इस तरह से चल रहा था शराब का अवैध कारोबार; सिंडिकेट ने तीन तरीके से कमाए पैसे

रायपुर, दिल्ली की तर्ज पर छत्तीसगढ में भी अवैध शराब करोबार की जांच के साथ ईडी ने शिकंजा कसना शुरु कर दिया है। जांच इतनी बारीकी से चल रही है कि कभी बडा धमाका हो सकता है एवं बडे लोगों की गिरफ्तारी हो सकती है। क्योंकि जांच के बाद भ्रष्टाचार की परत दर परत कलई खुलती जा रही है।

बहरहाल ईडी की ओर से जारी विज्ञप्ति के अनुसार महापौर एजाज ढेबर के भाई शराब कारोबारी अनवर ढेबर की राजनीतिक और प्रशासनिक दखल के कारण उनकी पसंद के आबकारी आयुक्त और एमडी की नियुक्ति की जाती थी। उन्होंने निजी डिस्टिलर्स, एफएल-10ए लाइसेंस धारकों, आबकारी विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों, जिला स्तर के आबकारी अधिकारियों, मैन-पावर सप्लायर्स, ग्लास बाटल मेकर, होलोग्राम मेकर, कैश-कलेक्शन वेंडर आदि से लेकर शराब के कारोबार की पूरी श्रृंखला को नियंत्रित किया। ऐसा करके अधिकतम रिश्वत, कमीशन वसूला गया।

सरकार चलाती है 800 शराब दुकान

छत्तीसगढ़ में शराब की खरीदी और बिक्री पर सरकार का नियंत्रण है। सभी 800 शराब दुकानें राज्य सरकार संचालित करती है। छत्तीसगढ़ राज्य विपणन निगम लिमिटेड (सीएसएमसीएल) छत्तीसगढ़ में बेची जाने वाली सभी शराब की खरीद केंद्रीय रूप से करता है।

इस तरीके से कमाए अवैध पैसे

ईडी की जांच में पता चला कि सिंडीकेट को तीन अलग-अलग तरीकों से फायदा हो रहा था। पहला, सीएसएमसीएल की सभी खरीदी पर सिंडीकेट द्वारा 75-150 रुपये कमीशन लिया गया। दूसरा, अनवर ढेबर ने बिना हिसाब-किताब के देशी शराब बनवाकर सरकारी दुकानों के माध्यम से बेचा। इससे राजकोष में जमा किए बिना बिक्री की पूरी आय सिंडिकेट ने रख ली।

डुप्लीकेट होलोग्राम , नकली बोतलें

डुप्लीकेट होलोग्राम दिए गए। नकली बोतलें नकद में खरीदी गईं। राज्य के गोदामों से गुजरते हुए शराब को डिस्टिलर से सीधे दुकानों तक पहुंचाया जाता था। अवैध शराब बेचने के लिए मैन पावर को प्रशिक्षित किया गया था। पूरी बिक्री नकद में की गई। तीसरा, विदेशी शराब आपूर्तिकर्ताओं से एफएल-10ए लाइसेंस धारकों से कमीशन वसूला गया। ये लाइसेंस अनवर ढेबर के सहयोगियों को दिए गए थे।

ईडी ने इस तरह अनवर ढेबर को पकड़ा था

ईडी ने अनवर ढेबर के आवासीय परिसर सहित छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल और दिल्ली में 35 स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया था। हर बार वह भागने में सफल हो रहा था। अनवर को सात बार समन भेजा गया, लेकिन वे जांच में शामिल नहीं हुए। ईडी के अनुसार, वह लगातार बेनामी सिम कार्ड, इंटरनेट डोंगल का उपयोग कर रहे थे। निगरानी के बाद अनवर को रायपुर के एक होटल में पकड़ा गया, जहां वह नाम बदलकर रह रहा था।

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