फंसाया।

ग्रूमिंग गैंग्स किन्हें अपना टारगेट बनाते हैं?

ग्रूमिंग गैंग्स ने ऐसी लड़कियों को टारगेट किया जो अकेली हों, जिन्हें स्कूल में बुली किया जाता हो, जो मानसिक रूप से कमजोर हों। इन लड़कियों को अपने जाल में फंसाना आसान है। जब तक वे समझ पातीं कि उनका शोषण हो रहा है तब तक बहुत देर हो चुकी होती है। कई बार तो लड़कियां ये समझ ही नहीं पाईं कि उनका शोषण हुआ या हो रहा है।

ग्रूमिंग गैंग्स के चंगुल से क्यों नहीं निकल पातीं लड़कियां?

जब ये मुकदमा कोर्ट पहुंचा तो कई लड़कियों ने बताया कि वे यही समझती रहीं कि वे एक असली रिलेशनशिप में हैं। उनका दिमाग इस तरह से ब्रेनवाश किया गया कि वे अपने साथ हो रहे शोषण को समझ ही नहीं पाईं।

एक लड़की ने कहा कि, ‘मुझे लगता है कि जब आप छोटे होते हैं और आपको स्कूल में बुली किया जाता है, कोई आपको थोड़ी भी अटेंशन दे तो वो आपको पसंद आता है। कोई आपकी मदद करे या आपको कोई तोहफा दे, आपको ये सब पसंद आता है। लेकिन जैसे ही आप उनके साथ रिश्ते में आते हैं आप उससे बाहर नहीं आ सकते।’ एक और लड़की ने बताया कि उन लोगों ने मुझे डराया। उन्होंने कहा कि, ‘मैं तुम्हें लेने आ रहा हूं और अगर तुम नहीं आईं तो मैं तुम्हारी मां को उठा लूंगा।’

इतने सालों तक कैसे बचते रहे ग्रूमिंग गैंग्स?

लड़कियों और उनके घरवालों ने इन मामलों की शिकायत पुलिस में की, लेकिन पुलिस ने इन पर कोई कार्रवाई नहीं की। पुलिस और सरकारी अधिकारी नस्लभेद के आरोप लगने के डर से ग्रूमिंग गैंग्स के अपराधों को नजरअंदाज करते रहे। कोर्ट ने भी नवंबर 2017 में इन मामलों की सुनवाई की रिपोर्टिंग पर रोक लगा दी थी। इसे बाद में मीडिया की शिकायत के बाद हटा दिया गया।

ब्रिटेन की अलग-अलग मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक वेस्ट यॉर्कशायर के एक शहर हडर्सफील्ड में एक 13 साल की लड़की पुलिस को कटे-फटे कपड़े पहने मिली। पड़ोसी ने लड़की की चीख सुनकर पुलिस को कॉल किया था। सुबह का समय था, लड़कों का ग्रुप और वो अकेली लड़की। उसे वोडका पिलाई गई थी। पुलिस ने इन लड़कों से कोई पूछताछ नहीं की बल्कि लड़की को शराब पीने और माहौल खराब करने के जुर्म में गिरफ्तार कर लिया।

हडर्सफील्ड में ही एक और 12 साल की लड़की, 22 साल के एक पुरुष के साथ कार में शराब के नशे में मिली। लड़की की चीख सुनकर पुलिस उन तक पहुंची थीं। इस आदमी के मोबाइल फोन में लड़की की अश्लील तस्वीरें थीं, लेकिन उससे कोई पूछताछ नहीं हुई।

ग्रूमिंग गैंग्स ऐसा करते क्यों हैं?

ग्रूमिंग गैंग्स का कोई साफ और इकलौता मोटो नहीं पता चलता। उनके काम के पैटर्न से ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि कम उम्र की ब्रिटिश लड़कियों को फंसाकर वो पैसे की उगाही करते हैं। यौन शोषण करते हैं और प्रॉस्टिट्यूशन में धकेलते हैं। उनके अश्लील वीडियो बनाकर ब्लेकमैल करती हैं। कई मामलों में इन लड़कियों की तस्करी के मामले भी सामने आए हैं। पीड़िता डॉ. एला हिल ने एक इंटरव्यू में बताया कि ग्रूमिंग गैंग जातीय और धार्मिक आधार पर रेप करते हैं।

केवल एक राज्य में 120 अपराध; 221 सालों की सजा

2004 से 2011 के बीच वेस्ट यॉर्कशायर के हडर्सफील्ड में ग्रूमिंग गैंग के अपराधों पर कोर्ट ने सुनवाई की। पहली बार ग्रूमिंग गैंग्स के मामले में 41 लोगों को सजा सुनाई गई। इसे ऑपरेशन टेंडरसी कहा गया।

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