16 साल बाद जेल से बेदाग रिहा हुआ सेंट्रल कमेटी का सचिव खूंखार नक्सली गोपन्ना; एक भी आरोप सिद्ध नहीं

जगदलपुर, किसी समय छत्तीसगढ़ पुलिस की मोस्ट वांटेड लिस्ट में शामिल रहे गजराला सत्यनारायण रेड्डी उर्फ गोपन्ना की जेल से रिहाई हो गई है। पुलिस ने साल 2006 में गोपन्ना को पकड़ा था। इस पर 18 से ज्यादा मामले दर्ज थे। लेकिन, इतने सालों में पुलिस एक भी मामला सिद्ध नहीं कर पाई। शनिवार की शाम इसे जेल से रिहा कर दिया गया। रिहाई के बाद वह अपने घर तेलंगाना लौट गया है। पुलिस ने बताया था कि गोपन्ना छत्तीसगढ़-ओडिशा बॉर्डर जोनल कमेटी का सचिव तथा केंद्रीय कमेटी का सदस्य था। इसके पहले 1 अक्टूबर 2014 को भी वह जेल से रिहा हुआ था लेकिन वारंट के जरिये पुलिस ने फिर उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।

दरअसल, 2006 में पुलिस ने रायपुर के नजदीक गरियाबंद जिले से गोपन्ना की गिरफ्तरी की थी। पुलिस ने उसे तस्कर समझकर गिरफ्तार किया था। लेकिन बाद में जब पुलिस ने उसकी फाइल खंगाली तो उसकी पहचान नक्सलियों की छत्तीसगढ़-ओडिशा बॉर्डर जोनल कमेटी का सचिव और केंद्रीय कमेटी का सदस्य के रूप में हुई। बाद में उसकी पहचान नक्सली नेता गोपन्ना मरकाम के रूप में हुई। उस पर 18 से अधिक मामले दर्ज थे, लेकिन पुलिस एक भी अपराध न्यायालय में प्रमाणित नही कर पाई। अपने सभी मामलों से गोपन्ना बरी होकर 25 मार्च 2023 में केंद्रीय जेल से रिहा हो गया है।

तेलंगाना का रहने वाला है गोपन्ना

गोपन्ना तेलंगाना के नलगोंडा जिले का रहने वाला है। 1980 के दशक में अपनी पढ़ाई के दौरान गोपन्ना नक्सल राजनीतिक विचारधारा से प्रेरित हुआ। इसके बाद वह लंबे समय तक अपने परिवार के संपर्क से दूर छत्तीसगढ़ में गुमनाम जिंदगी जीता रहा। सबसे पहले जगरगुंडा इलाके में गोपन्ना की मौजूदगी और नक्सल संगठन में होने को लेकर पुलिस ने FIR दर्ज की।

इसके बाद से गोपन्ना मोस्टवांटेड सूची में आया। इस पर 18 से अधिक मामले दंतेवाड़ा, बीजापुर वर्तमान में सुकमा जिले में दर्ज किए गए थे। 2006 में गोपन्ना को पकड़े जाने के बाद यह बताया गया था कि गोपन्ना 1980 के बड़े माओवादी लीडर में से एक है। अब रिहाई के बाद वह अपने परिवार के पास वापस लौट गया है।

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