काठमांडू, नेपाल की राजनीति में बड़ा भूचाल आ गया है. पूर्व प्रधानमंत्री के पी शर्मा ओली और नेपाली कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व पूर्व गृहमंत्री रमेश लेखक को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है. दोनों पर सितंबर में हुए Gen-Z प्रदर्शनों को दबाने से जुड़े आपराधिक लापरवाही के मामले में कार्रवाई की गई है. शुक्रवार को बालेन शाह के प्रधानमंत्री पद संभालने के बाद यह पहला बड़ा एक्शन है. केपी ओली की गिरफ्तारी चीन को भी परेशान करने वाली खबर है, क्योंकि ओली का झुकाव चीन की ओर रहा है.

क्या बालेन शाह ने कराई गिरफ्तारी?
यह कार्रवाई ऐसे समय में की गई है जब शुक्रवार को ही बालेन शाह ने प्रधानमंत्री की शपथ ली है. एक दिन बाद ही यह एक्शन हो गया है. हालांकि बालेन शाह के सत्ता में आने से पहले ही उनके खिलाफ एक्शन की सिफारिश की गई थी. यह गिरफ्तारी पहले ही गृह मंत्रालय की ओर से दर्ज कराई गई औपचारिक शिकायत के बाद हुई है. इसी शिकायत के आधार पर जांच शुरू हुई और फिर अदालत से गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह कदम एक विशेष आयोग की सिफारिशों को लागू करने के लिए उठाया गया है.
10 साल तक की सजा का प्रावधान
काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक यह आयोग पूर्व विशेष अदालत के जज गौरी बहादुर कार्की की अध्यक्षता में बनाया गया था. आयोग ने अपनी रिपोर्ट में ओली, रमेश लेखक और तत्कालीन पुलिस प्रमुख चंद्र कुबेर खापुंग पर राष्ट्रीय दंड संहिता की धारा 181 और 182 के तहत केस चलाने की सिफारिश की है. इन धाराओं के तहत दोषी पाए जाने पर अधिकतम 10 साल तक की सजा हो सकती है.
गिरफ्तारी से पहले हाई लेवल मीटिंग
सितंबर 2025 में जेन-Z युवाओं ने सोशल मीडिया बैन के खिलाफ प्रदर्शन किया था. बाद में यह प्रदर्शन उग्र हो गया. कुल 77 लोगों की मौत हो गई थी. जिसके बाद युवा इतने भड़क गए कि उन्होंने पूरी सरकार को ही उखाड़ फेंका. मंत्रियों को हेलीकॉप्टर से निकालना पड़ा. संसद जलाई गई. इसके अलावा सरकारी और निजी संपत्ति को भी अरबों का नुकसान पहुंचा था. गिरफ्तारी से पहले शुक्रवार देर रात तक सरकार और सुरक्षा एजेंसियों के बीच लगातार बैठकें चलती रहीं. गृह मंत्री सुदन गुरूंग ने सुरक्षा प्रमुखों के साथ लंबी चर्चा की. वहीं गृह सचिव और कानून सचिव भी पुलिस मुख्यालय पहुंचे थे, जहां आगे की कार्रवाई को लेकर अंतिम मंजूरी दी गई. बालेन शाह की अगुवाई वाली सरकार ने शुक्रवार को कैबिनेट बैठक में आयोग की रिपोर्ट लागू करने का फैसला लिया था. इसके बाद ही इन हाई-प्रोफाइल गिरफ्तारियों का रास्ता साफ हुआ.
इन लोगों पर भी कार्रवाई की सिफारिश
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कई अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका भी संदिग्ध रही. इनमें तत्कालीन गृह सचिव गोकार्ण मणि दवाड़ी, आर्म्ड पुलिस फोर्स के प्रमुख राजू अर्याल, राष्ट्रीय जांच विभाग के पूर्व प्रमुख हुतराज थापा और काठमांडू के तत्कालीन सीडीओ छवि रिजाल के खिलाफ भी कार्रवाई की सिफारिश की गई है. आयोग ने अपनी रिपोर्ट में साफ कहा है कि प्रशासन ने पहले से मिली खुफिया जानकारी के बावजूद हालात को संभालने में लापरवाही बरती. इसी लापरवाही के कारण प्रदर्शन हिंसक हो गया और कई लोगों की जान चली गई.







