
नईदिल्ली, देशभर में अवैध और जर्जर इमारतों के बढ़ते खतरे पर सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कड़ा रुख अपनाया है. अदालत ने स्पष्ट किया कि लोगों की जान जोखिम में डालने वाली इमारतों के खिलाफ अब सिर्फ नोटिस जारी करना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि उनके खिलाफ कठोर एक्शन लेना बहुत जरूरी है.कोर्ट ने संबंधित नगर निकायों और विकास प्राधिकरणों को 4 अगस्त तक कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है.
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि अवैध निर्माण और असुरक्षित भवनों के कारण लगातार हादसे हो रहे हैं, लेकिन कई स्थानों पर जिम्मेदार एजेंसियां प्रभावी कार्रवाई करने में विफल रही हैं.सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि तय समयसीमा तक कार्रवाई नहीं होती है तो संबंधित वरिष्ठ अधिकारियों को इसके परिणाम भुगतने होंगे और उन्हें व्यक्तिगत रूप से जवाबदेह माना जाएगा. मतलब साफ है कि अब इस संबंध में काम न करने वाले अधिकारी कोर्ट की रडार पर हैं.
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली, गुरुग्राम, लखनऊ, पटना और तमिलनाडु सहित कई क्षेत्रों के नगर निकायों एवं विकास प्राधिकरणों से स्थिति रिपोर्ट मांगी है. अदालत ने निर्देश दिया कि ऐसे सभी भवनों की पहचान कर उनका सर्वे कराया जाए. इसेक साथ ही जो इमारतें लोगों की सुरक्षा के लिए खतरा हैं, उनके खिलाफ कानून के मुताबिक तत्काल कार्रवाई की जाए.
जिम्मेदारी से नहीं बच सकते अधिकारी
कोर्ट ने यह भी कहा कि प्रशासनिक उदासीनता की वजह से अवैध निर्माण लगातार बढ़ते हैं और बाद में यही बड़े हादसों का कारण बनते हैं. इसलिए स्थानीय प्रशासन, नगर निगम और विकास प्राधिकरण अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकते हैं. अदालत ने दोहराया कि सार्वजनिक सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है. इसमें किसी तरह की ढिलाई स्वीकार नहीं की जाएगी.







