0 इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के 11वें दीक्षांत समारोह में 1800 विद्यार्थियों को प्रदान की गई उपाधि, 13 स्वर्ण, 07 रजत एवं 02 कांस्य पदक वितरित
रायपुर, राज्यपाल रमेन डेका ने कहा है कि देश के विकास में कृषि विश्वविद्यालयों की इसमें विशेष भूमिका है, क्योंकि भारत में कृषि केवल आर्थिक गतिविधि नहीं बल्कि हमारी संस्कृति, परंपरा और करोड़ों लोगों की आजीविका है। उन्होेंने कहा है कि भारत ने 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने का लक्ष्य निर्धारित किया है, जिसमें कृषि स्नातकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होगी। कृषि की पढ़ाई करने वाले विद्यार्थी ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर नवीन कृषि अनुसंधानों, प्रौद्योगिकी तथा नवाचारों का उपयोग कर देश की तरक्की में भागीदार बन सकते हैं। श्री डेका ने कृषि स्नातकों तथा शोधार्थियों से आव्हान किया कि वे अपने ज्ञान के उपयोग से भारत को विश्व का सबसे विकसित देश बनाने में अहम भूमिका निभाएं।
राज्यपाल श्री डेका आज यहां इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के 11वें दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे। दीक्षांत समारोह में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और कृषि मंत्री रामविचार नेताम भी शामिल हुए। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर के सभागार में आयोजित दीक्षांत समारोह में शैक्षणिक वर्ष 2024-25 तक उत्तीर्ण 1800 से अधिक छात्र-छात्राओं को ग्रेजुएशन, पोस्ट ग्रेजुएशन और पी.एच.डी की उपाधियां प्रदान की गई। इस अवसर पर मेधावी विद्यार्थियों को 13 स्वर्ण, 07 रजत एवं 02 कास्य पदक प्रदान किए गए। इसके साथ ही 128 शोधार्थियों को पीएचडी, 518 विद्यार्थियों को स्नातकोत्तर और 1234 विद्यार्थियों स्नातक उपाधि प्रदान की गई।
दीक्षांत भाषण भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली के पूर्व निर्देशक डाॅ. अशोक कुमार सिंह द्वारा दिया गया। कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल ने विद्यार्थियों को दीक्षोपदेश दिया। इस अवसर पर शोभा यात्रा भी निकाली गई जिसमें अतिथियों सहित विश्वविद्यालय के कुलपति, कुलसचिव, प्रबंध मण्डल के सदस्य, प्रशासनिक तथा विद्यापरिषद के सदस्य तथा पदक प्राप्त करने वाले विद्यार्थी शामिल हुए।
दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल श्री डेका ने कहा कि देश और दुनिया की बड़ी आबादी का पेट भरने के लिए खाद्यान्न एवं अन्य भोज्य सामग्री की हमेशा जरूरत पड़ेगी। प्रधानमंत्री ने वर्ष 2047 तक विकसित भारत की परिकल्पना प्रस्तुत की है एवं हम सबको इसे प्राप्त करने के लिए लगातार कार्य करना है। वर्तमान में हम सभी प्रकार के भोजन, अनाज, तिलहन, सब्जी, फल, दूध, मांस, मछली आदि के साथ लगभग 1000 मिलियन टन भोजन का उत्पादन कर रहे हैं। वर्ष 2047 तक इसे 1500 मिलीयन टन तक बढ़ाना होगा। यह एक चुनौतीपूर्ण कार्य है। बदलते मौसम एवं बाजार के उतार चढ़ाव से कृषि में जोखिम बढ़ गया है।
श्री डेका ने विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों से आग्रह किया कि ऐसी तकनीक का विकास करें जिससे किसानों की लागत कम हो एवं आय बढ़े। हमें प्राकृतिक खेती एवं दलहन, तिलहन के उत्पादन पर भी विशेष ध्यान देने की आवश्यकता हैं। उन्होंने कहा कि कृषि के क्षेत्र में लोगों को बनाए रखना आज एक बड़ी चुनौती है। कृषि कार्य को आसान बनाना एवं उनकी आय बढ़ाना हमारा प्रमुख उद्देश्य होना चाहिए। राज्यपाल ने इस अवसर पर इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय द्वारा कृषि शिक्षा, अनुसंधान, प्रौद्योगिकी विकास, नवाचार तथा कृषि प्रसार के क्षेत्र में किये जा रहे कार्याें की सराहना करते हुए छत्तीसगढ़ के विकास में कृषि विश्वविद्यालय के योगदान को रेखांकित किया।