PASSED AWAY; पद्मश्री डॉ. सुरेंद्र दुबे का निधन, कल होगा अंतिम संस्कार…

रायपुर, छत्तीसगढ़ के सुप्रसिद्ध हास्य कवि, व्यंग्यकार और पद्मश्री सम्मान से सम्मानित डॉ. सुरेंद्र दुबे का सोमवार को निधन हो गया। 72 वर्षीय डॉ. दुबे को दिल का दौरा पड़ने के बाद रायपुर के एडवांस कार्डियक इंस्टीट्यूट (ACI) में भर्ती कराया गया था, जहां उपचार के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर सामने आने के बाद न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई है।

मेकाहारा में उनका इलाज कर रहे वरिष्ठ हार्ट सर्जन डॉ स्मित श्रीवास्तव ने बताया कि अटैक के बाद उन्हें कल सुबह मेकाहारा लाया गया था, इसके बाद एक के बाद एक आए तीन कार्डिएक अरेस्ट से उनका निधन हो गया. वरिष्ठ हार्ट सर्जन डॉ स्मित श्रीवास्तव ने मीडिया से चर्चा में बताया कि गुरुवार सुबह 3-4 बजे के करीब उन्हें (मेकाहारा में) लाया गया था. एक्यूट हार्ट अटैक था. मुख्य नस सौ प्रतिशत बंद थी, वहीं दूसरी नस 90 प्रतिशत बंद थी. मुख्य नस की एंजियोप्लास्टी सफल रही. उसके बाद वे ठीक थे.

डॉक्टर ने बताया कि आईसीयू में उन्हें विचलित देख आज सुबह वार्ड में शिफ्ट किया गया, ताकि वे परिवार वालों के बीच सहज महसूस करेंगे. लेकिन वार्ड में भी वे विचलित रहे. छटपटाहट के बाद तनाव महसूस किया और गिर गए, जिसके बाद में उन्हें फिर से रिवाइव किया गया. लेकिन फिर से कार्डियक अरेस्ट हुआ, और करीब चार बजे उनका निधन हो गया.

साल 2018 में उड़ी थी मौत की झूठी खबर

बता दें कि साल 2018 में राजस्थान के एक कवि जिनका नाम सुरेंद्र दुबे ही था, उनका निधन हो गया था. उस समय इंटरनेट पर छत्तीसगढ़ के सुरेंद्र दुबे के मौत की खबर फैल गई थी. इस घटना पर छत्तीसगढ़ के कवि सुरेंद्र दुबे ने एक कविता बनाई थी, जिसे वे अक्सर मंचों पर सुनाया करते थे.

कल होगा अंतिम संस्कार

डॉ. सुरेंद्र दुबे का अंतिम संस्कार शुक्रवार को रायपुर के देवेंद्र नगर स्थित श्मशान घाट में किया जाएगा. आज उनके पार्थिव शरीर को उनके अशोका रत्न स्थित निवास में रखा जाएगा. इस दौरान प्रसिद्ध कवि कुमार विश्वास के अलावा देश के अन्य बड़े कवि भी शामिल होंगे

डॉ. सुरेंद्र दुबे केवल कवि ही नहीं, बल्कि एक प्रख्यात आयुर्वेदिक चिकित्सक, समाजसुधारक और राजनीतिक विचारक भी थे। उन्होंने हास्य के माध्यम से व्यंग्य की धार को मंचों से लेकर टीवी तक पहुँचाया।

2010 में मिला था पद्मश्री, अमेरिका में भी दी प्रस्तुति

डॉ. सुरेंद्र दुबे का जन्म 8 जनवरी 1953 को बेमेतरा, छत्तीसगढ़ में हुआ था। उन्होंने जीवनभर हास्य को सामाजिक संवाद का माध्यम बनाया। उनकी पांच किताबें प्रकाशित हुईं और वे भारत ही नहीं बल्कि अमेरिका, कनाडा जैसे देशों में भी काव्यपाठ कर चुके थे।वर्ष 2010 में भारत सरकार ने उन्हें देश के चौथे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्मश्री से सम्मानित किया था। इसके अलावा, उन्हें ‘छत्तीसगढ़ रत्न सम्मान’ से भी नवाज़ा गया, जो शिकागो (अमेरिका) में नॉर्थ अमेरिका छत्तीसगढ़ एसोसिएशन (NACHA) द्वारा प्रदान किया गया था।

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