भुबनेश्वर, ओडिशा में राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। भारतीय जनता पार्टी ने मंगलवार को राज्य से राज्यसभा की दो सीटों के लिए प्रदेश अध्यक्ष मनमोहन सामल और निवर्तमान सांसद सुजीत कुमार को उम्मीदवार घोषित किया है। सामल तटीय ओडिशा से आते हैं, जबकि सुजीत कुमार कालाहांडी जिले का प्रतिनिधित्व करते हैं। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, भाजपा का यह निर्णय संगठनात्मक मजबूती के साथ क्षेत्रीय संतुलन साधने की रणनीति का हिस्सा है।
67 वर्षीय मनमोहन सामल 24 मार्च 2023 से ओडिशा भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष हैं। इससे पूर्व वे 1999 से 2004 तक भी इस पद पर रह चुके हैं। वर्ष 2024 के विधानसभा चुनाव में राज्य में पहली बार भाजपा को सत्ता तक पहुंचाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती है। हालांकि, वे स्वयं चांदबली विधानसभा सीट से बीजू जनता दल (बीजद) के उम्मीदवार ब्योमकेश राय से 1,916 मतों से पराजित हो गए थे।

वहीं 50 वर्षीय सुजीत कुमार ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत बीजू जनता दल से की थी। वे 2020 में पहली बार राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए थे। सितंबर 2024 में उन्होंने बीजद छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया और दिसंबर 2024 में भाजपा के टिकट पर निर्विरोध राज्यसभा सदस्य चुने गए।
चार सीटें हो रही हैं रिक्त
ओडिशा से राज्यसभा की चार सीटें 2 अप्रैल को रिक्त हो रही हैं। इनमें दो सीटें बीजद के निरंजन बिशी और मुन्ना खान की हैं, जबकि दो सीटें भाजपा के सुजीत कुमार और ममता मोहंता की हैं। दो दिन पहले बीजद ने संतृप्त मिश्र और डॉ. दत्तेश्वर होता को अपना उम्मीदवार घोषित किया है। बीजद अपने दम पर केवल एक उम्मीदवार की जीत सुनिश्चित कर सकती है। डॉ. होता को जिताने के लिए उसे अन्य दलों के समर्थन की आवश्यकता होगी। कांग्रेस ने डॉ. होता को समर्थन देने की घोषणा की है, जबकि भाकपा (माकपा) के रुख पर भी नजर बनी हुई है।
विधानसभा में संख्या बल
147 सदस्यीय ओडिशा विधानसभा में भाजपा के पास 79 विधायक हैं और तीन निर्दलीय सदस्यों का समर्थन प्राप्त है, जिससे उसका प्रभावी संख्या बल 82 हो जाता है। बीजद के दो विधायकों के निलंबन के बाद उसकी संख्या 48 रह गई है। कांग्रेस के पास 14 विधायक हैं, जबकि भाकपा (माकपा) का एक सदस्य है। संख्या बल के आधार पर भाजपा दो सीटें आसानी से जीतने की स्थिति में है। दो सीटें जीतने के बाद उसके पास लगभग 22 अतिरिक्त मत बचेंगे, जो तीसरी सीट के लिए आवश्यक संख्या से आठ कम हैं। दूसरी ओर, बीजद एक सीट जीतने के बाद 19 अतिरिक्त मतों के साथ बचेगी। कांग्रेस और वाम दलों के समर्थन से तीसरी सीट पर मुकाबला रोचक होने की संभावना जताई जा रही है। राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 5 मार्च निर्धारित की गई है। अब राजनीतिक दलों की रणनीति और संभावित क्रॉस वोटिंग पर सबकी निगाहें टिकी हैं।