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस अवसर पर कहा कि दीक्षांत समारोह केवल एक शैक्षणिक उपलब्धि का उत्सव नहीं है, बल्कि यह आपके जीवन के एक नए अध्याय की शुरुआत भी है। आज आप एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में समाज में प्रवेश कर रहे हैं, और राष्ट्र निर्माण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने जा रहे हैं। इस विश्वविद्यालय ने विगत वर्षो में कृषि शिक्षा, अनुसंधान एवं प्रसार के क्षेत्र में बहुत अच्छा कार्य किया है। विश्वविद्यालय द्वारा विभिन्न फसलों की 160 से अधिक किस्में विकसित की गई है एवं 100 से अधिक उन्नत कृषि प्रौद्योगिकी विकसित की गई है। यह खुशी की बात है कि कृषि विश्वविद्यालय के अनुसंधान केंद्रों के वैज्ञानिक जलवायु परिवर्तन का मुकाबला करने वाले बीज तैयार कर रहे हैं।
समारोह के विशिष्ट अतिथि कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य कृषि के साथ-साथ उद्यानिकी के क्षेत्र में भी निरंतर प्रगति कर रहा है। नए अनुसंधान और तकनीक के माध्यम से किसान अपना उत्पादन बढ़ा रहे है और आर्थिक रूप से समृद्ध हो रहे है। इस कार्य मंे इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय का महत्वपूर्ण योगदान है। भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली के पूर्व निर्देशक डाॅ. अशोक कुमार सिंह ने कहा कि शैक्षणिक दृष्टि से इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है और एन.आई.आर.एफ. रैंकिंग में भारत के शीर्ष कृषि विश्वविद्यालयों में 28वाँ स्थान प्राप्त हुआ है। विश्वविद्यालय के कृषि विज्ञान केंद्रों ने हजारों किसानों को प्रशिक्षण, आधुनिक तकनीकों और सतत खेती पद्धतियों से सशक्त बनाया है, जिससे ग्रामीण समुदायों की आजीविका में सुधार हुआ है।
कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल ने दीक्षांत प्रतिवेदन में विश्वविद्यालयों की शैक्षणिक, अनुसंधान एवं विस्तार गतिविधियों और उपलब्धियों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय ने एन.आई.आर.एफ. रैंकिग में 39वें स्थान से छलांग लगाकर 28वां स्थान प्राप्त किया है जो विश्वविद्यालय की प्रगति को दर्शाता है। डाॅ. चंदेल ने सभी उपाधी प्राप्त करने वाले विद्यार्थी से आव्हान किया कि वे अपने ज्ञान और सामथ्र्य से देश के विकास में सहभागी बने और विश्वविद्यालय का नाम रौशन करें।
इस अवसर पर इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय द्वारा विकसित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस बेस्ड चैट बाॅट “आईजीकेवी कनेक्ट” एप का लोकार्पण भी किया गया जो विद्यार्थियों के लिए बहुत उपयोगी होगा। कुलसचिव डाॅ. कपिल देव दीपक ने अतिथियों के प्रति आभार प्रकट किया। दीक्षांत समारोह में छत्तीसगढ़ बीज विकास निगम के अध्यक्ष चन्द्रहास चन्द्राकर, महात्मागांधी उद्यानिकी विश्वविद्यालय सांकरा, पाटन के कुलपति डाॅ. आर.आर. सक्सेना, कामधेनु विश्वविद्यालय दुर्ग के कुलपति डाॅ. आर.आर.बी. सिंह, संत गहिरा गुरू विश्वविद्यालय, सरगुजा के कुलपति डाॅ. राजेन्द्र लाकपाले, आई.आई.आई.टी. के निदेशक डाॅ. ओम प्रकाश व्यास, आई.आई.टी भिलाई के निदेशक डाॅ. रवि प्रकाश, 3 सी.जी. एयर स्क्वाड्रन के विंग कमांडर विवेक कुमार साहू, कर्नल प्रनब कुमार कमांडिग आफिसर 8 सी.जी. बटालियन सहित प्रबंध मण्डल तथा विद्या परिषद के सदस्यगण, प्राध्यापक, वैज्ञानिक, विश्वविद्यालय के अधिकारी, उपाधि तथा पदक प्राप्त करने वाले विद्यार्थी तथा उनके पालकगण उपस्थित थे।






