
रायपुर, जिले में प्रशासन का खौफ किस कदर खत्म हो चुका है, इसकी बानगी देखनी हो तो आरंग के कुरूद स्थित महानदी तट चले आइए। शनिवार देर रात खनिज विभाग की ‘फॉर्मेलिटी’ वाली छापामार कार्रवाई के महज़ 20 घंटे बाद ही माफिया और ग्रामीणों का सिंडिकेट रविवार शाम होते ही फिर से महानदी के सीने को चीरने उतर आया है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के स्पष्ट प्रतिबंध और जनसुनवाई में दर्ज ग्रामीणों के कड़े विरोध को ठेंगा दिखाते हुए वर्तमान में दर्जनों ट्रैक्टर और भारी मशीनें बेखौफ होकर रेत का अवैध उत्खनन कर रही हैं।
बता दें 10 अक्टूबर से महानदी के रेत घाट खुल जाएंगे । तब तक नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल का रेत खनन पर प्रतिबंध लगा हुआ है। NGT के स्पष्ट निर्देशों की अवहेलना कर चलाए जा रहे इस अवैध कारोबार से प्रतिदिन राज्य सरकार को लाखों रुपये के राजस्व का चूना लग रहा है।
जानकार सूत्रों के आनुसार शनिवार को अवैध उत्खनन की खबर सामने आने के बाद खनिज विभाग का अमला देर रात कुरूद पहुंचा था। बताया जा रहा है कि टीम के पहुंचने से पहले ही इसकी सूचना मौके पर मौजूद लोगों तक पहुंच गई। इसके बाद खनन में लगे ग्रामीण और वाहन चालक अंधेरे का फायदा उठाकर ट्रैक्टर समेत अन्य वाहनों को लेकर वहां से निकल गए।टीम के लौटने के बाद रविवार को दिनभर मौके पर खामोशी रही, लेकिन शाम ढलते ही फिर से ट्रैक्टर और मशीनें नदी तट की ओर पहुंचने लगीं। इससे शनिवार की कार्रवाई की प्रभावशीलता पर सवाल उठने लगे हैं।
जनसुनवाई में विरोध
कुरूद रेत खदान की लीज और संचालन को लेकर हुई जनसुनवाई में स्थानीय ग्रामीणों ने भी विरोध दर्ज कराया था। ग्रामीणों ने नदी और आसपास के पर्यावरण पर पड़ने वाले असर के साथ ही दुर्घटनाओं की आशंका को लेकर आपत्ति जताई थी।इसके बावजूद रेत उत्खनन जारी रहने का आरोप है। नदी तक पहुंचने वाले संकरे रास्तों पर भारी वाहनों की आवाजाही से हादसे की आशंका भी बनी हुई है।
ऐसे चलता है खेल
स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, रेत निकालने का पूरा काम एक तय तरीके से किया जा रहा है। पहले ट्रैक्टरों की मदद से नदी से रेत निकालकर किनारे किसी स्थान पर जमा की जाती है। इसके बाद दो जेसीबी मशीनों से इस रेत को हाइवा में लोड किया जाता है। बताया जा रहा है कि मौके से एक हाइवा में रेत लोड कराने के लिए करीब 15 हजार रुपए तक की रकम ली जा रही है। इस रकम को लेकर स्थानीय स्तर पर अलग-अलग दावे हैं।
महानदी की रेत की मांग
कुरूद की रेत की गुणवत्ता और मांग के चलते इसकी सप्लाई आसपास के जिलों तक होने की बात सामने आ रही है। स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, यहां से रेत रायपुर, बेमेतरा, कवर्धा और आसपास के इलाकों में भेजी जा रही है। यदि यह गतिविधि लगातार जारी है तो बड़े स्तर पर अवैध परिवहन और उत्खनन का नेटवर्क होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।







