बिलासपुर, सक्ती के जिला कलेक्टर अमृत विकास तोपनों ने विकासखंड जैजैपुर अंतर्गत ग्राम पंचायत हसौद में 10 वर्षीय बालक की हुई असामयिक मृत्यु की घटना के संज्ञान में आते ही तत्काल जांच कमेटी गठित करने के निर्देश स्वास्थ्य विभाग को दिए है। कलेक्टर के निर्देशानुसार मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. पूजा अग्रवाल द्वारा गठित जांच कमेटी उक्त मामले की तथ्यात्मक, निष्पक्ष एवं विस्तृत जांच सुनिश्चत करेगी।
कलेक्टर अमृत विकास तोपनों ने इस दु:खद घटना पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा कि घटना से जुड़े सभी पहलुओं की गहन जांच कर वास्तविक तथ्यों को सामने लाना जिला प्रशासन की प्राथमिकता में है, ताकि स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सके और इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोका जा सके। कलेक्टर ने कहा कि लोगों के जीवन से जुड़े मामलों में संवेदनशीलता एवं जिम्मेदारी अत्यंत आवश्यक है। जिला प्रशासन इस प्रकरण को पूरी गंभीरता से देख रहा है तथा यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि जांच प्रक्रिया पूर्णतः पारदर्शी एवं निष्पक्ष तरीके से संपन्न हो।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ पूजा अग्रवाल से प्राप्त जानकारी अनुसार मामले की जांच के लिए गठित समिति में जिला स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण अधिकारी डॉ. पी. सिंह कंवर, शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. आर.के. राज, जिला नोडल अधिकारी नर्सिंग होम एक्ट डॉ. सुदर्शन भारद्वाज, खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. उमाशंकर साहू तथा सहायक ग्रेड-03 धनश्याम सुमन को शामिल किया गया है। समिति को निर्देशित किया गया है कि वह पूरे घटनाक्रम की बारीकी से जांच कर अपनी जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करे। सीएमएचओ डॉ. पूजा अग्रवाल ने बताया कि जांच के दौरान घटना से जुड़े सभी पहलुओं, उपचार प्रक्रिया, संबंधित परिस्थितियों तथा उपलब्ध तथ्यों का समग्र रूप से परीक्षण किया जाएगा। समिति द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट के आधार पर आगे की आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
बालक की निजी अस्पताल में मौत
सक्ती जिले के हसौद में गलत इलाज व इंजेक्शन लगाने से 8 वर्षीय करण यादव की मौत हो गई। घटना मंगलवार सुबह करीब 3 बजे की है ,जानकारी के अनुसार हसौद निवासी रामरतन यादव के बेटे करण को सोमवार रात में करीब 8 बजे पेट में तेज दर्द हुआ। दर्द होने के बाद दवाई खिलाने के बाद उसे हसौद के निजी अस्पताल माँ महामाया में लेकर पहुंचे, वहाँ पहुंचने के बाद रात में उसे इलाज के लिए भर्ती किया गया था और करीब चार से पांच घण्टे के बीच वहाँ भर्ती कर अस्पताल में ईलाज किया गया जिसके बाद उसकी अस्पताल में ही मौत हो गई थी मगर अस्पताल पर किसी भी तरह की आंच न आए और न किसी को भनक लगे सोंचकर अस्पताल से बच्चे की हालात गंभीर है कहकर रेफर करने का प्रयास किया गया।





