
रायपुर, छत्तीसगढ़ से इस वक्त की बड़ी खबर आ रही है. राज्य के बहुचर्चित कोल लेवी और अवैध वसूली मामले में जांच एजेंसी ने एक बार फिर शिकंजा कसा है. इस मामले में भिलाई नगर के कांग्रेस विधायक देवेंद्र सिंह यादव, बिलाईगढ़ के पूर्व विधायक चंद्रदेव राय, वरिष्ठ कांग्रेस नेता विनोद तिवारी और आरपी सिंह को नोटिस जारी किया गया है. यह नोटिस दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 170 के तहत भेजा गया है. नोटिस जारी होने के बाद प्रदेश की सियासत में फिर से हलचल तेज हो गई है.
क्या है मामला ?
मिली जानकारी के अनुसार सभी नेताओं को 5 अक्टूबर को सुबह 10:30 बजे रायपुर स्थित भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के विशेष न्यायाधीश के सामने पेश होने को कहा गया है. जांच एजेंसी का आरोप है कि अवैध कोयला परिवहन से हुई काली कमाई का एक बड़ा हिस्सा राजनीतिक लोगों तक पहुंचाया गया.
जांच में सामने आया है कि इस पूरे सिंडिकेट में पैसे के लेनदेन के लिए ‘D नवाज’ जैसे गुप्त कोडवर्ड का इस्तेमाल होता था. एजेंसी का दावा है कि इस अवैध वसूली के पैसे का उपयोग 2022 में हुए उपचुनाव के दौरान भी किया गया था. इसी आधार पर मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम समेत अन्य गंभीर धाराएं जोड़ी गई हैं.
कई कांग्रेस नेताओं के नाम सामने आए
ईडी की पहले की जांच रिपोर्ट और मुख्य आरोपी सूर्यकांत तिवारी के ठिकानों से मिली डायरियों में कई कांग्रेस नेताओं के नाम सामने आए थे. दस्तावेजों के मुताबिक चंद्रदेव राय को हर महीने इस सिंडिकेट से एक तय हिस्सा मिलता था. वहीं विनोद तिवारी को सिंडिकेट और नेताओं के बीच की अहम कड़ी बताया गया है, जो फंड के मैनेजमेंट में शामिल थे. आरपी सिंह पर वसूली तंत्र को चलाने में मदद करने और बदले में आर्थिक लाभ लेने का आरोप है.बता दें कि यह पूरा मामला 2020 से 2022 के बीच का है.
आरोप है कि ऑनलाइन परमिट सिस्टम को हटाकर मैन्युअल NOC सिस्टम लाया गया और प्रति टन 25 रुपये की अवैध वसूली शुरू की गई. इससे रोजाना 2 से 3 करोड़ रुपये की काली कमाई होती थी. जांच एजेंसियों का अनुमान है कि इस दौरान 500 से 540 करोड़ रुपये से ज्यादा की अवैध वसूली की गई, जिसे बेनामी संपत्ति, चुनावी खर्च और अधिकारियों के बीच बांटा गया.







