
जयपुर, राजस्थान सरकार ने सीनियर आईएएस शिखर अग्रवाल को एपीओ कर दिया है। बीती देर रात को एपीओ करने के आदेश जारी हुए। कार्मिक विभाग के आदेश में एपीओ करने का प्रशासनिक कारण बताया गया है लेकिन माना जा रहा है कि सरकार ने उन्हें विला और कॉटेज खरीद मामले में एपीओ किया है। दो दिन पहले खबर आई कि शिखर अग्रवाल ने अपनी आईपीएस पत्नी, दोनों बेटों और सास ससुर के नाम से पिछले ढाई साल में एक ही कंपनी से 40 विला और कॉजेट खरीदे। जिस कंपनी से खरीदे, उसी कंपनी को सालाना 1.80 करोड़ रुपए में किराए पर भी दे दिए।
मामला सुर्खियों में आया तो सरकार ने लिया एक्शन
आईएएस और आईपीएस दंपति की ओर से अपने और पारिवारिक सदस्यों के नाम 40 विला और कॉटेज खरीदने का मामला सामने आने के बाद सरकार एक्शन मोड पर आई। चूंकि यह मामला पूरे देश में चर्चित हो गया। ऐसे में राज्य सरकार ने अपनी जीरो टॉलरेंस नीति पर कार्य करने के दावे के साथ आईएएस शिखरा अग्रवाल को पद से हटा दिया। आईएएस शिखर अग्रवाल वर्तमान में उद्योग, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम के एसीएस थे। वे दिल्ली-मुम्बई औद्योगिक कॉरिडोर और भिवाड़ी इंटीग्रेटेड विकास प्राधिकरण के विशेषाधिकारी भी थे। रीको के अध्यक्ष होने के साथ राजसीको के एमडी की भी जिम्मेदारी थी।

आईपीएस पत्नी पर कार्रवाई नहीं होने पर उठ रहे सवाल
राज्य सरकार ने आईएएस शिखर अग्रवाल को तो एपीओ कर दिया लेकिन उनकी आईपीएस पत्नी प्रशाखा माथुर पर फिलहाल कोई एक्शन नहीं लिया गया है। इसे लेकर लोग सरकार की मंशा पर सवाल उठा रहे हैं। लोगों का कहना है कि जब आईएएस शिखर अग्रवाल पर एक्शन हो गया तो उनकी पत्नी प्रशाखा माथुर पर एक्शन क्यों नहीं हुआ। खबर के मुताबिक प्रशाखा माथुर के नाम भी कई विला और कॉटेज हैं।
क्या पूरे मामले की जांच कराएगी सरकार
सरकार की ओर से शिखर अग्रवाल पर एक्शन लेने के बाद अब नई चर्चाएं छिड़ गई है। चर्चा यही है कि क्या सरकार इस पूरे मामले की जांच कराएगी। चूंकि गत ढाई साल में एक ही कंपनी से 6.15 करोड़ में 40 विला और कॉटेज खरीदना और उसी कंपनी को सालाना 1.80 करोड़ रुपए में यही विला कॉटेज लीज पर देना हैरान करने वाला है। अमूमन ऐसा कोई इन्वेस्टमेंट सिस्टम दिखाई नहीं देता जब निवेश की गई पूरी रकम महज तीन वर्ष में किराए के रूप में प्राप्त की जा सके। ऐसे में सरकार इस मामले की जांच भी करा सकती है।
कार्रवाई में अजीब संयोग यह भी
राज्य सरकार की ओर से आईएएस शिखर अग्रवाल पर कार्रवाई के मामले में एक अजीब संयोग भी देखा गया है। शिखर अग्रवाल इन दिनों विदेश दौरे पर गए हुए हैं। 10 नवंबर को भारत लौटना प्रस्तावित है। उनके विदेश में होने के दौरान बड़ी खबर सामने आना और सरकार द्वारा उन्हें पद से हटाना एक अलग तरह का मामला है।







