
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से सात किलोमीटर दूर सीरीखेड़ी गांव में गत बीती रात एक कार दुर्घटना में एक युवती की मौत हो गई। समाचार पत्र के अनुसार कार क्रमांक सीजी04NM7718 में दो युवक और दो युवती सवार थे। दोनों युवक प्राइवेट जॉब करते थे , मृत युवती अध्ययन के सिलसिले में रायपुर में रह रही थी।
स्वाभाविक रूप से दुर्घटना तब कार चालक से लापरवाही हो, लापरवाही के कई कारण होते है।पहला कारण है नशे की स्थिति में वाहन चलाना और अनियंत्रित गति से चलाना दूसरा कारण होता है अतिउत्साह में साथियों खासकर महिलाओं को दिखाना कि देखो क्या स्पीड से वाहन चलाया जाता हैं। तीसरा कारण अन्य वाहन चालकों की लापरवाही होती है।चौथा कारण मौसम होता है। सेरीखेड़ी के पास हुई दुर्घटना में पहले दो कारण ही मुख्यत: रूप से दिख रहे है क्योंकि वाहन अनियंत्रित होकर दुर्घटनाग्रस्त हुई है।
दुर्घटनाएं अक्सर पारिवारिक नुकसान करते है साथ ही संभावनाओं का अंत भी होता है।इसके अलावा एक प्रश्न चिन्ह खड़ा होता है कि क्या युवक खासकर युवतियां अपने अभिभावकों की जानकारी में पुरुष मित्रो के साथ कही भी आती जाती है?
सेरीखेड़ी के निकट हुई दुर्घटना से ये तो जरूर आशंका बलवती होती है कि दोनों युवकों ने तो तयशुदा रूप से अपने अभिभावकों को सूचना नहीं दी होगी और युवतियों ने भी परहेज रखा होगा। भला किस परिवार के युवक युवतियां रात दो बजे अपने अभिभावकों को बता कर शहर से दूर किस काम के लिए जाते है।
समाचार पत्रों के अनुसार दोनों युवक पुरानी बस्ती रायपुर और दोनों युवतियां जिसमें मृतक क्रमशः जशपुर और धमतरी की रहने वाली थी। सेट की तैयारी के लिए रायपुर में रह रही थी। ये भी मान लेना चाहिए कि दोनों युवतियां निजी मकान में किराए से रह रही होंगी क्यों हॉस्टल में तो चाहे वह सरकारी हो या निजी रात्रि में आने का अंतिम समय 10 बजे रहता है।इसके बाद अभिभावकों के फोन आने पर ही दरवाजा खुलता है।
खैर, जमाना बदल चुका है मित्रता में लिंग समानता का अर्थ बेकार हो गया है। ऐसे युवक जिनकी युवती मित्र न हो या ऐसी युवती जिसका युवक मित्र न हो अपने दोस्तों के मंडली में अंत्योदय माने जाते है। को एजुकेशन के चलते अब अभिभावक भी आपत्ति नहीं कर सकते। नए बहानो ने भी जन्म के लिया है। सहेली? के यहां नाइट स्टडी के लिए जाना, लाइब्रेरी में देर रात पढ़ाई के अलावा बर्थ डे पार्टी, वेलकम, फेयरवेल सहित न जाने कितनी पार्टियां है जिनका आड़ लेकर युवक युवतियां
अपने परिवार और खुद को धोखा देती है।सेरीखेड़ी की घटना न तो प्रथम है और न ही अंतिम भविष्य में वाहन दुर्घटनाग्रस्त होंगे।युवक युवतियां घायल होंगी, मरेंगे भी!
प्रश्न ये उठता है कि बदले वातावरण में या तो माइक्रो परिवार के अभिभावकों ने अपनी संतानों के सामने हथियार डाल दिए हैं या संतानों का हौसला इतना बढ़ गया है कि अभिभावक उनसे डरते है? इसके अलावा संतानों को रोके जाने से गंभीर दुष्परिणाम को भविष्य मानकर परिस्थियों के साथ समझौता करना बेबसी हो गई है? आज के कुछ युवक युवतियां मित्रता के नाम पर क्या क्या कर रहे है इसे जानना हो तो किसी भी होटल में दोपहर से शाम तक का नजारा देख लीजिए बहुत कुछ सच्चाई सामने आ जाएगी। आर्थिक लाभ का लालच दे ले कर मित्रता दूषित हो रही है और अंत में परिणाम भी सबको पता है।
सच्ची मित्रता में चाहे वह युवक हो या युवती अपने अभिभावकों को जानकारी देती है।कही आते जाते है तो अभिभावकों को पता होता है। अगर युवक युवतियां अपने अभिभावकों से जानकारी छिपा कर पढ़ाई के बहाना ले कर देर रात पार्टियां कर रहे है, नशा कर रहे है, विवाह से पूर्व संबंध बना रहे है तो मान कर चलिये से के जगह कोई दूसरा स्थान होगा। मृतक कोई और होंगे लेकिन दुर्घटनाएं घटेंगी ही।असहाय अभिभावक अप्रिय दुर्घटना की सूचना के लिए खुद को तैयार रखे।
स्तंभकार-संजयदुबे







