नई दिल्ली, सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को अवलोकन किया कि बार काउंसिल धीरे-धीरे ‘पुरुषों के क्लब’ में बदल गई हैं और कहा कि उनके कार्यों पर एकाधिकार को समाप्त किया जाना चाहिए। साथ ही क्षेत्राधिकार के हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों को हर राज्य बार काउंसिल में दो सह-चयनित महिला सदस्यों की नियुक्ति करने का निर्देश दिया।
मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत और न्यायाधीशों जायमाल्या बागची और वी.मोहन की एक बेंच ने बार काउंसिल आफ इंडिया (बीसीआई) और राज्य बार काउंसिलों के चुनावों से संबंधित याचिकाओं के एक समूह की सुनवाई के दौरान यह अवलोकन किया।मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने सुनवाई के दौरान कहा, ‘बार काउंसिल पुरुषों के क्लब बन गए हैं। हम यह देख सकते हैं कि लोग इसे एकाधिकार की तरह लेते हैं। इसे पूरी तरह से समाप्त किया जाना चाहिए।’
कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि क्षेत्राधिकार के हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश हर राज्य बार काउंसिल में दो सह-चयनित महिला सदस्यों की नियुक्ति करेंगे-एक पूर्व हाई कोर्ट न्यायाधीश और दूसरी एक वरिष्ठ महिला अधिवक्ता, जो बार में अच्छी स्थिति में हो। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सह-चयनित सदस्य ऐसे व्यक्ति होने चाहिए जिनका चुनाव प्रक्रिया से कोई संबंध नहीं हो, ताकि वे स्वतंत्र और तटस्थ सदस्यों के रूप में कार्य कर सकें।
कोर्ट ने अवलोकन किया, “जहां तक सह-चयन का सवाल है। हमने हमेशा 10% का ध्यान रखा है। सह-चयन उन लोगों का होना चाहिए जिनका चुनाव से कोई संबंध नहीं है।” कोर्ट ने स्पष्ट किया कि राज्य बार काउंसिल चुनाव में असफल महिला उम्मीदवार को सह-चयन के लिए विचार करने से अयोग्य नहीं माना जाएगा।
जस्टिस सुधांशु धूलिया की समिति को सौंपा मामला
महिलाओं के उम्मीदवारों के लिए स्थानांतरित मतों के निर्धारण के मुद्दे पर कोर्ट ने मामले को सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस सुधांशु धूलिया की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय पर्यवेक्षी समिति को सौंप दिया। समिति को बार के सदस्यों से सुझाव आमंत्रित करने और उन्हें मौखिक सुनवाई का अवसर देने के बाद कार्यप्रणाली पर पुनर्विचार करने के लिए कहा गया है।
महिलाओं को 30% प्रतिनिधित्व मिलना है
सुप्रीम कोर्ट ने बार काउंसिल आफ इंडिया व देशभर की राज्य बार काउंसिलों के चुनावों की निगरानी के लिए उच्चस्तरीय पर्यवेक्षी समिति बनाई थी। मामला राज्य बार काउंसिलों में महिलाओं के लिए आरक्षण ढांचे के कार्यान्वयन से संबंधित है। महिलाओं को 30% प्रतिनिधित्व मिलना है। इसमें 20% सीटें चुनावों से भरी जाएंगी व शेष 10% सह-चयन से।







