रायपुर, खेलों के माध्यम से समाज में अनुशासन, उत्तम स्वास्थ्य और राष्ट्रभक्ति की भावना जागृत करने के उद्देश्य से समर्पित अग्रणी संस्था क्रीड़ा भारती के पदाधिकारियों ने क्रीड़ा भारती के गौरवशाली इतिहास और इसके दूरदर्शी उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। क्रीड़ा भारती के संजय शर्मा ने कहा कि स्वदेशी खेलों को प्रोत्साहन देना जरुरी है तभी हमारी विरासत सुरक्षित रहेगी।
उन्होंने संस्था के लक्ष्यों को साझा करते हुए खेल संस्कृति के पुनरुद्धार पर जोर दिया। समाज में खेलों के प्रति सकारात्मक वातावरण बनाना और खेल संस्कृति को जन-जन तक पहुँचाना होगा। आधुनिक खेलों के साथ-साथ भारत के पारंपरिक और ग्रामीण खेलों को बढ़ावा देना होगा ताकि हमारी विरासत सुरक्षित रहे। देश के प्रत्येक नागरिक को स्वस्थ रखने हेतु योग का व्यापक प्रचार-प्रसार करना होगा।
पदाधिकारियों ने कहाअ कि चरित्र एवं राष्ट्र निर्माण के लिए युवाओं में खेलों के माध्यम से अनुशासन, धैर्य और अटूट राष्ट्रभक्ति की भावना विकसित करना पडेगा। स्थानीय स्तर पर खेल प्रतिभाओं को पहचानना और उन्हें उचित मंच प्रदान करना होगा।
क्रीड़ा भारती का लक्ष्य केवल खिलाड़ी तैयार करना नहीं, बल्कि ऐसे नागरिक तैयार करना है जो शारीरिक और मानसिक रूप से सुदृढ़ हों और राष्ट्र सेवा के लिए सदैव तत्पर रहें।
विदित हो कि क्रीड़ा भारती की स्थापना वर्ष 1992 में महाराष्ट्र के पुणे में हुई थी। तब से लेकर आज तक यह संस्था अपने मूल मंत्र “क्रीड़ा से निर्माण चरित्र का, चरित्र से निर्माण राष्ट्र का” को चरितार्थ करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। संस्था का मानना है कि एक स्वस्थ और अनुशासित खिलाड़ी ही एक सशक्त राष्ट्र का आधार बन सकता है।







