
रायपुर, हफ्ते में पांच दिन काम और अपनी अन्य मांगों को लेकर आज यानी शुक्रवार से बैंक कर्मियों ने देशव्यापी हड़ताल शुरू कर दी है. बैंक कर्मचारियों की इस हडताल के चलते देशभर में लगातार चार दिनों तक कई सरकारी और निजी बैंकों के कामकाज प्रभावित रह सकते हैं या बैंक बंद रह सकते हैं. इस दौरान शाखाओं में जाकर किए जाने वाले बैंक से जुड़े काम पूरी तरह ठप हो सकते हैं.

छत्तीसगढ़ में संयुक्त बैंक यूनियनों का मंच यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन्स (UFBU) आज बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों की लंबे समय से लंबित चल रही मांग को लेकर हड़ताल की जा रही है. इस दौरान बैंक अधिकारी कर्मचारी हडताल पर चले गए हैं. बैंको में आज कामकाज पूरी तरह से बंद रहा।
बैंककर्मी केवल आज ही नहीं बल्कि बैंक यूनियन 28, 29 और 30 सितंबर 2026 को एक-एक दिवसीय हड़ताल पर रहेंगे. वहीं बैंक यूनियन ने अपनी मांग 25 अक्टूबर तक पूरी नहीं हाेने पर 26 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी दी है.
5 दिवसीय बैंकिग सप्ताह लागू करने की मांग
हड़ताल का सबसे प्रमुख कारण 5 दिवसीय बैंकिंग सप्ताह को लागू करने के लिए केंद्र सरकार की तरफ से हो रही देरी है. मार्च 2024 में द्विपक्षीय समझौते में भारतीय बैंक संघ (IBA) और बैंक प्रबंधन शनिवारों को अवकाश घोषित करने को लेकर सहमति बनी थी, इसके साथ ही सोमवार से शुक्रवार को हर दिन 40 मिनट अतिरिक्त कार्य करने का भी समझौता हुआ था. इस प्रस्ताव को वित्त मंत्रालय के अनुमोद को भेजा जा चुका है, लेकिन करीब ढाई साल से अधिक का समय बीत जाने के बाद भी इसको स्वीकृति नहीं मिली है.
बैंककर्मियों के इस हड़ताल के पीछे कई कारण है, इसमें NPS के स्थान पर OPS, पेंशन अद्यतन, पेंशन पर समान DA, ग्रेच्युटी सीमा वृद्धि, सेवानिवृत्त कर्मचारियों की चिकित्सा बीमा प्रीमियम का वहन, बैंकों द्वारा किए जाने सहित कई मुद्दे लंबित और अधूरे है.
सरकार ने नहीं दिया ठोस आश्वासन
8 और 9 सितंबर को हुई मुख्य श्रम आयुक्त एवं उप मुख्य श्रम आयुक्त की मध्यस्थता वर्ता में सरकार की ओर से 5 दिवसीय बैंकिंग पर ठोस आश्वासन नहीं दिया गया था, जिसके बाद हड़ताल को टालने या खत्म करने पर सहमति नहीं बन सकी. UFBU का कहना है कि बैंक कर्मचारियों ने देशभर में कोविड काल समेत अनेक परिस्थिति में उत्कृष्ट सेवाएं दी है. बढ़ते काम और तनाव को देखते हुए कर्मचारियों की 5 दिवसीय बैंकिंग सप्ताह की मांग न्यायोचित और पूरी तरह से वैध है. UFBU का कहना है कि सरकार एवं बैंक प्रबंध के असहयोगपूर्ण रवैये के चलते ही आंदोलन और हड़ताल का रास्ता अपनाना पड़ा है.







